लड़कियां टॉयलेट सीट को ऊपर या नीचे रखने को लेकर इतनी सेंटी क्यों हो जाती हैं?

वजह जानकर आप भी बोलेंगे, 'बात तो सही है बॉस'

फिल्में देखती ही होंगी आप. इंटरनेट पर विडियोज भी देखती होंगी. इनमें कई विडियोज लड़के-लड़कियों के साथ रहने पर भी होते हैं. उनकी रिलेशनशिप्स, किन चीज़ों को लेकर उनमें झगड़ा होता है, इन सब पर भी फनी विडियो बनते हैं. इनमें अक्सर एक बात पे बहुत फोकस किया जाता है. टॉयलेट सीट ऊपर या नीचे छोड़ने पर.

ये दिखाया जाता है कि लड़कियां कंप्लेन करती हैं कि लड़के टॉयलेट सीट ऊपर छोड़ देते हैं. नीचे नहीं करते. लड़के इस मामले को टाल देते हैं. अब इस बात पे स्टैंड अप कमीडियंस या वेब सीरीज में लोग बात करते हैं, तो सब हंस तो देते हैं. लेकिन इस बात पर आखिर झगड़ा होता क्यों है? दिमाग में एक दिन ऐसे ही बैठे-बैठे ख्याल आया था. सोचा एक बारी पूछ कर देखूं. जिन दोस्तों से पूछा उनको भी कुछ आइडिया नहीं था. सबसे पहले तो ये सीट ऊपर या नीचे रखने का मामला क्या है उसके लिए सीट, लीड और bowl का अंतर साफ़ करना ज़रूरी है. देख लीजिए. 

seat-750x500_021019062436.jpgनीचे वाली सतह सीट होती है, ऊपर वाली को लिड कहते हैं. सांकेतिक तस्वीर: यूट्यूब

अब वापस मुद्दे पर आते हैं. पूछते-पूछते मेरी एक अमेरिका वाली सहेली से बात हुई. उसने बताया कि उसका खुद उसके बॉयफ्रेंड से इस बात पर झगड़ा होता है. मैंने सोचा, चलो भई, फाइनली जवाब मिलेगा. उसने मुझे जो जवाब दिया था वो कुछ यूं था, 

‘लड़कियों को अगर टॉयलेट जाना हो, तो उनको सीट नीचे चाहिए होती है. क्योंकि अगर वो सिर्फ पेशाब करने भी जाती हैं, तो भी उनको सीट पर बैठना होता है. लड़कों के केस में ये चीज़ नहीं होती. वो खड़े होकर भी टॉयलेट इस्तेमाल कर सकते हैं. सिर्फ मलत्याग के टाइम उनको सीट चाहिए होती है. और ये जाहिर सी बात है कि कोई भी इंसान पेशाब के लिए ज्यादा बार टॉयलेट जाएगा. मलत्याग के लिए कम. इसलिए जब लड़कियां टॉयलेट का इस्तेमाल करती हैं, उनको हर बार सीट नीची करनी पड़ती है. बार बार सीट को छूना अनहाइजीनिक होता है. सिर्फ पेशाब करने जाने के लिए सीट नीची करनी पड़े, इससे बेहतर यही होता कि सीट नीची ही रखी जाए’. टॉयलेट जाने का भी अपना एटिकेट होता है. एटिकेट बोले तो मैनर्स. तरीका.

up-or-down-750x500_021019062551.jpgये बहस इन्टरनेट पर भी कई बार चलती देखी गई है. अभी तक इसका कोई सेटलमेंट हो पाया है, ये कहना मुश्किल है. सांकेतिक तस्वीर: ट्विटर

बड़े-बड़े सिक्खाड़ यही बताते हैं कि भई, टॉयलेट जाओ, तो सीट नीचे रखो. लड़के हो, और पेशाब करने जाओ, तो सीट ऊपर करो. फ्लश करो. उसके बाद सीट नीची कर दो. कई तो ये भी कहते कि लिड भी नीची कर देनी चाहिए. लेकिन वो मानना-ना-मानना उसकी बहस अलग है. आप हमारी बातों को हल्के में ले रहे हैं, लेकिन इस पर बाकायदा साइंटिफिक स्टडी की जा चुकी है. वो कैसे? भई वो ऐसे कि अगर एक घर में एक लड़का और एक लड़की साथ रह रहे हैं . दोनों का एक शेयर्ड बाथरूम है. तो सीट ऊपर रखने में ज्यादा फायदा है या नीची रखने में. बाकायदा परसेंटेज तक निकाला गया है.

कई लड़कियों ने कोरा (Quora) पर अपने एक्सपीरियंस शेयर किए. उन्होंने बताया कि अगर सीट ऊपर न हो, तो रात के अंधेरे में कई बार वो bowl में फिसल जाती हैं.  सुनने/पढ़ने पर हंसी आ रही होगी आपको. लेकिन एक लड़की के इसी तरह फिसल जाने की वजह से bowl टूट गया था. टूटे bowl से उसकी जांघ पर इतनी लम्बी चीर पड़ गई, कि 100 टांके लगाने पड़े. एक नर्स ने ये वाकया बयान किया था. खुदा न खास्ता ऐसा किसी के साथ भी हो. लेकिन चांस क्यों ही लेना.

u-d-2-750x500_021019062608.jpgसांकेतिक तस्वीर: ट्विटर

खैर, ये तो हुई मैनर्स की बात. हाइजीन को लेकर भी बहस चलती है लेकिन कुछ लोगों के अपने विचार हैं इसको लेकर. उनका मानना ये है कि अगर आप टॉयलेट सीट छूते हैं, तो बैक्टेरिया आपके हाथों पर लग जाते हैं. एक तरफ ये मन खट्टा देने वाली बात ज़रूर है. लेकिन इससे शरीर का इम्यून सिस्टम यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है ये भी तर्क दिया जाता है.

तो अब आप जान गए हैं कि आखिर टॉयलेट सीट को नीची रखने के लिए लड़कियां इतनी सेंटी क्यों होती हैं. अगली बार कोई जोक मारे तो हंसने से पहले एक बार इसके बारे में सोच ज़रूर लीजिएगा.

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