जेन टॉपन: वो सीरियल किलर नर्स जिसे मरीजों को तड़पता छोड़कर कामुक महसूस होता था

मरते हुए मरीज के साथ यौन संबंध बनाती और तबतक दबोचकर रखती जबतक उनकी जान न निकल जाती.

नेहा कश्यप नेहा कश्यप
अगस्त 05, 2019
प्रतिकात्मक तस्वीर

एक अस्पताल और मरीजों की देखभाल करने वाली एक खुशमिजाज नर्स. मरीजों को समय पर दवा देना, उन्हें खाना-खिलाना और उनके खूब सारा समय बिताना. रात को मरीजों के कमरे में जाना. अपना शिकार चुनना. और ड्रग्स के इंजेक्शन लगाकर उनपर एक्सपेरिमेंट करना. उनके साथ सेक्स करना और फिर उन्हें तक गले लगाकर रखना, जब तक वो मर न जाएं. जेन एक नर्स थी, जिसने अस्पताल में 31 मरीजों की इसी तरीके से हत्या की थी.

आप पढ़ रहे हैं हमारी स्पेशल सीरीज- सीरियल किलर. इसमें हम देश और दुनिया की उन महिला सीरियल किलर के बारे में बताएंगे, जिन्होंने अलग-अलग तरीकों कई हत्याएं की. कुछ मर्डर लालच में और कुछ सिर्फ फितूर में किए गए. आखिर में ये औरतें गिरफ्तार हुईं और सजा भी मिली. आज इस सीरीज में दूसरी कहानी है, जेन टॉपन की, जो सेक्शुअल एक्साइटमेंट के लिए अपने मरीजों की हत्या करती थी.

कौन थी जेन टॉपन

जेन 1854 में बॉस्टन में पैदा हुई थी. वह अमेरिकी आइरिश मूल की थी. उसकी मां की टीबी की बीमारी से मौत हो गई थी. पिता टेलरिंग का काम करते थे. शराबी थे. कुछ समय बाद मानसिक संतुलन खो गया. कहा जाता है कि वह एक दिन अपने ही दुकान में अपनी पलकें सिलते हुए मिले. इसके बाद उन्हें दिमाग के अस्पताल भेज दिया गया. जेन और उसकी तीन बहनें अकेली रह गईं. और दादा-दादी के पास आकर रहने लगीं. यहां से बच्चियों को अनाथालय भेज दिया गया. तब तक जेन का नाम होनोरा केली था. 1859 में जेन को टॉपन परिवार ने गोद ले लिया. यहीं से उसे जेन टॉपन नाम मिला.

young-jane_750x500_080519064848.jpgजेन टॉपन, सोर्स-headstuff

अस्पताल की सबसे प्यारी नर्स

1880 में जेन ने मैसाचुसेट्स के कैंब्रिज अस्पताल में नर्स की ट्रेनिंग शुरू की. वह अपने हंसमुख और मिलनसार व्यवहार की वजह से न सिर्फ अस्पताल स्टाफ बल्कि मरीजों के लिए भी बेहद प्यारी नर्स थी. अस्पताल में उसे जॉली नाम से बुलाया जाता था. वह वर्किंग आवर्स खत्म होने के बाद भी देर रात तक मरीजों के साथ समय बिताती थी. अच्छे व्यवहार के चलते उसे कैंब्रिज जनरल अस्पताल में ट्रांसफर कर दिया गया. यहां पहली बार जेन दो मरीजों को ओवरड्रग करते हुए पकड़ी गई. उसे नौकरी से निकाल दिया गया.

allthatsinteresting_750x500_080519065500.jpgकैंब्रिज अस्पताल, सोर्स- allthatsinteresting

मरीजों पर प्रयोग

नौकरी से निकाले जाने के बाद जेन ने बतौर प्राइवेट नर्स काम शुरू किया. अगले दो दशकों में उसने दर्जनों परिवार में मरीजों की देखभाल का काम किया. और करीब 31 लोगों की हत्या की. ट्रेनिंग के दौरान जिस तरह वह चूहों पर प्रयोग करती थी. वैसे ही अपने मरीजों को दवाओं के ओवर डोज देकर टेस्ट करती थी. जेन बेहद बीमार मरीजों को (पेन किलर) मोरफिन और (धड़कन धीमी करने वाली) एट्रोपिन दवाएं देती थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक वह तड़प रहे कई मरीजों के साथ सेक्स भी करती थी. इसके बाद उनके ताकत से तब तक गले लगाकर रखती थी, जब तक उनकी जान न निकल जाए.

