प्रेगनेंट औरत कराहती हुई डिलीवरी कराने आई, लौटा दिया क्योंकि लंच करना ज़रूरी था

औरत को सड़क पर डिलीवरी करनी पड़ी.

सरवत फ़ातिमा सरवत फ़ातिमा
जनवरी 11, 2019
औरत दर्द से तड़प रही थी पर डॉक्टर ने मदद करने से इनकार कर दिया. फ़ोटो कर्टसी: Pixabay (सांकेतिक तस्वीर)

बेंगलुरु से 240 किलोमीटर दूर एक गांव है. नाम है चित्राहल्ली. यहां 35 साल की गंगामलाम्मा अपने पति चाउदप्पा के साथ रहती है. गंगामलाम्मा प्रेगनेंट थी. उसका नवा महीना चल रहा था. पिछले हफ़्ते उसके पेट में दर्द उठा. कुछ ही मिनट में चाउदप्पा को समझ में आ गया कि गंगामलाम्मा लेबर पैन में है. उसे कॉन्ट्रैक्शंस हो रहे हैं. चाउदप्पा गंगामलाम्मा को लेकर पास के गांव में बने हेल्थ सेंटर भागा. पर दोनों जब वहां पहुंचे तो जानती हैं क्या हुआ?

डॉक्टर ने उसे एडमिट करने से मना कर दिया. क्यों? क्योंकि उस समय लंच टाइम चल रहा था. जी. हॉस्पिटल वालों ने लेबर में आई औरत को इसलिए वापस कर दिया क्योंकि उस समय वो खाना खा रहे थे.

चाउदप्पा ने एक अंग्रेजी वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में कहा:

“हम सेंटर करीब 11 बजे पहुंच गए थे. पर डॉक्टर ने हमें दोपहर तक बिठाकर रखा. बाद में ड्यूटी पर जो डॉक्टर और नर्स थे उन्होंने हमें घर जाने को कहा. कहने लगे ‘अभी लंच टाइम है जाओ.’

गंगामलाम्मा बुरी तरह दर्द से तड़प रही थी. पर कोई उसकी मदद को आगे नहीं आ रहा था. वो दर्द के मारे सड़क पर ही गिर गई. बच्चा एकदम बाहर निकलने को था. आगे जो हुआ वो किसी पिक्चर के सीन से कम नहीं था. आसपास खड़ी औरतें गंगामलाम्मा की मदद को आगे आईं. अपनी साड़ियों से उन्होंने गंगामलाम्मा को चारों तरफ़ से ढक लिया. उसी सड़क पर गंगामलाम्मा ने एक बेटी को जन्म दिया. बिना किसी डॉक्टर के. बिना किसी हेल्थ केयर के.

इस घटने के बाद गांव के लोगों ने हेल्थ सेंटर के बाहर विरोध प्रदर्शन करना शुरू कर दिया. उनकी मांग है कि दोषी डॉक्टर और नर्स के ख़िलाफ़ सख्त कारवाई हो. डिस्ट्रिक्ट हेल्थ ऑफिसर डॉक्टर नीरज पाटिल ने कहा है कि इस पूरे मामले की तफ़सील से जांच होगी.

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देखिए

 

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