आज़ाद भारत की पहली लोकसभा में इतिहास रचने वाली महिलाएं - भाग 1

1952 की लोकसभा में कितनी महिलाएं थीं, जानते हैं आप?

1952 में देश की पहली लोकसभा शुरू हुई. इसमें 24 महिलायें शामिल थीं. आज आज़ादी के 72 साल बाद 2019 के लोकसभा इलेक्शन में 78 महिलाएं ही पहुंच पाई हैं. और ये आज तक का सबसे बड़ा नंबर है. लेकिन लोकसभा में शुरुआत कहां से हुई थी महिलाओं की भागीदारी की? पहली लोकसभा में कौन थीं वो महिलाएं जिन्होंने देश के लोकतांत्रिक सफ़र में अहम भूमिका निभाई. आइये जानते हैं उन महिलाओं के बारे में जिन्होंने देश की सबसे पहली संसद का हिस्सा बन इतिहास रच दिया. 

भाग 1  

राजकुमारी अमृत कौर: राजकुमारी अमृत कौर का जन्म 2 फरवरी 1889 को लखनऊ में हुआ था. इनके पिता राजा हरनाम सिंह पंजाब के कपूरथला राज्य के राजसी परिवार से थे. उन्होंने इंग्लैंड के डोरसेट से स्कूली पढ़ाई पूरी की थी. उसके बाद ऑक्सफ़ोर्ड चली गईं अपनी उच्च शिक्षा के लिए. वापस आईं तो देश का माहौल देखा. पिता हरनाम सिंह से मिलने उस समय के बड़े लीडर आते रहते थे. जैसे गोपालकृष्ण गोखले इनके पिता के करीबी थे. 1919 में जब जलियांवाला बाग़ हत्याकांड हुआ था, उसके बाद राजकुमारी अमृत कौर ने ठान लिया कि पॉलिटिक्स में आकर रहेंगी. फिर कांग्रेस के साथ जुड़कर काम करने लगीं. दांडी मार्च और भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने की वजह से जेल भी गईं. देश की पहली संसद में इनकी सीट थी मंडी, जो हिमाचल प्रदेश में पड़ती है. कांग्रेस पार्टी के टिकट पर जीत कर आई थीं राजकुमारी. पहली कैबिनेट में हेल्थ मिनिस्टर थीं. दस साल तक ये ज़िम्मेदारी उन्होंने निभाई. और वर्ल्ड हेल्थ असेम्बली की प्रेसिडेंट बनीं. 1950 तक उस संस्था में कोई महिला प्रेसिडेंट नहीं बनी थी. दिल्ली में स्थित एम्स (AIIMS) को शुरू करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही, और वो इसकी पहली प्रेसिडेंट भी बनीं. राजकुमारी अमृत कौर का निधन 6 फरवरी, 1964 को हुआ था.

amrit-kaur-2_750x500_081219032925.jpgतस्वीर: विकिमीडिया

श्रीमती अम्मू स्वामीनाथन: अम्मू स्वामीनाथन का जन्म 22 अप्रैल 1894 को केरल के पालघाट जिले में हुआ था. बचपन में घर में सबसे छोटी बच्ची थीं. उनकी पढ़ाई लिखाई पर ध्यान नहीं दिया गया. नौ बहनें और थीं. कम उम्र में पिता गुज़र गए. जब तक 13 साल की हुईं, उनकी मां ने उनका रिश्ता डॉक्टर सुब्बाराम स्वामीनाथन से तय कर दिया. वो उम्र में उनसे 20 साल बड़े थे. पर उन्होंने अम्मू को गाइड किया, उनके लिए ट्यूशन लगवाई. उन्हें अंग्रेजी सिखाई. एक समय ऐसा भी आया कि अम्मू उनसे  भी दो कदम आगे निकल गईं और लोगों के बीच बेझिझक बातचीत करने लगीं. उन्होंने साल 1917 में मद्रास में एनी बेसेंट, मार्गरेट, मालथी पटवर्धन, श्रीमती दादाभाय और श्रीमती अम्बुजमल के साथ महिला भारत संघ का गठन किया. अम्मू साल 1952 में लोकसभा और साल 1954 में राज्यसभा के लिए चुनी गई थीं. कांग्रेस के टिकट पर मद्रास के डिंडीगुल से जीती थीं. सेंसर बोर्ड की अध्यक्ष भी रहीं.  इनकी बेटी लक्ष्मी स्वामीनाथन ने डॉक्टर प्रेम सहगल से शादी की और कैप्टन लक्ष्मी सहगल कहलाईं. आजाद हिन्द फ़ौज में उनकी अहम भूमिका थी.

ammu_750x500_081219032943.jpgतस्वीर: विकिमीडिया

श्रीमती सुचेता कृपलानी: सुचेता मजूमदार बंगाली परिवार में जन्मी थीं. साल था 1908. आज़ादी की लड़ाई में भाग लेना चाहती थीं, लेकिन 1929 में उनके पिता और बहन दोनों गुज़र गए. परिवार की ज़िम्मेदारी उन पर आ पड़ी. सुचेता बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी में पढ़ाने चली गईं. वहीं BHU में उनकी मुलाकात आचार्य जे बी कृपलानी से हुई. फिर दोनों ने शादी भी की. सुचेता ने भारत छोड़ो आन्दोलन में हिस्सा लिया. ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की स्थापना की. 1947 में जब जवाहरलाल नेहरू ने मशहूर ट्रिस्ट विद डेस्टिनी स्पीच दी थी, तब उनके पहले सुचेता ने वंदे मातरम गाया था. वो उन 15 महिलाओं में से एक थीं जिन्हें संविधान लिखने के लिए चुना गया था. संविधान सभा की सदस्य भी रहीं वो. 1963 में देश की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं. राज्य था उत्तर प्रदेश. मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने एक बहुत बड़ी हड़ताल को संभाला था. 62 दिन तक चली इस हड़ताल के सामने उन्होंने झुकने से इनकार कर दिया था. सुचेता के बाद मायावती उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनने वाली दूसरी महिला हुईं.

