हनी सिंह ने कमबैक तो कर लिया, लेकिन उनका घिनापन खत्म नहीं हुआ है

गली-मोहल्ले के लड़कों को खुद नहीं पता होगा कि वो ये सब सोचते हैं.

“मैं अपना रैप लिखने के लिए लिटरेचर में नहीं जाता, फिल्मी गानों से शब्द नहीं चुराता. मैं गली मोहल्ले के लड़कों के बीच में जाकर बैठ जाता हूं. वो जो बातें करते हैं उनको सुनता हूं और वहां से मेरे रैप के बोल निकलते हैं.”

हनी सिंह ने 2005 में करियर की शुरूआत की थी. गाने गए, रैप करने की कोशिश की पर काम नहीं चला. पहचान बनाने के लिए गालियां देनी शुरू कर दीं. और उन्हें रैप का नाम दे दिया. इंटरनेट पर फेमस हो गए. रैप में सेक्स और सेक्सिज्म का लेवल बढ़ता चला गया. फिर ब्रेक लिया.

दो-तीन साल का. बीच में एकाध-एकाध गाने करते रहे. इलाज चल रहा था उनका. 2018 में कमबैक किया. उम्मीद थी कि इस बार उनके रैप में कुछ अच्छा सुनने को मिल जाएगा. शायद वो मौजूदा माहौल और हालात समझ चुके होंगे. लेकिन नहीं. हनी सिंह ने रैप के नाम पर घिनापन चालू रखा है.

खैर, आप सोच रहे होंगे कि हम अभी हनी सिंह के बारे में बात क्यों कर रहे हैं? खैर, आप सोच रहे होंगे कि हम अभी हनी सिंह के बारे में बात क्यों कर रहे हैं? दरअसल पंजाबी सिंगर ने हाल ही में अनाउंस किया है कि वो वर्ल्ड टूर पर जाने वाले हैं. ये पांच सालों में उनका पहला वर्ल्ड टूर होगा. इस वर्ल्डटूर में वो अपनी टीम के लिए नए लोगों का सिलेक्शन करेंगे.

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रैप की लाइन्स पढ़िए...

सिलिकॉन वाली लड़की को मैं पकड़ता नहीं

ब्राउन गर्ल्स से मेरा दिल भरता नहीं

गोरी-गोरी स्किन के लिए मैं मरता नहीं

क्योंकि मैं हूं शेर, घास चरता नहीं

मखणा (दिसंबर, 2018)

दारू के नाम पर चल देगी

ये पक्का मुझको फल देगी

इतना सेक्सी है भाई तेरा

ये आज नहीं तो कल देगी

लैला भंड हो गई (अगस्त, 2018)

रैप में एक लड़की कैसी होती है

हनी सिंह के गानों में लड़की को किसी प्रॉपर्टी या ऑब्जेक्ट की तरह पेश किया जाता है. उसे खरीदा जा सकता है. ऑब्जेक्ट होती है, जैसे गाड़ी वगैरह होती हैं न. क्योंकि वो फर्स्ट हैंड नहीं मिलती है. पैसों के लिए लड़कों के पीछे दौड़ती है. ड्रग लेती है. पैसों के लिए होटल जाती है. गाली खाती है, पिटती है.

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क्या मजेदार है यौन हिंसा?

साल 2008, 2009 के आसपास एक रैप सॉन्ग आया था. ये गाना न सिर्फ सेक्स बल्कि हिंसा और यौन हिंसा से भरा था. बोल इतने भद्दे और खराब थे कि यहां लिखे नहीं जा सकते. रैप की लिखी जा सकने वाली इकलौती लाइन कुछ ऐसी है, सेक्स के बाद तुझे जूते मारूं, मेरी बुद्धि खराब. किशोर उम्र के लड़के इस गाने को छुप-छुपकर सुनते थे.

ये वो घिनौना रैप सॉन्ग था, जिसके जरिये हनी सिंह अचानक फेमस हुए थे. हालांकि उन्होंने कभी नहीं माना कि ये रैप उन्होंने लिखा और गाया था.

क्या हर युवा लड़का सिर्फ सेक्स के बारे में सोचता है

हनी सिंह के लगभग सभी सॉन्ग सेक्सिस्ट हैं. लेकिन वो बड़े आराम से अपनी भद्दी और घटिया सोच का ठीकरा गली मोहल्ले के लड़को के सिर पर मढ़ देते हैं. वो कहते हैं कि गली मोहल्ले के लड़के ऐसा सोचते हैं.

