अपने पहले बजट में निर्मला सीतारमण ने औरतों के लिए क्या-क्या कहा?

'हम तब तक प्रगति नहीं कर सकते जबतक महिलाओं की भागीदारी न हो'

कुसुम लता कुसुम लता
जुलाई 05, 2019

'हम तब तक प्रगति नहीं कर सकते जब तक समाज में महिलाओं की भागीदारी न हो'

स्वामी विवेकानंद की इस लाइन के साथ, निर्मला सीतारमण ने अपनी बजट स्पीच में महिलाओं के बारे में अपनी बात शुरू की. उन्होंने अपना पहला बजट पेश कर दिया है. ये दूसरा ही मौका था जब किसी महिला ने देश का बजट पेश किया. वो भी 49 साल बाद आया था. इससे पहले फरवरी, 1970 में इंदिरा गांधी ने बजट पेश किया था. सभी को उम्मीद थी कि इस बजट में महिलाओं को प्रिफरेंस मिलेगी. उनके लिए कुछ खास होगा, कुछ ऐतिहासिक होगा.

अपने बजट में सीतारमण ने औरतों के लिए अलग से केवल एक ऐलान किया. वो था सेल्फ हेल्प समूहों को मदद का. इन्हें SHG भी कहते हैं. अपने व्यूवर्स को हम बता दें कि ये SHG होते क्या हैं. ये 10-15 ग्रामीण महिलाओं के समूह होते हैं, जिसमें वो छोटी-छोटी सेविंग्स करती हैं, कोई छोटा रोजगार करती हैं. और जमा हुआ पैसा आड़े वक्त में समूह की महिलाओं के काम आता है.

सीतारमणन ने अपनी बजट स्पीच के महिलाओं को समर्पित सेगमेंट में कहा-

भारत के विकास में, खासकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की सुनहरी भूमिका है. यह सरकार इस भूमिका के प्रोत्साहन और उसे बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है. मानव जीवन का कोई भी क्षेत्र महिला की भागीदारी के बिना अर्थपूर्ण नहीं है. इस सरकार का मजबूत विश्वास है कि महिलाओं के योगदान की वजह से देश में सामाजिक-आर्थिक बदलाव आए हैं.

हाल ही में निपटे चुनाव में महिलाओं के बढ़-चढ़कर, पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर वोट दिया. इस बार रिकॉर्ड 78 महिलाएं चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंची हैं. यह हमारे उस विश्वास को मजबूती देता है कि हमें महिला केंद्रित पॉलिसी बनाने से आगे जाना होगा, ऐसी योजनाओं और मूवमेंट्स को बढ़ावा देना होगा जिनका नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं. इस सरकार ने मुद्रा, स्टैंड अप स्कीम और सेल्फ हेल्प ग्रुप (SHG)सपोर्ट की मदद से महिला उद्यमियों का प्रोत्साहन किया है और उन्हें सपोर्ट किया है.

निर्मला सीतारमण ने अपना पहला बजट पेश किया.निर्मला सीतारमण ने अपना पहला बजट पेश किया.

इसके बाद उन्होंने अनाउंस किया कि महिलाओं को सपोर्ट करने के देश के हर जिले में SHG को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा. उन्होंने ऐलान किया-

कोई भी ऐसी महिला जो किसी SHG की वेरिफाइड सदस्य हो और जिसके पास जनधन अकाउंट हो, उसे 5 हजार तक का ओवरड्राफ्ट अलाउड होगा. वहीं हर SHG की एक महिला मुद्रा योजना के तहत 1 लाख रुपये तक का लोन लेने के लिए योग्य होगी.

इसके अलावा उन्होंने महिलाओं के लिए अलग से कोई घोषणा नहीं की. हालांकि, उन्होंने कई ऐसे प्रस्ताव अपने बजट भाषण में रखे जो जेंडर न्यूट्रल हैं. यानी उनका फायदा महिलाओं और पुरुषों को समान रूप से मिलेगा. वो घोषणाएं कुछ इस प्रकार हैं-

- 2022 तक, ग्रामीण भारत के हर घर में बिजली और गैस की व्यवस्था होगी. जैसा कि सीतारमण ने कहा क्लीन कुकिंग फैसिलिटी. यानी 2022 तक देश के हर गांव का हर घर चूल्हे और सिगड़ी के धुएं से मुक्त होगा. यानी ग्रामीण औरतों को खाना बनाते वक्त दमघोंटू धुएं में नहीं रहना पड़ेगा.

- जल जीवन मिशन के तहत 2024 तक देश के हर घर तक पानी पहुंचेगा. सीतारमण ने कहा कि इसके लिए सरकार ने देश के 1592 ऐसे तहसीलों की पहचान की है जहां स्थिति विकट है. यदि सरकार अपना ये वादा पूरा कर पाती है तो उन लाखों महिलाओं को राहत मिलेगी जो पीने के पानी के लिए कई किलोमीटर दूर पैदल चलकर जाती हैं. बता दें कि पानी भरना अभी भी औरतों का काम माना जाता है और देश के ज्यादातर परिवारों में, खासकर गांवों में यह काम औरतों के ही जिम्मे होता है.

- साल में पांच लाख तक कमाने वालों को कोई टैक्स नहीं देना होगा. इसका फायदा अलग-अलग सेक्टर्स में काम करने वाले मध्यमवर्गीय लोगों को मिलेगा. इनमें महिलाएं भी शामिल हैं. हालांकि 2 से 5 करोड़ तक की आय वालों को 3 प्रतिशत और 5 करोड़ से ज्यादा इनकम वालों को 7 प्रतिशत सरचार्ज देना होगा.

- वित्त मंत्री ने पीएम आवास योजना के तहत शहरी और ग्रामीण भारत में आवास निर्माण, और पीएम सड़क योजना के तहत सड़क निर्माण की बात भी अपने बजट भाषण में कही. जाहिर है, इन दोनों में ही पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं को भी रोजगार मिलेगा.

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