प्रियंका चोपड़ा ने बनाई नेटफ्लिक्स के लिए पहली मराठी फिल्म, जिसमें चार तगड़े कलाकार दिखेंगे

और डायरेक्टर वो हैं जिन्हें नेशनल अवॉर्ड मिल चुका है.

मुबारक अली मुबारक अली
फरवरी 13, 2019

राज ठाकरे कभी इस बात को लेकर हाइपर रहा करते थे कि मुंबई में रहकर तगड़ा पैसा पीटने वाले हिंदी कलाकार कभी स्थानीय भाषा के लिए कुछ नहीं करते. मराठी के लिए उनका योगदान शून्य है. कभी शायद था भी ऐसा. लेकिन अब तस्वीर काफी बदल गई है. हिंदी सिनेमा के बड़े-बड़े स्टार मराठी फिल्मों में इन्वेस्ट कर रहे हैं. अच्छी फ़िल्में बना रहे हैं. अजय देवगन, अक्षय कुमार, अमिताभ बच्चन, रितेश देशमुख जैसे स्टार्स मराठी फिल्मों में अपना पैसा लगा चुके हैं. ऐसा ही एक और नाम है प्रियंका चोपड़ा. उन्होंने 2016 में अपनी पहली मराठी फिल्म पेश की थी. नाम था 'वेंटिलेटर'. इस फिल्म को तीन नेशनल अवॉर्ड मिले. दर्शकों का भी भरपूर प्यार मिला. फिल्म सुपरहिट रही थी.

अपने पहले मराठी प्रोजेक्ट की सफलता से उत्साहित प्रियंका एक और मराठी फिल्म लेकर आई हैं. नाम है 'फायरब्रांड'. सिर्फ एक फर्क है. इस बार ये फिल्म नेटफ्लिक्स ओरिजिनल होगी. यानी सिनेमाघरों में नहीं लगेगी, बल्कि इसे देखने के लिए नेटफ्लिक्स का कनेक्शन चाहिए होगा. 11 फ़रवरी को इसका ट्रेलर रिलीज़ हुआ. आइए देखते हैं ट्रेलर से क्या हाथ लगा.

पहले ट्रेलर देख लीजिए:

ट्रेलर से हमें चार मेन किरदारों का परिचय मिलता है.

  • पहला और सबसे इम्पोर्टेन्ट किरदार है उषा जाधव का. उषा एक वकील का रोल कर रही हैं जो स्पेशली महिलाओं के केसेस हैंडल करती हैं. डोमेस्टिक वायलेंस, एलिमनी वगैरह-वगैरह.
  • दूसरा है उनका पति. मराठी सिनेमा के टॉप के अभिनेता गिरीश कुलकर्णी ने किया है ये रोल. ट्रेलर से स्पष्ट नहीं है कि वो बस होने के लिए हैं या उनका कहानी में कोई ज़रूरी योगदान भी है.
  • तीसरे हैं सचिन खेडेकर. मराठी सिनेमा का एक और बड़ा नाम. वो एक अमीर आदमी का रोल कर रहे हैं जो वुमनाइज़र है.
  • चौथा प्रमुख किरदार निभाया है राजेश्वरी सचदेव ने. वो सचिन खेडेकर की पत्नी बनी हैं और जिन्हें उनसे बहुत शिकायतें हैं. राजेश्वरी बहुत दिनों बाद किसी फिल्म में दिखेंगी. उन्हें श्याम बेनेगल के साथ काफी उम्दा फ़िल्में करने के लिए जाना जाता है. 'सरदारी बेगम' तो याद ही होगी आपको.

कुल मिलाकर ये ट्रेलर किरदारों का इंट्रोडक्शन मात्र है. ट्रेलर से ये स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि इसकी सेन्ट्रल थीम क्या होगी. उषा जाधव वकील भी हैं, दलित भी और रेप विक्टिम भी. लेकिन जितना ट्रेलर में दिखा उससे लगा नहीं कि स्टोरी का सेंट्रल प्लॉट उनकी कहानी है. ट्रेलर से इस मामले में भी निराशा होती है कि इसकी डबिंग खराब है और मेलोड्रामा भी ज़्यादा लग रहा. फिल्म के पक्ष में सिर्फ एक ही बात दिखाई देती है. इसकी शानदार स्टारकास्ट. चारों ही एक्टर मंझे हुए हैं और कमज़ोर स्क्रिप्ट को भी संभालने की ताकत रखते हैं. ऐसा हो पाता है या नहीं ये 22 फ़रवरी को पता चलेगा. जब नेटफ्लिक्स पर इसकी स्ट्रीमिंग शुरू हो जाएगी.

फिल्म के पक्ष में एक और बात है. इसकी डायरेक्टर अरुणा राजे हैं जिन्होंने नेशनल अवॉर्ड जीत रखा है. जिनके नाम 'रिहाई' जैसी शानदार फिल्म है.

बहरहाल, फायरब्रांड ऐसी महिलाओं के लिए इस्तेमाल होने वाला विशेषण है जो काफी मुखर होती हैं. फिल्म भी ऐसी निकले तो मज़ा आ जाए.

 

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