नीतू वेल्डर: एक हाथ काम नहीं करता, फिर भी वेल्डिंग की पूरी दुकान संभालती हैं

माता-पिता बोलते थे, 'काश एक बेटा होता'.

लालिमा लालिमा
जनवरी 10, 2019
वेल्डर नीतू. फोटो- ऑडनारी. (स्ट्रिंगर- अनूप कुमार शर्मा)

'काश एक बेटा होता, तो आज सब कुछ ठीक हो जाता. घर संभाल लेता.'

ये डायलॉग, हमारे देश के कई सारे घरों में बोला जाता है. ऐसे घरों में बोला जाता है, जहां केवल लड़कियां होती हैं. हर वो मां-बाप बोलते हैं, जिन्हें केवल बेटियां होती हैं, बेटा नहीं. ये बात ऐसी है, जो हर उस लड़की को चुभती है, जिसकी कई बहनें होती हैं, भाई नहीं. ऐसी चुभती है, कि मन में ढेर सारे सवाल पैदा होने लगते हैं. लड़कियां, खुद के अस्तित्व को ही चोट पहुंचाने लगती हैं.

यही बात (काश एक बेटा होता), नीतू के माता-पिता ने भी कही थी. सालों पहले कही थी. ये बात नीतू को ऐसी चुभी, ऐसी चुभी कि उसने अपनी जिंदगी का सबसे कड़ा फैसला ले लिया. ऐसी चुभी कि पूरा घर संभालने की जिम्मेदारी उठा ली. बाप की बंद पड़ी हुई वेल्डिंग की दुकान, फिर से खोल डाली.

2_750x500_011019015345.jpgवेल्डर नीतू. फोटो- ऑडनारी. (स्ट्रिंगर- अनूप कुमार शर्मा)

जानिए वेल्डर नीतू की अनसुनी कहानी-

- उत्तर प्रदेश में एक जिला है- सम्भल. वहां एक गांव है सैमर टोला. वहां रहती हैं नीतू. लोग उन्हें नीतू वेल्डर कहते हैं. 30 साल की हैं. वेल्डिंग का काम करती हैं. वो काम, जिसे समाज केवल 'मर्दों' का काम मानता आया है.

- दैनिक जागरण की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नीतू के पिता का नाम है कल्यानदास. घर के बाहर वेल्डिंग की दुकान चलाते थे. चार बेटियां थीं, बेटा नहीं था. सब ठीक चल रहा था. फिर एक दिन सब कुछ बदल गया. कल्यानदास हादसे का शिकार हो गए. एक दीवार उनके ऊपर गिर गई. गंभीर रूप से चोटिल हो गए. ऐसे कि उठना बैठना मुश्किल हो गया. उन्होंने पलंग पकड़ लिया.

8_750x500_011019015503.jpgवेल्डर नीतू. फोटो- ऑडनारी. (स्ट्रिंगर- अनूप कुमार शर्मा)

- घर पर चार बेटियां थीं, और कमाने वाला कोई नहीं. वेल्डिंग की दुकान बंद हो गई. घर में खाने के लाले पड़ने लगे. उस वक्त नीतू 14 साल की थीं.

- पैसे एक न आते, ऐसे में कल्यानदास और उनकी पत्नी बार-बार एक ही बात कहते. क्या? यही कि काश एक बेटा होता, तो दुकान बंद न होती.

- फिर क्या, यही बात नीतू के दिल में घर कर गई. नीतू ने ठान लिया कि अब कुछ भी हो जाए, वो इस स्थिति से खुद को, और अपने परिवार को बाहर निकालेगी.

- 14 साल की छोटी नीतू ने वेल्डिंग की दुकान फिर से खोल दी. शुरू में काम करने में दिक्कत आई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. धीरे-धीरे उन्हें काम मिलने लगा. और आज 15 साल हो चुके हैं, नीतू बखूबी अपनी दुकान चला रही हैं.

- नीतू के लिए सब कुछ आसान नहीं था. मुश्किलें कई आईं. छोटेपन में ही भारी सामान उठाने, और कड़ी मेहनत करने के कारण नीतू के शरीर के एक हिस्से ने काम करना बंद कर दिया. वो दिव्यांग हो गईं. उनका एक हाथ ठीक से काम नहीं करता है. लेकिन फिर भी नीतू नहीं रुकीं. फिर से दुकान खोली, और काम शुरू किया.

- जब नीतू छोटी थीं, तब अपने पिता को वेल्डिंग करते देखती थीं. उस वक्त यही काम सीखने की जिद करती थीं. लेकिन उनके पिता कहते थे कि ये लड़कियों का काम नहीं हैं. इसलिए वो अपनी मां के साथ रहकर, घर का काम सीखें.

- उस वक्त, जब घर में पैसों की तंगी थी, नीतू ने सब कुछ संभाल लिया. अपनी बहनों को पढ़ाया. नीतू की बड़ी बहन ने एमए एलएलबी की. और उनकी शादी हो चुकी है. दो छोटी बहनें कॉलेज में पढ़ रही हैं.

- अब नीतू के माता-पिता ये बात नहीं कहते कि काश उनका एक बेटा होता. वो आज अपनी बेटी की तरफ गर्व से देखते हैं.

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