40 तोला सोना और 1kg चांदी लेने के बाद भी दहेज चाहिए था, 21 साल की बहू को जिंदा जला दिया

किस्मत कंवर हत्याकांड: उसकी चीखें घर में गूंजती और गायब हो जातीं.

लालिमा लालिमा
दिसंबर 03, 2018
किस्मत कंवर अपने पति बलराज के साथ. फोटो- फेसबुक

'मेरी बेटी फूल जैसी थी. बहुत प्यारी, हमारी लाडली. उससे हम सब बहुत प्यार करते थे. बहुत धूमधाम से शादी कराई थी उसकी. 40 लाख खर्च किए थे. लड़के वालों को 40 तोला सोना और एक किलो चांदी दी थी. लाखों रुपए कैश भी दिए थे. लेकिन फिर भी वो और दहेज चाहते थे. शादी के बाद मेरी बच्ची को परेशान करते रहे. सास ताने मारती रही. और बाद में उसे जिंदा जला दिया. बहुत दुख दिया उसे. तड़पा-तड़पाकर मार डाला. अरे, मारा क्यों, वापस हमारे पास भेज देते. मारा क्यों? क्यों मारा? अब वो लौट कर कभी नहीं आएगी, वो जा चुकी है... काश उसे मेरे पास वापस भेज देते. काश... बहुत याद आती है उसकी. बहुत...' ये कहते हुए किस्मत कंवर की मां रो पड़ीं.

पिछले साल, यानी 2017 की 5 फरवरी के दिन किस्मत की शादी हुई थी. राजस्थान के जयपुर जिले में सुनाडिया गांव है. वहां भंवरसिंह रहते हैं. किस्मत उन्हीं की बेटी थी. 21 साल की थी. राजपूत समाज की थी. ग्रेजुएट थी. शादी राजस्थान के नागौर जिले के मकराना में हुई. मकराना क्षेत्र में एक गांव है कूकड़ोद, यहां रहने वाले भवानी सिंह के बेटे बलराज सिंह के साथ शादी हुई.

बलराज का जयपुर में जिम था, इसलिए वहीं रहता था. लेकिन किस्मत पति के साथ नहीं, सास-ससुर के साथ कूकड़ोद में रहती थी. हफ्ते में एक-दो दिन के लिए पति आता. या बीच-बीच में किस्मत जयपुर जाती. शादी के कुछ दिनों के बाद तक सब ठीक ही था. लेकिन फिर दिन बदल गए. पति ने बात करना बंद कर दिया. सास दहेज के लिए ताने मारने लगी. 'और दहेज दो, क्या लाई हो घर से' इस तरह की बातें आए दिन किस्मत को सुननी पड़ती.

7a313784-0612-4f3d-9a2a-8c2a9dd21201_120318022322.jpgकिस्मत कंवर. फोटो- फेसबुक

किस्मत दुखी होकर पिता को फोन कर सब बताती. पिता समझाते कि बेटी अब वही तेरा घर है, निभाने की कोशिश करो. किस्मत फिर चुप हो जाती. सास फिर ताने मारती. किस्मत फिर माता-पिता को फोन करती. बेटी को रोता देख भंवरसिंह का दिल पिघल जाता. कैश का इंतजाम करते. कभी एक लाख, कभी डेढ़ लाख तो कभी 50 हजार रुपए बेटी के ससुराल वालों को देते. लेकिन उनकी भूख नहीं मिटती. सास के ताने खत्म नहीं होते.

फिर एक दिन किस्मत की सास ने उसे जिंदा जला दिया. वो जलती रही, और चीखती रही. उसकी चीखें घर में गूंजती और गायब हो जातीं. तारीख थी 23 अक्टूबर 2018. किस्मत के पति और जेठ ने फिर उसे अस्पताल में भर्ती कराया. पिता अस्पताल पहुंचे. बेटी 95 फीसदी जल चुकी थी. थोड़ा होश था. बयान दिया कि सास ने उसके ऊपर केरोसीन डालकर उसे जला दिया, पति बात नहीं करता था. किस्मत को बचाने की कोशिश हुई, लेकिन उसी रात 9.30 बजे उसकी मौत हो गई.

किस्मत के मां-बाप ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. किस्मत की सास, ससुर, पति और बुआ सास के ऊपर दहेज के लिए जलाकर मारने का आरोप लगा. पुलिस ने घटना के 7-8 दिन बाद सास-ससुर को गिरफ्तार किया. पति ने खुद कुछ दिनों बाद सरेंडर कर दिया. सास-ससुर और पति पुलिस की गिरफ्त में है. बुआ सास अभी भी आजाद है.

