भैया को कश्मीरी पत्नी चाहिए, कश्मीरी जीजा नहीं चाहिए, ऐसे कैसे चलेगा भैया?

भैया को कश्मीर में प्लॉट चाहिए, भैया पापा के पैसों से फोन में नेट पैक डलाते हैं.

सांकेतिक इमेज- पीटीआई/ स्क्रीनशॉट

5 अगस्त की सुबह अमित शाह ने राज्यसभा को संबोधित किया. संकल्प पेश किया, जम्मू-कश्मीर से धारा 370 के कुछ खण्डों को हटाने का. बताया कि जम्मू-कश्मीर में विवाद की सबसे बड़ी जड़ बने आर्टिकल 370 के भाग दो और तीन को राष्ट्रपति के आदेश से तत्काल प्रभाव से खत्म किया जा रहा है. थोड़ी ही देर बाद इसका गजट भी जारी हो गया और तय हो गया कि अब आर्टिकल 370 का भाग दो और भाग तीन संविधान का हिस्सा नहीं होगा.

इसी के साथ बहस मुड़ गई 35 A पर. ये संविधान का हिस्सा नहीं है. लेकिन इसे अपेंडिक्स (परिशिष्ट) में शामिल किया गया है. तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 14 मई 1954 को एक आदेश के जरिए धारा 35 A को लागू किया. ये धारा जम्मू-कश्मीर की सरकार और वहां की विधानसभा को जम्मू-कश्मीर का स्थायी नागरिक तय करने का अधिकार देती है. इसी धारा के आधार पर 1956 में जम्मू कश्मीर ने राज्य में स्थायी नागरिकता की परिभाषा तय कर दी, जो विवाद की जड़ थी. अब जब देश का संविधान पूरे देश के साथ ही जम्मू-कश्मीर पर भी लागू होगा, तो 35 (A) अपने आप ही खत्म हो जाएगा. लेकिन 35 A में ऐसा था क्या?

amit-it-mos_080619100431.jpgअमित शाह ने राज्यसभा में संकल्प पेश किया तो वहां हंगामा शुरू हो गया. तस्वीर: इंडिया टुडे

धारा 35 A के मुताबिक जम्मू कश्मीर का नागरिक उसे माना जाएगा, जो 14 मई 1954 से पहले राज्य का नागरिक रहा हो.  वो 14 मई 1954 से पहले 10 साल तक जम्मू-कश्मीर में रहा हो और उसके पास जम्मू-कश्मीर में संपत्ति हो. धारा 35 A के तहत दूसरे राज्यों में भारतीय नागरिकों को जो मूल अधिकार मिल रहे हैं, उनके उल्लंघन को लेकर याचिका भी दाखिल नहीं की जा सकती है. यानी यह धारा दूसरे राज्यों के जैसे नागरिक अधिकार हासिल करने पर पूरी तरह से रोक देती है. जम्मू-कश्मीर की नागरिकता हासिल की हुई कोई लड़की अगर किसी गैर कश्मीरी से शादी करती है तो एक कश्मीरी को मिलने वाले सारे अधिकार वो खो देती है. जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने 2002 में कहा था कि अगर कोई महिला किसी गैर कश्मीरी से शादी करती है तो वो अपने कश्मीरी अधिकार रख सकती है लेकिन उसके बच्चे को कोई अधिकार नहीं मिलेगा.

अब जैसे ही 370 के खंडों के हटने की बात हुई, सोशल मीडिया पर सैलाब आ गया. लोग बधाइयां देने लगे. कहने लगे भाजपा ने अपना पुराना वादा पूरा कर दिया. राजनेताओं से लेकर फिल्म स्टारों तक ने इस मौके को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी.  लेकिन इसी के साथ आई गलीजियत, जो किसी भी मौके पर सोशल मीडिया में देखने को मिल ही जाती है. चाहे आप कितना ही बचने की कोशिश क्यों न कर लें.

