'जिस यूनिवर्सिटी की लड़कियां आसानी से संबंध बनाने के लिए मान जाती हैं वो बेस्ट है'

एक मैगज़ीन के अंक ने इस तरह की रैंकिंग जारी की है. सोशल मीडिया पर बवाल मच गया है.

सरवत फ़ातिमा सरवत फ़ातिमा
जनवरी 10, 2019
लोगों की डिमांड है कि इस इशू को बैन कर देना चाहिए. फ़ोटो कर्टसी: ट्विटर

जपान में एक वीकली मैगज़ीन छपती है- स्पा! आजकल सोशल मीडिया पर लोग इसे बहुत गालियां दे रहे हैं. वजह? मैगज़ीन में टॉप लड़कियों की यूनिवर्सिटीज़ की लिस्ट छपी है. अब आप सोच रही होंगी कि इसमें क्या बड़ी बात है? दरसल, ये टॉप यूनिवर्सिटीज़ इसलिए नहीं हैं क्योंकि यहां पढ़ाई अच्छी होती है. या यहां पढ़ने वाली लड़कियों की अच्छी नौकरियां लग जाती हैं. ये यूनिवर्सिटीज़ इसलिए बेस्ट है क्योंकि यहां आसानी से सेक्स किया जा सकता है.

इस मैगज़ीन का ये अंक 25 दिसंबर को आया था. इसके निकलते ही सोशल मीडिया पर बवाल मच गया. मचना भी चाहिए. एक औरत ने सोशल मीडिया पर कैंपेन भी शुरू किया. सोशल मीडिया पर एक पिटिशन डाली. उसकी डिमांड है कि इस मैगज़ीन की बिक्री रोक देनी चाहिए.

इस पिटीशन का कहना है कि मैगज़ीन का अंक लड़कियों की बेइज्जती कर रहा है. उनको केवल एक सेक्स ऑब्जेक्ट समझ रहा है. अभी तक इस पिटीशन को 28,000 लोग साइन कर चुके हैं.

बवाल मचने के बाद मैगज़ीन के एडिटर ने सोशल मीडिया पर सबसे माफ़ी मांगी. उन्होंने लिखा:

“हम ऐसी भाषा का इस्तेमाल करने के लिए माफ़ी मांगते हैं. हम माफ़ी मांगते हैं कि हमने अपने रीडर्स को ये बताया कि वो कैसे लड़कियों को सेक्स के लिए पटा सकते हैं. और असली यूनिवर्सिटीज़ की रैंकिंग बनाई. इस वजह से कई लोगों को परेशानी हुई.”

मैगज़ीन में आर्टिकल छपा था ‘ग्यारानोमी’ कल्चर पर. जापान में एक तरह की पार्टीज़ होती हैं. इसमें लोग शराब पीते हैं. लड़कियों को इन पार्टीज़ में आने के लिए पैसे भी मिलते हैं. यूनिवर्सिटीज़ में पढ़ने वाली लड़कियों के बीच ऐसी पार्टीज़ बहुत पॉपुलर हैं.

2018 में एक मेडिकल यूनिवर्सिटी ने माना था कि उसने एंट्रेंस टेस्ट में जानबूझकर लड़कियों के स्कोर कम कर दिए थे. ताकि 30 से ज़्यादा लड़कियां एडमिशन न ले सकें.

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