रिश्ते

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डियर आयुषी, मस्त रहो मस्ती में, बस आग न लगाओ बस्ती में

तुम ऐसी जगह हो जहां किसी के पास किसी को जज करने की फुर्सत नहीं

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क्या अपने रिश्ते में हर छोटी-छोटी बात का ख़याल आप ही रखती हैं?

सालगिरह, जन्मदिन, सबकी पसंद का खाना और मेहमाननवाजी, सब आप ही देख रही हैं तो ये स्वस्थ रिश्ता नहीं है.

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मेरी प्यारी बेटी आद्या! तुम एक आम मां की ख़ास बेटी हो

'शुक्रिया वो सब सिखाने के लिए जो मैं स्कूल, कॉलेज जाकर नहीं सीख पायी.'

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डियर आयुषी, सवाल पूछना कभी मत छोड़ना

जिस दिन तुमसे सवाल न पूछने को कहूं, ये चिट्ठी मुझे पकड़ा देना

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'प्यारी बेटी, तुमने टपकते नल को बंद कर आज मेरा दिन बना दिया'

एक पिता की अपनी बेटी को लिखी इस चिट्ठी से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं.

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डियर आयुषी, पता है हमारी असल दिक्कत क्या है?

हम लोगों के पास जो है उसके लिए कभी शुक्रगुजार नहीं होते

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डियर आयुषी, हमारी हर बात मानकर रोबोट न बन जाना

प्यारी बच्ची, तुम्हें किसी के जैसा नहीं बनना. अपने स्वभाव में किसी को देखकर बदलाव नहीं लाना.

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डियर आयुषी, इस दिवाली रौशनी सी क्रिएटिव बनो, बम सी डिस्ट्रक्टिव नहीं

तुम्हारा जीवन कागज़ जैसा है. उसको सुंदर रंगो या फाड़ दो, फैसला तुम्हें करना है.

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डियर आयुषी, एक बात याद रखना, कि सब कुछ याद रखना जरूरी नहीं

गलत बातों को अपने मन में सहेजकर मत रखो. वो जितनी देर तक तुम्हारे अंदर रहेगी, मन कड़वा करती रहेगी

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डियर आयुषी, मार्कशीट में नंबर भले कम रहें,अच्छे लोगों की कमी मत रखना

तुम अपने अंदर नंबर्स की नहीं इंट्रेस्ट की भूख पैदा करना

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