'जब पहली बार मेरे पीरियड आए और मुझे घर से 15 दिन के लिए बाहर कर दिया गया'

'उस दिन मुझे पता लगा, मैं लड़कों से बहुत अलग हूं.'

ऑडनारी ऑडनारी
जून 20, 2019

ये ब्लॉग हमें हमारी एक रीडर ने भेजा है. वो 33 साल की हैं. केरल से हैं और बेंगलुरु में रहती हैं. वर्किंग हैं और डायटीशियन हैं. उनकी एक 4 साल की बेटी है. उन्होंने इस ब्लॉग में एक रस्म के बारे में बताया है, जिसे लड़कियों के पीरियड शुरू होने पर मनाया जाता है. मलयालम में इसे तिरंदुकल्याणम कहते हैं.

मैं 11 साल की थी, जब मुझे पीरियड आने शुरू हुए. मुझे काफी हद तक आइडिया था कि पीरियड क्या होते हैं. मेरी कजिन और कुछ सहेलियों को हो चुके थे. मेरी जॉइन्ट फैमिली थी, इसलिए देखा था कि परिवार में लड़कियों के पीरियड शुरू होने पर त्योहार मनाया जाता है.

जब मैं छोटी थी और ये मेरी बड़ी बहनों के साथ हुआ, तो मैंने इंजॉय किया, लेकिन जब मेरा नंबर आया, तो पता चला कि ये उतना भी मजेदार नहीं है.

मैंने पीरियड आने पर अपनी बहन को बताया. उसने मां को और मां ने परिवार के बाकी लोगों को. मुझे नहाने को कहा गया और उसके बाद एक कमरे में बिठा दिया. उस कमरे में जिसमें मुझे अगले 15 दिन अकेले रहना था.

उस दिन मुझे पहली बार लगा कि मैं लड़कों से अलग हूं. मैं भाई के साथ नहीं खेल पा रही थी. घर के पुरुषों से बात नहीं कर पा रही थी. मेरे आसपास सिर्फ मां, बहन, चाची होती थीं. मुझे अलग खाना लाकर वहीं दिया जाता था. मैं उस कमरे और बाथरूम के अलावा कोई चीज छू नहीं सकती थी. मैं 15 दिन घर से बाहर भी नहीं निकल सकती थी.

सोलहवें दिन मुझे कमरे से बाहर लाया गया. मैंने नए कपड़े पहने, बहुत सारे गिफ्ट्स मिले, सोने की ज्वैलरी मिली. मैं फिर से स्कूल जाने, घूमने और भाई के साथ मस्ती करने के लिए फ्री थी.

पिछले कुछ सालों में केरल में इस फेस्टिवल को मनाने का ट्रेंड कम हुआ है. मेरी मां के समय पर इसे शादी की तरह सेलिब्रेट किया जाता था. अब उतनी तैयारियां नहीं होतीं. लेकिन अगर ऐसा नहीं भी होता, तो मैं ये सब अपनी बेटी के साथ नहीं दोहरा पाती.

इसके पीछे लॉजिक होता है कि पहले पीरियड में बाहर निकलने पर बुरी आत्माएं घेर लेती हैं. मैं पुराने रीति-रिवाजों का सम्मान करती हूं, लेकिन उसके लिए इस तरह परेशानियां झेलना मैं बर्दाश्त नहीं कर सकती.

अभी मेरी बेटी 4 साल की है. कुछ सालों बाद जब उसे पीरियड होंगे. मैं परंपरा निभाऊंगी, लेकिन मेरी बेटी 15 दिन घर में बंद नहीं रहेगी. बाहर निकलेगी. स्कूल जाएगी. दोस्तों के साथ खेलेगी. परंपराओं के लिए मैं उसके साथ वो सब नहीं कर सकती, जो मेरे साथ हुआ. जो मैंने झेला. मैं उससे 'अछूत' की तरह व्यवहार नहीं कर सकती.

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