पहला सवाल क्या गली के लड़के सिर्फ ऐसा ही सोचते हैं. उन्हें नौकरी, रोजगार, पढ़ाई-लिखाई जैसी चीजों से कोई मतलब नहीं. गली-मोहल्ले के लड़के और भी बहुत कुछ सोचते हैं.

आम लड़के मेहनत करते हैं, सपने देखते हैं

आम लड़के तो रोज़गार भी चाहते हैं, पैसे कमाना भी चाहते हैं, वे तो शादी भी करते हैं, टूटकर प्रेम भी करते हैं. पिता भी बनते हैं. राखी भी बंधवाते हैं.

हनी सिंह को ये समझ नहीं आता कि जो लड़के नुक्कड़ पर खड़े होकर लड़की छेड़ते हैं, केवल वो आम लड़के नहीं होते. अगर चंद छिछोरे लड़के ऐसा सोचते भी हैं, तो क्या गाने सिर्फ उन्हीं के लिए लिखे जाते हैं. क्या लड़कियां उनके गीत नहीं सुनतीं?

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टैबू और मिडिल क्लास

तर्क होता है कि ये गाने इतने ही खराब हैं, तो हिट क्यों होते हैं. लोग इन्हें सुनना बंद क्यों नहीं करते. इसकी एक वजह ये है कि सेक्स और गाली हमारे यहां टैबू है. मिडिल क्लास 16-17 साल का लड़का गाली देना चाहता है. उसे लगता है ये कूल है. लड़कों और कुछ हद तक लड़कियों के लिए ये गाने सेक्सुअल एक्सप्रेशन का पर्याय बन जाते हैं.

वो ये गाने सुनते हैं. कई लोग छिपकर ये गाने छिपकर सुनते हैं. जैसे छिपकर पॉर्न देखते हैं, उसी तरह. मगर पॉर्न में रैप पॉर्न भी है. देखने वाले युवा को नहीं पता वो सही है या गलत. क्योंकि रैप पॉर्न बिक रहा है, इसका ये मतलब नहीं कि आम इंसान यही चाहता है.

हनी सिंह चार छिछोरे लड़कों की बातों को लेकर गाने बनाते हैं. कहते हैं कि पूरे देश के लड़के ऐसा ही सोचते हैं. कहते हैं वो अपने रैप के जरिये वो उन लड़कों की बातें, उनकी सोच के बारे में दुनिया को बताते हैं.

अपनी सोच दुरुस्त करें, दूसरों पर न थोपें

हनी सिंह का खुद को आम आदमी का सिंगर/रैपर बताकार अपनी घटिया सोच जस्टिफाई करना ठीक नहीं है. दरअसल वो अपनी सोच आम लड़कों पर क्यों डाल रहे हैं?

सुप्रीम कोर्ट तक कह चुका है कि हर बार आम जनमानस की भावनाओं से फैसले नहीं लिए जा सकते हैं.

पिछले साल अगस्त में मीटू मूवमेंट आया और हिंदी सिनेमा में गानों और फिल्मों में बढ़े कैजुअल सेक्सिज्म पर लोगों ने बात करनी शुरू की. बिना सेक्सिज्म के भी रैप बनते हैं, सुने जाते हैं, गली बॉय इसका उदाहरण हैं. विदेशों में  रैप सॉन्ग में वैरायटी होती है.

लेकिन ये हनी सिंह के सिर के ऊपर से निकल जाने वाली बात है. उनके लिए दुनिया वहीं की वहीं है. मीटू वाले पूरे एक एरा का कोई अस्तित्व नहीं. ब्रेक लेने से पहले वो जिस युग में थे, अब भी उसी युग में जी रहे हैं.

हनी सिंह ने 2 अप्रैल 2019 को यूट्यूब पर अपकमिंग गाने की रिहर्सल का वीडियो शेयर किया था.

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जाते-जाते उसकी लाइनें...

एक बात कहता हूं, पहले कही न

ऊपर से शरीफ, अंदर से कमीना

सुंदर सी, ऐसी एक हसीना

नीचे से कैट, ऊपर से करीना

मैं कमीना, मैं कमीना, मैं कमीना...

 

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