सुचेता कृपलानी: आज़ादी की रात स्टेज पर वंदे मातरम गाने वालीं, इंडिया की पहली महिला मुख्यमंत्री

क्या है सुचेता कृपलानी का बसपा सुप्रीमो मायावती से कनेक्शन

सुचेता मजूमदार बंगाली परिवार में जन्मी थीं. साल था 1908. जगह थी अम्बाला, जो उस समय पंजाब में पड़ता था. आज हरियाणा में है. स्कूल में पढ़ती थीं, तब से ही अंग्रेजी राज के खिलाफ विद्रोह की इच्छा थी. जब 1919 में जलियांवाला बाग़ हत्याकांड हुआ था, तब प्रिंस ऑफ वेल्स दिल्ली आए थे. उस समय सुचेता और सुलेखा दोनों बहनें एक स्कूल में पढ़ रही थीं. उन्हें प्रिंस ऑफ वेल्स के सम्मान समारोह में खड़े होने के लिए ले जाया गया था. कुदसिया गार्डन के पास. दोनों बहनें मना करना चाहती थीं, लेकिन नहीं कर पाईं. इसके बारे में सुचेता ने बाद में लिखा,

‘लेकिन इसने हमारी अंतरात्मा को शर्मिंदा होने से नहीं बचाया. हम दोनों को अपनी कायरता की वजह से बहुत छोटा महसूस हुआ’.

सुचेता ने दिल्ली के इन्द्रप्रस्थ कॉलेज से ग्रेजुएशन की. उसके बाद आज़ादी की लड़ाई में भाग लेना चाहती थीं, लेकिन 1929 में उनके पिता और बहन दोनों गुज़र गए. परिवार की ज़िम्मेदारी उन पर आ पड़ी. सुचेता बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी में पढ़ाने चली गईं. वहीं पर आचार्य जे बी कृपलानी आज़ादी की लड़ाई के लिए वालंटियर्स ढूंढने आए थे. जे बी कृपलानी यानी जीवटराम भगवानदास कृपलानी. गांधी जी के काफी करीबी थे, कांग्रेस में महत्त्वपूर्ण पदों पर रहे. भारत छोड़ो आन्दोलन और उसके बाद इमरजेंसी के दौरान उनकी काफी जरूरी भूमिका रही. खैर, BHU में दोनों की मुलाकात हुई. जब 1934 में बिहार में भयंकर भूकंप आया था, तब उसके बाद सुचेता और कृपलानी वहां गए थे. राहत कार्य के लिए. वहीं पर दोनों की जानपहचान बढ़ी. एक दूसरे को पसंद करना शुरू किया. इसी दौरान जमनालाल बजाज ने सुचेता को अपने महिला आश्रम में आने का न्योता दिया. ये आश्रम महिलाओं को आज़ादी की लड़ाई में भाग लेने के लिए तैयार करता था. लेकिन इसके बारे में सुचेता ने लिखा:

suche-750x500_062519015030.jpgसुचेता शुरू से ही आज़ादी की लड़ाई का हिस्सा बनना चाहती थीं. तस्वीर: विकिमीडिया

‘विनोबा भावे शायद बोर्ड के चेयरमैन थे. उनको मुझे चुनकर अपनी सहमति देनी थी. जब मुझे उनसे मिलने के लिए ले जाया गया, तो वो उस समय अनशन पर थे. ताकि दो लोगों के पापों का प्रायश्चित कर सकें. ये दो लोग उसी आश्रम में रहते थे,  और एक दूसरे से प्रेम करने लगे थे. दोनों आश्रम में उतरी हुई सी सूरत लेकर घूम रहे थे. ये सब कुछ मुझे बेहद अतिरेकपूर्ण लगा. विनोबा का कड़क स्वभाव और हद दर्जे का खुद को सजा देने का तरीका जो था, उसने मुझे महिला आश्रम में आने से रोक दिया’.

कृपलानी और सुचेता को साथ काम करते-करते प्रेम हुआ और दोनों ने शादी करने का मन बना लिया.

