दूसरी बार प्रेगनेंट होने में दिक्कत आ रही है तो हो सकता है आपको ये बीमारी हो

एक बार बच्चा पैदा करने के बाद भी आ सकता है 'बांझपन'

सरवत फ़ातिमा सरवत फ़ातिमा
अगस्त 19, 2019
(फ़ोटो कर्टसी: Pixabay)

फ़ातिमा की पहली प्रेग्नेंसी को तीन साल हो गए थे. एक साल से वो दूसरे बच्चे के लिए ट्राई कर रही थी. पर वो सफ़ल नहीं हो पा रही थी. जब डॉक्टर को दिखाया तो पता चला कि उसे ‘सेकेंडरी इनफर्टिलिटी’ है. यानी दूसरी बार प्रेगनेंट होने में दिक्कत आना. ऐसा कई महिलाओं के साथ होता है. पहली प्रेग्नेंसी में कोई परेशानी नहीं होती. पर दोबारा प्रेगनेंट होने में मुसीबत होती है.

इसके बारे में और जानने के लिए हमने बात की डॉक्टर लवलीना नादिर से. वो फ़ोर्टिस दिल्ली में स्त्रीरोग विशेषज्ञ हैं.

क्या होती है ‘सेकेंडरी इनफर्टिलिटी’

डॉक्टर नादिर कहती हैं-

‘आसान शब्दों में समझें तो दोबारा बच्चा न कर पाना. या तो महिला दोबारा प्रेगनेंट नहीं हो पा रही होती. या प्रेगनेंट होने के बाद भी जिंदा बच्चा डिलीवर नहीं कर पाती. अगर आपकी उम्र 35 साल से ऊपर है, आप एक बार मां बन चुकी हैं, और आप छह महीने से लेकर एक साल तक लगातार कोशिश करने के बाद भी प्रेगनेंट नहीं हो रहीं तो मतलब आपको ‘सेकेंडरी इनफर्टिलिटी’ है.’

क्यों होती है ‘सेकेंडरी इनफर्टिलिटी’

इसके पीछे कुछ वजहें हैं-

उम्र

उम्र के साथ फर्टिलिटी यानी बच्चा पैदा कर पाने की क्षमता कम हो जाती है. 40 साल तक होते-होते 35 फ़ीसदी चांसेस घाट जाते हैं.

हॉर्मोन्स

हॉर्मोन्स की उथल-पुथल की वजह से दोबारा प्रेग्नेंसी में दिक्कत होती है. इनकी वजह से थाईरॉयड या पीसीओडी भी हो सकता है.

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दूसरी बार प्रेगनेंट होने में दिक्कत आना. ऐसा कई महिलाओं के साथ होता है. (फ़ोटो कर्टसी: Pixabay)

एंडोमेट्रियोसिस

एंडोमेट्रियोसिस एक ऐसी समस्या है जिसमें गर्भाशय के अंदर पाया जाने वाला टिश्यू बढ़कर गर्भाशय के बाहर फैलने लगता है. इसकी वजह से पीरियड्स के दौरान काफी दर्द भी रहता है.

सेक्स से होने वाली बीमारियां

सेक्स के दौरान कई बार इन्फेक्शन भी हो जाता है. जैसे क्लैमिडिया और गोनोरिया. उसकी वजह से भी प्रेगनेंट होने में दिक्कत होती है.

टिश्यू में स्कारिंग

अगर पहली डिलीवरी ऑपरेशन से हुई है तो कई बार टिश्यू में स्कारिंग हो जाती हैं. यानी टिश्यू को नुकसान पहुंचना. इसकी वजह से फैलोपियन ट्यूब भी ब्लॉक हो जाते हैं. फैलोपियन ट्यूब ही अंडे ओवरी से गर्भाशय तक पहुंचाते हैं. अब इनके ब्लॉक होने का मतलब है कि अंडे और स्पर्म आपस में मिल नहीं पाते.

गर्भाशय में स्कारिंग

कभी-कभी सर्जरी की वजह से गर्भाशय को भी नुकसान पहुंच जाता है. इसकी वजह से भले ही अंडा स्पर्म से मिल भी जाए, तो भी वो गर्भाशय की अंदरूनी परत पर जाकर नहीं चिपकता.

एबॉर्शन

एक बार एबॉर्शन हो जाए तो उसके बाद भी प्रेगनेंट होने में दिक्कत होती है.

इलाज

डॉक्टर नादिर कहती हैं-

‘हां, इसका इलाज मुमकिन है. जब भी हमारे पास कोई ऐसा केस आता है तो सबसे पहले तो हम फैलोपियन ट्यूब चेक करते हैं. बाकी इलाज कंडीशन पर निर्भर करता है.’

‘सेकेंडरी इनफर्टिलिटी’ में ज़रूरी है कि आप धैर्य न खोएं.

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