बुक रिव्यू- कट: द डेथ एंड लाइफ ऑफ़ अ थिएटर आर्टिस्ट

ये किताब मशहूर थिएटर आर्टिस्ट अमिताभ कुलश्रेष्ठ की ज़िन्दगी पर आधारित है.

ऑडनारी ऑडनारी
मार्च 18, 2019
(फ़ोटो कर्टसी: ट्विटर)

थिएटर की दुनिया हमेशा इंटरेस्टिंग पर कॉन्ट्रोवर्सी से भरी रही है. मराठी थिएटर भी इससे अलग नहीं रहा. उसने वेस्ट से कई चीज़ें अपनाईं हैं. जैसे तमाशा, संगीत नाटक, और सामाजिक और राजनितिक मूवमेंट में होने वाली चीज़ों को चैलेंज करना. यही सारी चीज़ें 'कट: द डेथ एंड लाइफ ऑफ़ अ थिएटर आर्टिस्ट' को मिलकर बनाती हैं. ये एक किताब है जिसे श्रीमोई पिऊ कुंडू ने लिखीं हैं.

श्रीमोई पिऊ कुंडू एक चीज़ में अव्वल हैं. समाज की परते खोलने में. ऐसी कहानियां लिखने में जो इंसान की अंतरात्मा को हिला दें. एक दिन श्रीमोई ने एक हेडलाइन पढ़ी. यही उनकी किताब का मुख्य विषय बन गई. ये किताब थिएटर आर्टिस्ट अमिताभ कुलश्रेष्ठ की कहानी है. हालांकि श्रीमोई के मुताबिक ये एक बॉलीवुड बायोपिक है.

एक प्ले की तरह, ये किताब भी तीन एक्ट में बंटी हुई है. अमिताभ कुलश्रेष्ठ की लाश मुंबई के काफ़ी व्यस्त लोकल रेलवे स्टेशन पर मिली थी. न उनको कोई पहचान पाया था, न ही किसी ने उनकी लाश की ज़िम्मेदारी ली. हां, अपनी ज़िन्दगी के दौरान ज़रूर उनके कई दोस्त रहे थे. परिवारवाले, राजनेता, यहां तक माफ़ियां भी उनके आगे-पीछे रहते थे. पर मरने के बाद वो बस ब्रेकिंग न्यूज़ बनकर रह गए.

अमिताभ कुलश्रेष्ठ के पिता नाटकों के बड़े शौकीन थे. ख़ासतौर पर दादा साहब सरत चन्द्र जोगलेकर के लिखे नाटकों के. उनकी मां एक प्रोफेशनल डांसर बनना चाहती थीं. तो ये कहना ठीक होगा कि उन्हें कला विरासत में मिली थी. अमिताभ के माता-पिता ने जब शादी की तो उनके परिवारवालों ने उन्हें बेदखल कर दिया. थक-हारकर उन्हें सर्कस में नौकरी करनी पड़ी. यहीं पर अमिताभ का जन्म हुआ. उन्होंने अपना बचपन सर्कस के आसपास ही गुज़ारा. यहां दादा साहब की निगाह उनपर पड़ी. अमिताभ ने उनका थिएटर ग्रुप जॉइन कर लिया. यही नहीं दादा साहब उनको अपना बेटा भी मानने लगे. इसी समय पंजाब से आए आर.के. चोपड़ा ने भी दादा साहब का ग्रुप जॉइन किया. पर उनको थिएटर से ज्यादा फ़िल्मों में इंट्रेस्ट था. वो एक्टर बनना चाहते थे. पर जब दादा साहब को आर.के. चोपड़ा और अपनी बेटी सरला के अफेयर के बारे में पता चला तो क़यामत ही आ गई.

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श्रीमोई पिऊ कुंडू एक चीज़ में अव्वल हैं. और वो है समाज की परते खोलने में. (फ़ोटो कर्टसी: ट्विटर)

आर.के. चोपड़ा ने थिएटर ग्रुप छोड़ दिया. वो फ़िल्मों में चले गए. दादा साहब ने अमिताभ को सरला से शादी करने के लिए कहा. बतौर गुरु दक्षिणा. पर अमिताभ, सरला की गोद ली हुई बेटी माया को पसंद करते थे. वो भी अभिनेत्री बनना चाहती थी. दरअसल सरला ने अपना बच्चा खो दिया था. उसकी कमी भरने के लिए उसने माया को गोद लिया था. पर जब उन्हें इस अफेयर के बारे में पता चला तो अमिताभ से उनकी शादी टूट गयी.

कुंडू अपनी किताब में इन सारे किरदारों को साथ लाती हैं. उनकी किताब में 1992 के दंगे से लेकर बाबरी मस्ज़िद का तोड़ना और धर्म के नाम पर खेली जा रही राजनीति सब कुछ मिलेगा. कुंडू की राइटिंग अपने आप में अलग है और उनकी किताब काफ़ी पावरफुल. उनके किरदार अपनी कमियों के बावजूद बहुत असल हैं. पर उन सबकी शुरुआत और अंत अमिताभ के साथ होती है. उनका मकसद किताब में अमिताभ की ज़िन्दगी को उसकी दिशा में लेकर जाना है. कुछ उसे प्यार करते हैं. कुछ नफ़रत. कुंडू के लिखने का अंदाज़ आपको किताब खत्म करने पर मजबूर कर देगा. और इसे खत्म कर आपको ऐसा लगेगा जैसे आप कोई नाटक देखकर उठे हों.

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 (ये रिव्यू ऑड नारी के लिए सानिया अहमद ने अंग्रेज़ी में लिखा था)

 

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