अटॉप्सी रिपोर्ट से मिला सुराग

अगस्त, 1891 का समय था. मेटी और एल्डन डेविस नाम के एक बुजुर्ग जोड़े ने जेन को अपनी देखभाल के लिए रखा था. दो महीने बाद अक्टूबर में जेन ने ड्रग की ओवर डोज देकर पति-पत्नी की हत्या कर दी. जेन ने उनकी किशोर उम्र की बेटी मिनी को भी जहर दे दिया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आते ही पुलिस ने जेन को गिरफ्तार कर लिया. मिनी की अटॉप्सी रिपोर्ट में साबित हो गया था कि उसे जहर देकर मारा गया है. 

सेक्शुअल एक्साइटमेंट के लिए हत्याएं

1892 में जेन ने 31 मरीजों की हत्याओं को स्वीकारते हुए कोर्ट में कहा, 

'मेरी महत्वाकांक्षा है कि जितने लोग जिंदा हैं, उससे भी ज्यादा लोगों को, असहाय लोगों को मैं मारना चाहती हूं.'

ये जेन का कोर्ट में रिकॉर्ड बयान है. उसने अपने मकान मालिक, उसकी पत्नी और अपनी बहन और उसके पति की हत्या को भी कुबूल किया. उसने माना कि दवाओं के ओवरडोज के अलावा जहर देकर भी हत्याएं की थी.

ऐसा करने के पीछे जेन ने बताया कि तड़पते मरीजों को देखकर उसे सेक्शुअली उत्तेजना महसूस होती थी. इसलिए वह उनके साथ उनके बिस्तर पर जाकर लेट जाती थी. कुबूलनामे के बाद कई परिवारों ने दावा किया कि उसने 70 से 100 के बीच हत्याएं की हैं. हालांकि आरोप लगाने वाले इन परिवारों ने शवों का पोस्टमार्टम कराने से मना कर दिया. अटॉप्सी सुबूतों के अभाव में जेन पर 31 मरीज समेत 4 अन्य लोगों की हत्या का मुकदमा चलाया गया.

jane-toppan-press_750x500_080519065249.jpgअखबार में छपि जेन की मौत की खबर, सोर्स-murderpedia

जेन के वकील ने सुनवाई के दौरान उसे पागल बताते हुए फांसी की सजा न सुनाने की अपील की. कोर्ट ने उसे पागल मानते हुए उसे जिंदगीभर के लिए मैसाचुसेट्स के टाउटन पागलखाने में रहने का फैसला सुनाया. यहां अगस्त, 1938 में 84 साल की उम्र में जेन टॉपन की मौत हो गई.

जेन का नाम आज भी इतिहास की कुछ सबसे जघन्य महिला सीरियल किलर में लिया जाता है. सिर्फ इसलिए नहीं क्योंकि उसने लोगों की हत्या की. बल्कि इसलिए कि उसने उन लोगों की हत्या की, जो उसपर निर्भर थे. उसपर यकीन करते थे. उसके फितूर ने असहाय और निर्दोष लोगों की जान ले ली.

शैतान को देखकर इंसान सचेत हो जाता है. अपने लिए सुरक्षा का घेरा बना लेता है. लेकिन फरिश्ते के वेश में छुपे शैतान को पहचानना बेहद मुश्किल होता है. जेन का शिकार बनें लोगों ने भी आखिरी वक्त पर यही महसूस किया होगा.

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