प्रभास के गाने 'साइको सैंय्या' में ये तीन बड़ी दिक्कतें हैं जिनपर किसी का ध्यान नहीं गया

बनता है, प्रभास के आगे कुछ देख पाना मुश्किल है.

सरवत फ़ातिमा सरवत फ़ातिमा
जुलाई 08, 2019
(फ़ोटो कर्टसी: YouTube)

शायद ही कभी किसी गाने को लेकर इतनी दीवानगी देखी गई हो. पर बात जब प्रभास की हो तो सब कुछ मुमकिन है. उनकी आने वाली फ़िल्म ‘साहो’ का गाना ‘साइको सैंय्या’ 7 जुलाई को रिलीज़ हुआ है. रिलीज़ होने के कुछ घंटों के अंदर ही ‘साइको सैंय्या’ ट्विटर पर ट्रेंड करने लगा. अभी भी कर ही रहा है. यूट्यूब पर 5 लाख के ऊपर व्यूज़ हैं.

‘बाहुबली’ के बाद प्रभास की फैन फॉलोविंग करोड़ों में पहुंच गई है. उनकी अगली फिल्म 'साहो' का उनके फैन्स बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. फिल्म रिलीज़ के लिए तैयार भी है. फिल्म हिंदी, तमिल और तेलगु भाषाओं एक साथ रिलीज़ होगी. इसमें श्रद्धा कपूर भी लीड रोल में नजर आएंगी. पिक्चर 15 अगस्त को रिलीज़ हो रही है. 13 जून को फ़िल्म का टीज़र रिलीज़ हुआ था. 300 करोड़ की लगत से बनी इस फ़िल्म के टीज़र ने इंटरनेट पर आग लगा दी थी. थिएटर में जब इसका टीज़र दिखाया गया तो प्रभास के फैन्स ख़ुद को रोक नहीं पाए. हॉल में ही उनका नाच-गाना शुरू हो गया. ऐसा ही एक वीडियो श्रद्धा कपूर ने शेयर किया था. ये सब देखकर वो ख़ुद भौंचक्का रह गईं.

फिलहाल दो मिनट और 11 सेकंड के गाने ‘साइको सैंय्या’ को लोग ख़ूब पसंद कर रहे हैं. पर इस गाने में जो दिक्कतें हैं वो किसी को नज़र नहीं आ रहीं. हम समझ सकते हैं कि प्रभास के आगे कुछ भी दिखना मुश्किल है. लेकिन दिक्कत तो दिक्कत है. इस पर आगे बात करने से पहले आप ये गाना एक बार देख ही लीजिए.

1. सबसे पहली बात. गाने का टाइटल ‘साइको सैंय्या’. सुनने में चाहे ये गाना जितना भी अच्छा लगे. पर इसके शब्द प्रॉब्लमैटिक हैं. हम बहुत ही चलते-फिरते ‘साइको’ और ‘मेंटल’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं. बिना इनकी गहराई को समझे. कुछ समय पहले कंगना रानौत की फ़िल्म ‘जजमेंटल है क्या’ के साथ भी यही हुआ था. पहले फ़िल्म का नाम ‘मेंटल है क्या’ था. तब ‘इंडियन साइकिऐट्रिक सोसाइटी’ ने फ़िल्म के टाइटल पर ऐतराज़ जताया था. उन्होंने सेंसर बोर्ड के चेयरपर्सन प्रसून जोशी को पत्र लिखकर इसकी शिकायत की थी. टाइटल से उनकी शिकायत थी कि वो मानसिक रोगों से जूझ रहे लोगों का एक अपमान है. उनका मज़ाक उड़ाता है.

