दुती चंद ने अपनी जीत का क्रेडिट अपनी गर्लफ्रेंड को दिया है

कुछ समय पहले दुती चंद ने अपने समलैंगिक होने का खुलासा किया था.

वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय हैं.

नेपोली में वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स चल रहे हैं. इनमें ट्रैक और फील्ड गेम्स भी होते हैं. इन्हें में से एक है 100 मीटर विमेंस ट्रैक फाइनल. इसमें दुती चंद ने गोल्ड जीत लिया है.

लेकिन ये खबर आप पढ़ चुके होंगे. तो नया क्या है?

दुती ने इस जीत के बाद इंडियन एक्सप्रेस को बताया,

“ये उन सभी लोगों को जवाब है जिन्होंने मुझपर शक किया और मेरे फोकस पर सवाल उठाए. क्या विराट कोहली ने प्यार में पड़ने के बाद परफॉर्म नहीं किया? अगर वो कर सकते हैं तो मैं क्यों नहीं. मैं जानती हूं कि बहुत सारे लोग मेरे बारे में नेगेटिव चीज़ें लिख और बोल रहे थे. वो बोल रहे थे कि किस तरह सबके सामने अपनी सेक्शुअल ओरिएंटेशन बताने के लिए ये समय सही नहीं था. लेकिन मुझे इसकी फिक्र नहीं है. मेरे खेल पर मेरा फोकस कभी कम नहीं हुआ. मैं जितना पहले ट्रेनिंग करती थी उतना ही आज भी करती हूं. और अपने गे होने की बात सबके सामने स्वीकार करके मुझे ऐसा महसूस होता है, मानों एक बड़ा बोझ मेरे कंधे से उठ गया हो.”

napoli-2_750x500_071119120636.jpgगोल्ड जीतने के बाद दुती ने ये तस्वीर ट्वीट की. तस्वीर: ट्विटर

जब दुती ने अपने होमोसेक्शुअल होने की बात सबके सामने स्वीकारी थी, तब उन्हें कई लोगों ने सपोर्ट किया था. लेकिन इसी के साथ उनके करीबी लोगों ने उन पर सवाल उठाए. उन्हें क्रिटिसाइज किया. उन्हीं के गांव के एक व्यक्ति ने द गार्जियन को बताया था,

“ये हमारे लिए बेहद शर्मिंदगी की बात है. हमने उसके खेल में हमेशा सपोर्ट किया. लेकिन इस संबंध को स्वीकार नहीं कर सकते. शादी केवल एक स्त्री और एक पुरुष के बीच में होती है. उसे इस बारे में पूरी दुनिया के सामने नहीं बोलना चाहिए था. उसे दौड़ने पर ही ध्यान लगाना चाहिए”.

दुती ने TOI को दिए बयान में कहा, 

“पिछले कुछ साल मेरे लिए बेहद दर्दभरे थे. एक नॉर्मल इंसान के तौर पर मेरे अस्तित्व पर बार-बार सवाल उठाए गए. जब मैं उससे उबरी, तो मेरी सेम सेक्स रिलेशनशिप के बारे में लोगों ने हल्ला हंगामा मचा दिया. मैं पूरी दुनिया को बताना चाहती हूं कि मैं जहां हूं, खुश हूं, और ओडिशा में मेरी पार्टनर से ज्यादा खुश इस वक़्त कोई नहीं होगा. जब से वो मेरी जिंदगी में आई है, मैं हर जगह मैडल जीत रही हूं. उसने मेरी जीत की दुआ की, और उसकी इच्छा पूरी हुई”.  

दुती ने 100 मीटर की इस रेस में गोल्ड जीतने के लिए 11.32 सेकंड लिए.

ये जो बार-बार सवाल खड़ा करने वाली बात दुती ने कही, उसके पीछे एक लंबा इतिहास है. 2014 में दुती को स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAF) ने इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ़ एथलेटिक्स फेडरेशन (IAAF) के पास रेफर किया था. शिकायत थी कि हो सकता है दुती के शरीर में पुरुषों के हॉर्मोन ज्यादा हैं. इसलिए वो औरतों के साथ कम्पीट नहीं कर सकतीं.

इस कंडीशन को हाइपरएन्ड्रॉजिनिस्म कहा जाता है. इस हॉर्मोन का नाम है टेस्टोस्टेरोन. ये औरतों और पुरुषों दोनों में होता है. लेकिन औरतों में बेहद कम और पुरुषों में ज्यादा. इसकी वजह से उनकी आवाज़ भारी होती है. शरीर में मसल्स बनते हैं ज्यादा. ये सब कुछ. औरतों के शरीर में एस्ट्रोजन ज्यादा पाया जाता है. अगर किसी औरत के शरीर में टेस्टोस्टेरोन ज्यादा है, तो वो एक मेडिकल कंडीशन होती है. दुती इसी से गुज़र रही हैं.

उनके शरीर में टेस्टोस्टेरोन की मात्रा आम औरतों/लड़कियों से ज्यादा है. इस वजह से उनको बैन कर दिया गया था. कॉमनवेल्थ गेम्स में और एशियन गेम्स में भी वो हिस्सा नहीं ले पाई थीं. इसके बाद दुती ने कोट ऑफ़ आर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट (CAS) में अपील की. वहां वो जीत गईं.

napoli-3_750x500_071119121129.jpgइस बार नेपोली में जो इंडियन एथलीट्स गए हैं उनकी टीम की तस्वीर भी दुती ने ट्वीट कीं.

पिछले साल अप्रैल में IAAF ने दुती के इवेंट्स यानी 100 मीटर और 200 मीटर की रेस को अपने जजमेंट से बाहर रखा और इस वजह से वो इसमें भाग ले पाईं. लेकिन यही इकलौती मुश्किल नहीं है. IAAF के नियमों के हिसाब से कोई फीमेल एथलीट अगर अपने शरीर के अन्दर टेस्टोस्टेरोन को कम नहीं करना चाहती, तो उसे या तो इंटरसेक्स कैटेगरी में जाना होगा, या मर्दों के खिलाफ कम्पीट करना होगा. साउथ अफ्रीकन धावक कास्टर सेमेन्या ने इसका जी जान से विरोध किया है. उनकी इस लड़ाई में दुती ने भी उनका साथ दिया है.

दुती के शरीर में प्राकृतिक तौर पर टेस्टोस्टेरोन ज्यादा बनता है. इसमें उनकी कोई गलती नहीं है. कई औरतों के शरीर में बनता है. उन्होंने मेडल जीतने के बाद बाकी के एथलीटों को चेतावनी दी कि बिना किसी वेरिफिकेशन के किसी भी टेस्ट के लिए ना जाएं. इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में दुती ने कहा था कि अगर ऑफिशियल उनको किसी भी टेस्ट के लिए कहते हैं तो उनको ये लिखित में मांगना चाहिए कि ये टेस्ट क्यों कराए जा रहे हैं. यही नहीं, एक स्वतंत्र लोकपाल भी रखना चाहिए जो ये बता दे कि जिन बातों के आधार पर टेस्ट्स की मांग की जा रही है वो कितनी सही और कितनी गलत हैं.

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