भूलकर भी ये ऐप डाउनलोड न करें, ऑनलाइन ठगी का इनका तरीका सिर चकरा देने वाला है

'एनीडेस्क' नाम का ऐप आपके फ़ोन में तो नहीं है?

नेहा कश्यप नेहा कश्यप
जुलाई 17, 2019

जिस तरह ऑनलाइन बैंकिंग, स्मार्टफोन और ऐप्स को लेकर टेक्नोलॉजी हर रोज बदल रही है. वैसे ही ठगी के तरीके भी हाईटेक होते जा रहे हैं. सावधानी और सतर्कता ही वो कारगर तरीका है, जिससे धोखाधड़ी और जालसाजी से बचा जा सकता है. सायबर ठग इस बार ऐप के जरिये मोबाइल नेट बैंकिंग यूजर्स को निशाना बना रहे हैं. 

प्राइवेट बैंक HDFC अपने ग्राहकों को एक लिंक भेजकर जालसाजी के इस नए तरीके के बारे में बता रहा है. HDFC बैंक के मुताबिक नेट बैंकिंग इस्तेमाल करने वालों के साथ ‘AnyDesk ऐप’ के जरिये धोखाधड़ी की जा रही है. लेकिन ऑनलाइन ठगी के लिए कई और ऐप्स का भी इस्तेमाल किए जा रहे हैं. कैसे? डिटेल में बताते हैं.

online_11_1519060071_650x488_750x500_071719060430.jpgसांकेतिक तस्वीर

  • देखिए, होता क्या है कि लोगों के पास एक कॉल आता है. वो ठग का कॉल होत है. कहा जाता है कि फलाने बैंक या कंपनी से एजेंट बात कर रहा है. इसके बाद ठग मोबाइल बैंकिंग इस्तेमाल करने के बारे में पूछते हैं. हां, कहते ही व्यक्ति को कहा जाता है कि बैंक के ऐप में कोई दिक्कत है, जिसे ठीक करना होगा. नहीं तो दिक्कत झेलनी पड़ सकती है.
  • इसके बाद प्ले स्टोर से ऐप या किसी ऐप स्टोर वेबसाइट से एपीके ऐप डाउनलोड करने को कहा जाता है. यही ऐप वो कड़ी होती है जिसके जरिये ठग आपके मोबाइल तक पहुंच बना लेता है. 
  • स्मार्टफोन पर ऐप डाउनलोड करने के बाद एक कोड आता है, जिसे शेयर करने के लिए कहा जाएगा. इसके बाद ऐप में कुछ परमिशन अप्रूव करने को बोला जाएगा.
  • परमिशन देते ही आपका स्मार्टफोन फ्रॉड के कंट्रोल में होगा. आपके फोन में सेव पिन, पासवर्ड, OTP (वन टाइम पासवर्ड), फायनेंशियल ट्रांजेक्शन की डिटेल्स ठग के पास पहुंच जाएगी और आपको इसके बारे में पता भी नहीं चलेगा.
  • फ्रॉडर्स कई बार एसएमएस भेजते हैं. इसके बाद ग्राहक से उस एसएमएस को किसी मोबाइल नंबर पर फॉरवर्ड करने के लिए कहा जाता है. इसके जरिये जालसाज आपका यूपीआई रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर ट्रेस कर लेते हैं और अकाउंट संबंधी जानकारी जालसाजों तक पहुंच जाती है.
  • इसके अलावा ठग ग्राहक के वर्चुअल पेमेंट एड्रेस जैसे नेट बैंकिंग की लॉगिन आईडी वगैरह पर रिक्वेस्ट भेजकर उसे एक्सेप्ट करने के लिए कहते हैं. कहा जाता है कि इसे एक्सेप्ट करने पर आपको क्रेडिट स्कोर या रिफंड मिलेगा. लेकिन ऐसा करते ही आपके अकाउंट से संबंधित सारी जानकारी ठगों तक पहुंच जाती है और वो आपके पैसों में सेंध लगाने में सफल हो जाते हैं.

जालसाजी से कैसे बचें

-हर उस फोन कॉल से सावधान रहें, जो खुद को किसी कंपनी या बैंक से बताते हुए किसी ऐप को डाउनलोड करने के लिए कहे. या आपसे ओटीपी, पिन, नेटबैंकिंग पासवर्ड की मांग करे.

-अगर आप बैंक नेट बैंकिग से रिलेटेड कोई अन्य ऐप फोन में इंस्टॉल कर चुके हैं, तो तुरंत उसे हटा दें.

-मोबाइल बैंकिंग से संबंधित ऐप्स में एप लॉक इस्तेमाल करें.

अगर आपके मोबाइल पर कोई भी संदिग्ध कॉल आता है और खाते से जुड़ा मोबाइल नंबर, ओटीपी, एटीएम पिन या नेट बैंकिंग पासवर्ड पूछा जाता है, तो संबंधित बैंक में इसकी शिकायत करें.

sm_digital_bank_account_1_3_1493895555_618x347_750x500_071719060623.jpgसांकेतिक तस्वीर

क्या न करें

-किसी वेबसाइट या ऐप पर अपने बैंकिंग पासवर्ड, ओटीपी या कोड को न डालें.

-UPI नंबर, डेबिट-क्रेडिट कार्ड, CVV, डेबिट कार्ड की एक्सपायर डेट, OTP, एटीएम पिन, बैंक अकाउंट नंबर जैसे डिटेल्स किसी को भी न दें.

-किसी कॉलर के कहने पर अपने मोबाइल फोन पर स्टोर या प्ले स्टोर से ऐप या ऐप की एपीके फाइल डाउनलोड न करें.

-गूगल के भरोसे न बैठें. कई बार लोग गूगल पर बैंक, टेलीकॉम कंपनी या अन्य संस्थाओं से जुड़े फोन नंबर, कस्टमर केयर खोजते हैं. ये नंबर फर्जी हो सकते हैं. इनपर कॉल करने और जानकारी शेयर करने से पहले सावधान रहें.

-किसी एजेंट, बैंक अधिकारी, बैंक कर्मचारी की तरफ से आए एसएमएस को अपने मोबाइल नंबर से किसी और नंबर पर फॉरवर्ड न करें. ऐसा करते ही आपके मोबाइल नंबर की ट्रेंसिंग शुरू हो जाती है, जिसके जरिये आपके बैंकिंग डिटेल्स लीक हो सकते हैं.

upi_750x500_071719060718.jpgUPI ऐप.

क्या है यूपीआई

UPI (यूनीफाइड पेमेंट इंटरफेस) एक ऐप है, जो ऑनलाइन पेमेंट और मनी ट्रांसफर प्लेटफॉर्म के रूप में काम करता है. यूपीआई पेमेंट सिस्टम आपके बैंक अकाउंट से लिंक मोबाइल नंबर के जरिये ही अकाउंट की जानकारी जुटाता है. इसमें ग्राहक का मोबाइल नंबर मेन होता है. सिर्फ नंबर के जरिये ऑनलाइन पेमेंट नहीं किया जा सकता है. आईडी या पासवर्ड की जरूरत नहीं होती. इसलिए मोबाइल नंबर के जरिये बैंकिंग डिटेल्स लीक किए जा सकते हैं.

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