ऑडनारी की टीम ने मकराना के DySP राम चंद्र मेहरा से बात की. पता चला कि अभी तीनों न्यायिक हिरासत में है. कुछ दिनों में कोर्ट में पेशी होगी. बुआ सास की गिरफ्तारी पर ठीक से जवाब नहीं मिला. किस्मत के माता-पिता से भी बात की. पता चला कि बलराज सिंह का किसी और लड़की से अफेयर था, इसलिए वो किस्मत को इग्नोर करता था. माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है. वो जानते हैं कि अब उनकी बेटी वापस नहीं आ सकती, लेकिन वो ये चाहते हैं कि उनकी बेटी को खत्म करने वाले लोग जेल में सड़कर मरें. कभी आजाद न हों. उन्हें उनकी गलती का एहसास हो. वो अपनी बेटी के लिए न्याय चाहते हैं.

7aac8284-0693-4e3f-8e5b-4c5054a43029_120318022347.jpgपति के साथ किस्मत. फोटो- फेसबुक

ये तो हमने आपको एक किस्मत कंवर की कहानी बताई. भारत में न जाने कितनी किस्मत ससुराल वालों के दहेज के लालच का शिकार होती हैं. कभी कोई किस्मत जला दी जाती है, तो कभी कोई कुएं में गिर जाती है, कभी छत से नीचे गिर जाती है, तो कभी किसी हादसे में उसकी जान चली जाती है.

किस्मत तुम-पढ़ी लिखी थी, चुप क्यों रही? आवाज उठाती. जो हिंसा हो रही थी तुम्हारे साथ, उसका विरोध करना था तुम्हें. तुम किसी का अत्याचार सहने के लिए नहीं बनी थी, तुम अपनी जिंदगी खुलकर, मान-सम्मान के साथ जीने के लिए बनी थी.

21वीं सदी चल रही है. 21वीं सदी का दूसरा दशक भी खत्म होने वाला है, लेकिन परंपरा का हवाला देकर घटिया सोच रखने वाले लोग खत्म नहीं हो रहे. बढ़ते जा रहे हैं. इन तथाकथित परंपराओं को मानने वालों को असलियत से रूबरू कराना जरूरी है. ये भूल गए हैं कि शास्त्रों में स्वयंवर की बात लिखी है. यानी लड़की अपने मन से पति पसंद कर सकती है, फिर लड़कियों के पैरों में बेड़ियां बांधना कहां की परंपरा है? ये परंपरा नहीं, घटिया मानसिकता है.

शादी में सात फेरे होते हैं. सातों फेरों में जो वचन होते हैं, अगर उन्हें ध्यान से सुनेंगे, तो जान जाएंगे कि लड़कियों को लड़कों के बराबर ही माना गया है. लेकिन लोग तो बस फॉर्मेलिटी के लिए ये कहते हैं कि हम तो पूरे रिवाजों के साथ शादी करेंगे, लेकिन इन रिवाजों से कुछ सीखते नहीं हैं.

d1ffbfc4-9a0a-4462-b544-e3335ef65bea_120318022408.jpgफोटो- फेसबुक

जिन असली चीजों को फॉलो करना है, अगर वो कर लिया जाए, तो शायद दहेज के लिए कोई लड़की नहीं मरेगी-

- किस्मत सास-ससुर के साथ गांव में रहती थी. पति जयपुर में. परंपरा ये नहीं है कि शादी के बाद लड़की सास-ससुर के साथ रहे, परंपरा तो ये है कि उसे अपने पति के साथ रहने का पूरा हक है. वो उसके भरोसे ही अपने मां-बाप को छोड़कर आती है, तो उसके साथ क्यों न रहे?

- शादी के बाद एडजस्ट करने की बात कही जाती है. स्पेशली लड़की से ये उम्मीद होती है कि वो एडजस्ट करे. ससुराल वाले ये नहीं सोचते कि जो लड़की शादी से पहले तक किसी दूसरे माहौल में रही है, वो अचानक से नए माहौल में कैसे एडजस्ट कर सकती है? इंसान है न वो भी, समय तो लगेगा ही.

- एडजस्टमेंट के लिए समय नहीं मिलता. जोर डाला जाता है. दो दिन में ही ये उम्मीद की जाती है कि लड़की 'संस्कारी बहू' बने. हर किसी को खुश रखे, लेकिन उसकी खुशी किसमें है, ये कोई नहीं सोचता. लॉजिक से सोचने का तो कोई कष्ट ही नहीं करता.

- शादी के बाद केवल लड़की एडजस्ट करे, ऐसा नहीं सोचना चाहिए. लड़के को भी एडजस्ट करने की कोशिश करनी चाहिए और उसके परिवार, यानी लड़की के ससुराल वालों को भी. कुछ बिगड़ नहीं जाएगा किसी का अगर लड़की के सास-ससुर अपने बर्ताव में थोड़ा बदलाव ले आएंगे तो.

