24 साल तक कट्टर कांग्रेसी रहीं नेता ने बीजेपी जॉइन करने के पीछे ये तर्क दिया

अबकी इलाहाबाद सीट से रीता बहुगुणा जोशी लोकसभा चुनाव लड़ रही हैं.

उत्तर प्रदेश में जब विधानसभा चुनाव हुए, किसी ने नहीं सोचा था कि सपा-बसपा का गढ़ बन चुके इस राज्य में बीजेपी इतनी तगड़ी बाजी मारेगी. 2017 में बीजेपी ने बाकी सभी पार्टियों को हरदी-गुरदी बुलवा दिया. और सीएम बन गए अजय सिंह बिष्ट. वही, योगी आदित्यनाथ. काफी समय से हाथ न लगे राज्य में ऐसी जीत दर्ज करना बीजेपी के लिए भी एक बहुत बड़ा प्रोत्साहन बनकर सामने आया. इसलिए अब लोकसभा चुनाव में बीजेपी दांव खेल रही है कि उत्तर प्रदेश उसके हाथों में बना रहे.

इसलिए लोकसभा चुनाव 2019 में जिन कैंडिडेट्स को पार्टियों ने चुनाव में उतारा है उन पर लगातार नज़र बनी हुई है. इस इलेक्शन में महत्वपूर्ण सीट्स पर कौन-कौन खड़ा हुआ है, चुनाव के नतीजे किस तरफ झुकने के आसार हैं. इसी सिलसिले में महिला उम्मीदवारों पर भी काफी कयास लगाए जा रहे हैं. इलाहाबाद सीट से रीता बहुगुणा जोशी खड़ी हुई हैं.

rita-bahuguna-750x500_050519090402.jpgतस्वीर: ट्विटर

हैं कौन आखिर?

कट्टर कांग्रेसी थीं 24 साल तक. 2016 में बीजेपी जॉइन की. अभी फिलहाल लखनऊ कैंट सीट से विधायक हैं. लेकिन बीच-बीच में इन्होंने भी पार्टी बदली.

हेमवती नंदन बहुगुणा और कमला बहुगुणा के घर जन्म हुआ. हेमवती नंदन बहुगुणा की दो शादियां हुई थीं. उनकी पहली बीवी हमेशा गांव में रहीं, उनके बारे में जानकारी ज्यादा उपलब्ध नहीं है. लेकिन कमला बहुगुणा जाना-पहचाना नाम रहीं. हेमवती नन्दन बहुगुणा उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री रह चुके थे 1973 से 1975 तक. मां कमला बहुगुणा भी सांसद रही थीं. फूलपुर से. इस पॉलिटिकल बैकग्राउंड के साथ रीता का पॉलिटिक्स में आना काफी आसान चॉइस रही.  1984 में जब चुनाव हुए, तब इनके पिता और अमिताभ बच्चन का आमना-सामना हुआ था इलाहाबाद सीट पर. अमिताभ इसमें जीते थे.

तो रीता बहुगुणा जोशी ने पॉलिटिक्स में कदम रखा महापौर (मेयोरल –Mayoral) चुनावों से. मेयर बनीं 1995 में. ये सीट उस समय महिलाओं के लिए आरक्षित थी. 1998 में सुल्तानपुर से लड़ीं, समाजवादी पार्टी के टिकट पर. 1999, 2009, और 2014 के लोकसभा चुनाव लड़ीं कांग्रेस के टिकट पर, लेकिन किसी भी लोकसभा चुनाव में जीत नहीं दर्ज करा पाईं. ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की अध्यक्ष भी रहीं. उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमिटी की भी प्रेजिडेंट थीं. इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में मिडाइवल और मॉडर्न हिस्ट्री  (मध्ययुगीन और नवीन इतिहास) की प्रफेसर रह चुकी हैं. 2011 में उत्तर प्रदेश के भट्टा परसौल गांव में राहुल गांधी के साथ रीता भी गई थीं. वहां किसान राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे. किसानों के समर्थन में उनके साथ प्रदर्शन में हिस्सा लिया था उन्होंने. वहां पर इन लोगों को गिरफ्तार किया गया था.

rita-1-750x500_050519090424.jpgतस्वीर: फेसबुक

लेकिन पुलिस से ये उनका पहला साबिका नहीं था. 2009 में जब उत्तर प्रदेश में मायावती की सरकार थी, तब उन्होंने रेप विक्टिम्स को दिए जाने वाले मुआवजे पर बयान दिया था. उन्होंने रेप के बढ़ते मामलों पर बयान देते हुए कहा था कि कई मामलों में रेप विक्टिम्स को 25,000 रुपए मुआवजा दिया जा रहा है. उन्होंने अपने भाषण में कहा, कि मायावती के मुंह पर पैसे फेंक कर कहना चाहिए, 'आपका भी रेप हो तब हम आपको एक करोड़ रुपए देंगे'. इस कमेन्ट के लिए उन्हें मुरादाबाद की जेल में 14 दिन की जुडिशियल कस्टडी में रखा गया था.

कांग्रेस छोड़ने के पीछे रीता बहुगुणा जोशी ने ये वजह बताई कि जब सर्जिकल स्ट्राइक्स हुईं तो सभी ने माना इसे. टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, ‘जब पूरे विश्व ने स्वीकार कर लिया कि हमने सर्जिकल स्ट्राइक्स की हैं, तब ये मुझे बिलकुल भी अच्छा नहीं लगा कि कांग्रेस और दूसरी पार्टियों ने इस पर सवाल उठाया’.

अब इलाहाबाद वाली सीट से चुनाव लड़ रही हैं बीजेपी के टिकट पर. इनके सामने खड़े हैं कांग्रेस के योगेश शुक्ल, और समाजवादी पार्टी के राजेंद्र पटेल. चुनाव 12 मई को होंगे. जीत-हार का फैसला 23 मई को होगा.

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