suche-1-750x500_081219033031.jpgतस्वीर: विकिमीडिया

श्रीमती रेणु चक्रवर्ती: जन्म कोलकाता में हुआ. लोरेटो हाउस और कैंब्रिज से पढ़ाई करने के बाद कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ ग्रेट ब्रिटेन की सदस्य बन गई थीं. 1917 में जन्मीं रेणु जब 1938 में पढ़ाई करके ब्रिटेन से वापस भारत लौटीं, तो कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया की सदस्यता ले ली. शुरुआत में उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ कोलकाता में इंग्लिश लिटरेचर पढ़ाया. रानी मित्र दासगुप्ता और मणिकुंतला सेन के साथ मिलकर उन्होंने महिला आत्म रक्षा समिति बनाने में अहम भूमिका निभाई. अपने ज़माने के मशहूर जर्नलिस्ट निखिल चक्रवर्ती से उन्होंने शादी की. आजादी के बाद 1952 और 1957 का चुनाव उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी की तरफ से लड़ा. और बसीरहाट से उन्हें सांसद चुना गया. 1962 में बैरकपुर से चुनी गईं. जब 1964 में कम्युनिस्ट पार्टी में दो फाड़ हुए, तब उन्होंने पुरानी पार्टी के साथ रहना चुना. उसके बाद 1967 और 1971 में हुए चुनावों में वो नई पार्टी CPI (मार्क्सिस्ट) के उम्मीदवार मोहम्मद इस्माइल से हार गईं. आज इसी बसीरहाट से नुसरत जहां सांसद हैं. तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर.

renu-chak_750x500_081219033057.jpgतस्वीर: विकिमीडिया

श्रीमती विजयलक्ष्मी पंडित: जवाहरलाल नेहरू की बहन विजयलक्ष्मी आज़ादी की लड़ाई में दो बार जेल गई थीं. पति रणजीत सीताराम पंडित की मौत के बाद वो अपनी तीन बेटियों को पालने के लिए अकेली रह गई थीं. उस समय औरतों को उनके पति की सम्पत्ति में हिस्सा नहीं मिलता था, तो वो अपने करियर के लिए अमेरिका गईं. आज़ादी से भी पहले जब 1937 में गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट पास हुआ था तब उनको यूनाइटेड प्रोविंसेज (आज का उत्तर प्रदेश) का हेल्थ मिनिस्टर बनाया गया था. इस तरह आज़ादी से पहले की भी कैबिनेट में वो पहली महिला मंत्री हुईं. कांग्रेस के टिकट पर लखनऊ सेन्ट्रल से जीती थीं. जब वो संसद में थीं, तब उनके पार्लियामेंट सेक्रेटरी अपनी पॉकेट में सूई-धागा लेकर जाते थे कि अगर कहीं उनको ज़रूरत पड़ी तो. वो उनको ये समझाने की कोशिश करती थीं कि उनको इस तरह की मदद नहीं चाहिए. वो राष्ट्रपति पद के लिए भी कोशिश करना चाहती थीं, लेकिन उनकी जगह नीलम संजीव रेड्डी को चुना गया और वो जीत कर राष्ट्रपति हुए थे.

vijayalaksh_750x500_081219033118.jpgतस्वीर: विकिमीडिया

कुमारी एनी मैस्करेन: एनी मैस्केरेन का जन्म 6 जून 1902 को केरल के त्रावणकोर में हुआ था. हिस्ट्री और इकोनॉमिक्स में उन्होंने डबल मास्टर्स किया था. उसके बाद वो श्रीलंका में लेक्चरर के तौर पर पढ़ाने निकल गईं. वहां से वापस आईं, तो कानून की डिग्री ली. लेकिन फिर राजनीति की तरफ उनका झुकाव होना शुरू हुआ. त्रावणकोर स्टेट कांग्रेस की वर्किंग कमिटी का हिस्सा बनने वाली वो पहली महिला थीं. 1939 से लेकर 1947 तक उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा. वह केरल की पहली महिला सांसद थीं. उन्होंने इंडिपेंडेंट (निर्दलीय) के रूप में चुनाव लड़ा था. पहली लोकसभा का हिस्सा बनने के भी पहले वो त्रावणकोर कोचीन विधानसभा की सदस्य रह चुकी थीं. कई जगह पढ़ने को मिलता है कि गांधी ने एनी को उनके भाषण और बोलने के तरीके के लिए लताड़ा था. 1951 में शुरू हुए लोकसभा चुनावों में वो जीती थीं. उनका निधन 19 जुलाई 1963 को हुआ था. एनी मैस्केरेन के नाम पर चौक है तिरुवनंतपुरम में. वहीं उनकी एक कांसे की मूर्ति लगवाई गई है उनकी याद में. इसका अनावरण तत्कालीन उन राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने किया था.

annie-statue_750x500_081219033153.jpgतस्वीर साभार: randomclicks.in

अगले हिस्से में पढ़िए उन दूसरी महिला नेताओं के बारे में जो इसी लोकसभा का हिस्सा थीं. 

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