दोनों के परिवारवाले इस रिश्ते के सख्त खिलाफ थे. क्योंकि कृपलानी सुचेता से 20 साल बड़े थे. गांधी जी भी इस रिश्ते के खिलाफ थे. उनको लगता था कि शादी के बाद वो कृपलानी को खो देंगे. लेकिन सुचेता ने उनसे कहा कि ऐसा कुछ नहीं होगा. उल्टे गांधी जी को कृपलानी के साथ सुचेता भी मिल जाएंगी. इस तरह दोनों ने गांधी जी को मनाया.

j-b-krip-patel-n-daughter-750x500_062519015122.jpgजे बी कृपलानी बाएं, सरदार वल्लभभाई पटेल (बीच में), उनकी बेटी मणिबेन पटेल (दाएं)

सुचेता ने भारत छोड़ो आन्दोलन में हिस्सा लिया. ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की स्थापना की. 1942 में जब महात्मा गांधी पुणे में अनशन कर रहे थे, उस समय कांग्रेस के सभी बड़े नेताओं के लिए अरेस्ट वारंट जारी हो चुके थे. सुचेता का नाम भी उनमें से था. लेकिन अनशन करते हुए महात्मा गांधी की तबियत बिगड़ने लगी थी. सुचेता अंडरग्राउंड थीं, लेकिन उन्होंने होम सेक्रेटरी से गुज़ारिश की कि वो एक बार गांधी जी से मिलना चाहती हैं. भले ही उनसे मिलने के बाद उनको अरेस्ट कर लिया जाए. वो खुद ही गिरफ्तारी दे देंगी. होम सेक्रेटरी ने गवर्नर से बात की, उन्हें गांधी जी से मिलने दिया गया. यही नहीं, उनको चेतावनी देकर मुंबई छोड़ने की बात कही गई. अरेस्ट नहीं किया गया उन्हें. बंटवारे के समय होने वाले दंगों में उन्होंने गांधी जी के साथ मिलकर काफी सहायता पहुंचाई. वो गांधी जी के साथ नोआखाली भी गई थीं 1946 में.

1947 में जब जवाहरलाल नेहरू ने मशहूर ट्रिस्ट विद डेस्टिनी स्पीच दी थी, तब उनके पहले सुचेता ने वंदे मातरम गाया था. वो उन 15 महिलाओं में से एक थीं जिन्हें संविधान लिखने के लिए चुना गया था. संविधान सभा की सदस्य भी रहीं वो.

suche-3-750x500_062519015219.jpgकृपलानी और सुचेता के बीच राजनैतिक मतभेद बहुत थे, लेकिन इनका असर उनके रिश्ते पर नहीं पड़ा.

आज़ादी के बाद भी सुचेता राजनीति में सक्रिय रहीं. कांग्रेस की तरफ से. पूरे भारत में किसी भी राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड उनके नाम है. उनके पति जे बी कृपलानी कांग्रेस से अलग हो गए थे. सुचेता कांग्रेस की कट्टर समर्थक थीं. हालांकि जब कृपलानी और नेहरू के बीच अनबन हुई और कृपलानी ने कांग्रेस से अलग होकर अपनी खुद की पार्टी बनाई तो सुचेता भी उनके साथ हो ली थीं. पार्टी का नाम था किसान मजदूर प्रजा पार्टी. साल था 1950. इसी पार्टी के टिकट पर उन्होंने 1952 के पहले लोकसभा चुनावों में जीत दर्ज की. नई दिल्ली लोकसभा सीट पर. किन ज्यादा समय तक उस पार्टी के साथ निभ नहीं पाई उनकी. उनके पॉलिटिकल डिफरेंसेज काफी थे, और सुचेता कांग्रेस में वापस लौट आईं. 1957 में जब दूसरे लोकसभा चुनाव हुए, तब सुचेता ने नई दिल्ली की सीट जीती. लेकिन इस बार कांग्रेस के टिकट पर.

1963 में देश की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं. राज्य था उत्तर प्रदेश. मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने एक बहुत बड़ी हड़ताल को संभाला था. राज्य कर्मचारी वेतन बढ़ाने के नाम पर हड़ताल कर रहे थे. ये 62 दिनों तक चली थी. लेकिन सुचेता नहीं झुकीं. तब ही बात-चीत शुरू हुई जब राज्य कर्मचारी समझौता करने को तैयार हुए.

सुचेता के बाद उत्तर प्रदेश की महिला मुख्यमंत्री बनने वालीं मायावती ही रहीं. इंटरेस्टिंग बात ये है कि उनका जन्म दिल्ली के सुचेता कृपलानी हॉस्पिटल में हुआ था.

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