लोगों ने लिखना शुरू किया कि अब तो कश्मीर में प्लॉट खरीदेंगे. और यहीं नहीं रुके. कश्मीर को अपनी ससुराल बनाने को उतावले हो गए.

kash-3_080619102454.jpgतस्वीर: फेसबुक

जैसे ही जम्मू-कश्मीर का स्पेशल स्टेटस ख़त्म हुआ, लोगों की नज़र सीधे वहां की जमीन, और वहां की लड़कियों की तरफ गई. आततायियों का ऐसा वर्णन प्रेमचंद की कहानियों से लेकर इतिहास के दस्तावेजों तक में देखा गया है.

लोगों ने पोस्ट डालने शुरू किए-

करो तैयारी, कश्मीर में होगी ससुराल हमारी.

अब तो 370 हट गया, अब क्यों कश्मीरी लड़कियों को नज़रबंद कर रखा है.

kash-5_080619102528.jpgतस्वीर: फेसबुक

ये कोई नई चीज़ नहीं है. भारत और पाकिस्तान के बीच जब मैच होते हैं तब भी लोगों की नज़रें ढूंढ रही होती हैं एक खूबसूरत चेहरा जिस पर मीम बनाये जा सकें कि हाय, बंटवारे का दर्द आज महसूस हुआ.

याने कि बंटवारा नहीं हुआ होता तो तुम, जिसने आज तक जीवन में किसी हाड़ –मांस की बनी असली लड़की से ढंग से बात करने तक का शऊर नहीं सीखा, वो हजार मील दूर बैठी उस लड़की को ब्याह लाता?

कश्मीर के मामले में भी यही हो रहा है. वहां की लड़कियों पर नज़र गड़ाए बैठे लोग अश्लील जोक मारने से पीछे नहीं हट रहे.

एक राजनैतिक क्षण है. जिसमें इतिहास लिखा जा रहा है. एक राज्य का भविष्य बदला जा रहा है. अच्छा या बुरा, ये समय के अलावा कोई नहीं बता सकता. लेकिन इस क्षण में वहां के लोग घबराए हुए हैं. वहां पर इन्टरनेट नहीं है. फोन कनेक्टिविटी नहीं है. कोई नहीं जानता उसके प्रिय परिजन कैसे हैं, किस हालत में हैं. बाहर पब्लिक के निकलने पर रोक है, कर्फ्यू लगा हुआ है. उस माहौल में आप उस जगह के लोगों के लिए इस तरह के घटिया जोक मार रहे हैं. एक तरफ उसे अपना कहते हैं, दूसरी तरफ अपनेपन के नाम पर ये भौंडे जोक? कल न सही, परसों सही, उनके पास इन्टरनेट लौटेगा. और वो देखेंगे कि कि जिन घड़ियों में वो आपसे सहारे और समझ की आशा कर रहे थे, उस समय आप ‘जर जोरू जमीन’ वाले मोड में हर तरफ लार टपका रहे थे.

kash-2_080619102559.jpgतस्वीर: फेसबुक

ये लिखने वाले लोग कौन हैं?

ये वो लोग हैं जिनमें खुद हिम्मत नहीं कि अपनी मर्जी से शादी कर लें. इनको शादी से पहले जाति भी देखनी है, गोत्र भी देखना है, दहेज़ भी देखना है, और फिर मां-बाप जहां कहें वहां बिना कान-पूंछ हिलाए शादी कर लेनी है. अगर खुदा न खास्ता इनकी कोई प्रेयसी बन गई हो गलती से तो उसे ‘मां नहीं मानेंगी, उनकी तबियत बहुत खराब है, उनको परेशान नहीं कर सकता’ वाला टहोका देकर साइड करने में माहिर होते हैं ये.

वैसे तो कश्मीर के लड़के भी कुछ कम नहीं होते. वो भी काफी अच्छे लगते हैं. जब सोशल मीडिया पर कश्मीरी लड़कियों से शादी करने की इतनी ललक मची है, तो यहां की लड़कियां भी शादी करें वहां के लड़कों से. लेकिन वो करेंगी तो लव जिहाद चिल्लाएंगे ये लोग. खून-खराबा कर देंगे.

भैया को कश्मीरी साली चाहिए, कश्मीरी जीजा नहीं चाहिए.

भैया को इंटरकास्ट शादी तक से दिक्कत है.

भैया कश्मीरी मुस्लिम लड़कियों से शादी की बात करते हैं.

भैया को सोशल मीडिया पर गंद भी फैलानी है.

ऐसे कैसे चलेगा भैया?

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