- आज भी कई जगहों पर शादी की सारी बातचीत पैसों के हिसाब से होती है. लड़के वाले बिना किसी शर्म के बड़े मुंह से पैसों की डिमांड रख देते हैं, लड़की वालों से. ये नहीं सोचते कि लड़की वाले अपनी सबसे बड़ी पूंजी 'बेटी' दे रहे हैं, जो अमूल्य है. जिसकी किसी से तुलना नहीं हो सकती. जो पैसों से कहीं ज्यादा बढ़कर है.

- लड़की के मां-बाप ये सोचकर कि बेटी का घर बस जाए, कोशिश करते हैं लड़के वालों की मांगों को पूरा करने की. ऐसे में कई बार तो उधारी तक कर डालते हैं और लाखों के कर्जे में डूब जाते हैं.

- सबसे बड़ी गलती तो लड़की के मायके वालों की होती है. जब लाखों रुपए के दहेज की मांग के बारे में उन्हें शादी से पहले पता चल ही जाता है तो फिर वो ऐसे घर में अपनी बेटी की शादी करते ही क्यों है?

e5cb538e-c610-446d-979d-5050822b24e6_120318022504.jpgकिस्मत और बलराज. फोटो- फेसबुक

- सबसे पहले तो बेटी को बोझ समझना बंद करना चाहिए. उसे पढ़ा-लिखाकर इस काबिल करना चाहिए कि वो अपने फैसले खुद ले सके. ऐसे घर में बेटी की शादी करनी ही नहीं चाहिए, जिन्हें पैसों की भूख हो. और अगर गलती से ऐसे घर में शादी कर भी दी, तो इतनी हिम्मत रखनी चाहिए कि अगर बेटी परेशान हो तो उसे वापस बुला लें.

- लड़के वाले और लड़की वाले आज भी ये सोचते हैं कि दहेज उनकी प्रतिष्ठा का प्रतीक है. लड़के वाले सोचते हैं कि जितना ज्यादा दहेज मिलेगा, प्रतिष्ठा बढ़ेगी. लड़की वाले ये सोचते हैं कि ज्यादा दहेज देंगे तो प्रतिष्ठा बढ़ेगी. समाज, जात-बिरादरी में इज्जत मिलेगी. लेकिन ये भूल जाते हैं कि ये समाज, जाति, बिरादरी हम लोगों से ही बनती हैं. हमें खुद इस समाज की घटिया सोच को बदलने की शुरुआत करनी होगी.

- लड़की जो बहू बनती है, उसके ससुराल वाले उसे कामधेनु गाय समझने लगते हैं. उसे प्रताड़ित करते हैं. कहते हैं कि वो अपने मायके से और पैसे मांगे. लड़की के मां-बाप तब भी पैसे देने की कोशिश करते हैं. अरे, ऐसा करने की बजाय बेटी को वापस बुला लेना चाहिए. उसका सपोर्ट करना चाहिए. उसे हिंसा का सामना करने की हिम्मत देनी चाहिए.

- किस्मत वाले केस में उसके पिता ने कहा था कि बेटी निभाने की कोशिश करो, अब वो ही तुम्हारा घर है. लेकिन देखा न, क्या हुआ किस्मत के साथ? अगर उसके पिता किस्मत को वापस बुला लेते, उसे घर में रखकर आगे पढ़ाते, कोई नौकरी करवाते, तो आज स्थिति कुछ और होती.

- यहां अगर किस्मत स्टैंड लेती, हिंसा का विरोध करती और अपने ससुराल को छोड़ देती, अपने अधिकारों का इस्तेमाल करती, कानून की शरण लेती तो आज इतनी दर्दनाक मौत नहीं होती.

- किस्मत के केस में ये भी सामने आया कि बलराज का अफेयर चल रहा था. बलराज अगर ये हिम्मत रखता कि वो अपने अफेयर की बात शादी से पहले अपने मां-बाप को बता देता और वो भी खुद के लिए स्टैंड लेता तो किस्मत की बलि नहीं चढ़ती.

- बहुत से केस सामने आए हैं, जहां लड़के माता-पिता के दबाव में शादी कर तो लेते हैं, लेकिन अपनी पत्नी को फिर प्रताड़ित करते हैं. ऐसे केस में गलती लड़के के मां-बाप और लड़के की होती है, लेकिन पिसती लड़की है. लड़का खुद को आज्ञाकारी बताने के चक्कर में दबाव में शादी कर लेता है. सोचता है कि मैं तो आज्ञाकारी बेटा हूं.

- कई केस में लड़की को अगर उसके सास-ससुर परेशान करते हैं, और वो ये बात अपने पति को बताती है, तब उसका पति उसे चुप रहने की सलाह देता है. वो अपने मां-बाप को कुछ नहीं कहता. क्यों नहीं कहता? भूल जाता है कि लड़की उसी के भरोसे शादी करके आई है. उसका फर्ज है लड़की की दिक्कतों को कम करना. क्यों नहीं निभाता ये फर्ज?

अगर इन सूत्रों पर हमारा देश चलेगा, तो कोई भी लड़की दहेज के लिए जलाई नहीं जाएगी.

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