पता नहीं ये बात कितनी लोगों को समझ में आई. क्योंकि अब वैसी ही गलती इस गाने में की गई है. ‘साइको’ शब्द का इस्तेमाल करके. इस शब्द का मतलब होता है कोई ऐसा इंसान जो मेंटली स्टेबल यानी मानसिक रूप से स्थिर नहीं है. उसे कोई गंभीर मानसिक डिसऑर्डर है. इतना कि उसका रियलिटी से वास्ता टूट चुका है. शायद ज़्यादा लोगों को इसके इलाज के बारे में भी कोई जानकारी नहीं है. काफ़ी मुश्किल होता है. दवाइयों और थैरेपी से ठीक करने की कोशिश की जाती है. पर ये ऐसा शब्द नहीं है जिसपर हम ठुमके लगाएं. जैसे आप कैंसर या एड्स पर गाना बनाकर उसपर नाच नहीं सकते, वैसे ही साइको भी एक शब्द है. क्योंकि ये एक मानसिक बीमारी है, इसलिए लोग इसे हल्के में लेते हैं. बाकी मानसिक दिक्कतों की तरह. और यही वजह है कि बात जब मेंटल हेल्थ की आती है तो हम उसको उतनी एहमियत नहीं देते जितनी उसको देनी चाहिए.

2. अगर आपने ये गाना देखा है तो आपकी नज़रें प्रभास पर टिक गई होंगी. क्योंकि पूरे गाने में सिर्फ वही हैं. ऐसे गानों में एक्ट्रेसेस महज़ एक प्रॉप की तरह इस्तेमाल होती हैं. हीरो के इर्द-गिर्द नाचती हैं. हीरो उसे देखता है. हिरोइन अपने साथ मौजूद कुछ बैकग्राउंड डांसर्स के साथ नाचती है. उसके शरीर को ऑब्जेक्टीफाई किया जाता है. कभी डांस के स्टेप्स से. कभी गाने के बोल से. कभी उसके कपड़ों से. इस गाने में भी लड़की ये कह रही है कि वो ‘एक सीधी लड़की जिसने शराब पी ली है.’ और अब वो बहक गई है. और ये लाइन लेकर चलती है हमें इस गाने की तीसरी दिक्कत पर.

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ये तस्वीर देखकर आपके दिमाग में पहला ख़याल क्या आया? ये गाने से लिया गया स्क्रीनशॉट है. (फ़ोटो कर्टसी: YouTube)

3. आमतौर पर कई डांस नंबर्स एक ही तरह का पैटर्न फॉलो करते हैं. लड़की शराब पी लेती है. फिर झूमती है. ये हमने अनगिनत गानों में देखा है. प्रीति जिंटा का गाना ‘इट्ज़ द टाइम टू डिस्को’ में भी. क्योंकि लड़की शराब पीकर ख़ुद को संभाल नहीं सकती, उसे एक पुरुष की ज़रूरत है. जो उसे प्रोटेक्ट कर सके. आदमी कितनी भी पी ले, उसे कोई चिंता नहीं. ज़्यादा से ज़्यादा अपना वॉलेट या घड़ी खोने का डर होता है. पर लड़की को रेप का डर रहता है. इसलिए उसको रक्षक की ज़रूरत है. ‘साइको सैंय्या’ में भी प्रभास यही कर रहे हैं.

गाने के बोल कुछ ऐसे हैं:

‘ओह सैंय्या, सैंय्या रे

मैं तेरा सिपाईयाह रे

जो पकड़ूं कलैय्या रे

छोड़ूं न आज

लेके आजा तेरे भाई को, भाई को.’

अर्थात तुमने पी ली है मोहतरमा, तो मैं तुम्हारा सिपाही हूं. तुम्हें बचाऊंगा. तुम्हारी कलाई पकड़ लूंगा तो छोड़ूंगा नहीं. चाहे तुम अपने भाई को बुला लाओ.

ज़ाहिर सी बात है किसी का ध्यान इन शब्दों पर गया नहीं. कैसे ही जाएगा. हमें आदत है. इस सब चीज़ों में हमें कोई दिक्कत नहीं लगती.

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