हिंसा और शोषण के शिकार बच्चे अपना ट्रॉमा बयां कर सकें, इसलिए छत्तीसगढ़ पुलिस ने की बढ़िया पहल

ये कमरा अगर हर पुलिस स्टेशन में बन जाए, तो शायद आधी दिक्कतें अपने आप खत्म हो जाएंगी.

लालिमा लालिमा
जुलाई 10, 2019
लेफ्ट- प्रतीकात्मक तस्वीर, राइट फोटो सोर्स- रिपोर्टर किशोर साहू

पुलिस स्टेशन का नाम सुनते ही, ढेर सारी निगेटिव बातें दिमाग में घूमने लगती हैं. पुलिसवालों की निगेटिव छवि भी दिखने लगती है. क्योंकि आए दिन 'पुलिस की लापरवाही' वाली खबरें हम देखते हैं, सुनते हैं और पढ़ते हैं. इसलिए अगर कभी कोई पुलिसवाला अच्छा काम करता है, तो एक बार में तो विश्वास ही नहीं होता. बिल्कुल ऐसा ही कुछ इस खबर के साथ भी हुआ. क्योंकि खबर पॉजिटिव थी. खुशी वाली थी.

छत्तीसगढ़ के एक पुलिस स्टेशन में, वाकई औरतों और बच्चों के बारे में पुलिसवाले सोच रहे हैं. उन्हें स्टेशन के अंदर सहज महसूस कराने के लिए काम कर रहे हैं. ये स्टेशन बालोद जिले में है. बालोद जिला मुख्यालय का ही स्टेशन है. थाने के अंदर एक सुंदर सा कमरा बनाया गया है. इसका उद्घाटन 9 जुलाई के दिन ही हुआ है. इस कमरे का नाम महिला डेस्क चाइल्ड फ्रेंडली रूम है.

2-750x500_071019054721.jpg9 जुलाई को इस कमरे का उद्घाटन हुआ है. फोटो- रिपोर्टर किशोर साहू

क्या है ये कमरा और क्यों बनाया गया है?

ये कमरा खासतौर पर छोटे बच्चों और औरतों के लिए है. कई बारी क्या होता है कि औरतें अपनी शिकायत लिखाने जब स्टेशन जाती हैं, तो वहां का माहौल बहुत घटिया होता है. वो दस लोगों के सामने बैठकर अपनी बात रखने में असहज हो जाती हैं. डर जाती हैं. तो औरतों की इसी दिक्कत को खत्म करने के लिए ये कमरा बना है. अब अगर इस थाने में औरतें शिकायत लिखाने आएंगी, तो उन्हें इसी कमरे में बैठाया जाएगा. महिला अधिकारी अलग से उनकी बात सुनेगी. दस लोग आसपास नहीं रहेंगे, तो औरतें आसानी से अपनी बात रखेंगी.

यही कॉन्सेप्ट बच्चों के लिए भी है. बच्चे जो अपराध का शिकार होते हैं, वो पहले से ही डरे रहते हैं. और फिर जब उन्हें पूछताछ के लिए पुलिस स्टेशन लाया जाता है, तो वहां का माहौल उन्हें और भी ज्यादा डरा देता है. इसी डर को खत्म करने के लिए इस कमरे को सुंदर तरीके से सजाया गया है.

1-750x500_071019054819.jpgएसपी एमएल कोटवानी. इनका कहना है कि बालोद जिले के बाकी पुलिस स्टेशन में भी इस तरह क कमरे बनवाने की योजना है. फोटो- किशोर साहू

कमरे की दीवारें गुलाबी रंग में पुती हुई हैं. बच्चों के लिए कैरम रखा हुआ है. गुब्बारे भी हैं. ताकि बच्चे पूछताछ के समय पर भी खेल सकें. चॉकलेट, पेंसिल, पेंटिंग जैसी सुविधाएं बच्चों को मिलेंगी. ताकि वो बेझिझक अपनी बात कहें, और आराम से उनकी पूछताछ हो जाए. और उनका मन भी बहलता रहे. इस कमरे को पॉक्सो एक्ट के तहत बनाया गया है.

हमने इस मामले में हमारे रिपोर्टर किशोर साहू से बात की. उन्होंने बताया कि जब डीएसपी अमर सिदार ने स्टेशन की कमान संभाली थी, तब उन्होंने इसकी हालत देखी थी. उन्होंने देखा था कि औरतें बहुत डर-डर अपनी बात रखती हैं, बच्चे भी डरे रहते हैं. इसलिए उन्होंने थाने के अंदर ही एक अलग कमरा बनाने का फैसला किया.

एसपी एम एल कोटवानी ने बताया कि पुलिस स्टेशन का माहौल ठीक करने के लिए ये कदम उठाया गया है. ऐसा इसलिए किया है कि औरतें और बच्चे आसानी से अपनी बात कह पाएं.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में बालोद पुलिस मुख्यालय इकलौता पुलिस थाना है, जहां इस तरह की व्यवस्था है.

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