शादी सीज़न में सोने के गहने खरीदते हुए कहीं आप ठगी तो नहीं जा रहीं?

ज्यादा जूलरी खरीदने के चक्कर में भूल न हो जाए.

नेहा कश्यप नेहा कश्यप
मार्च 25, 2019
फोटो- pixabay

शादियों का सीजन चल रहा है. जब कपड़ों, मेकअप और गहनों की खरीदारी जोरों पर होती है. अगर आपकी शादी हो रही है. तो घरवाले अलग, ससुराल की तरफ से भी कई गहनें मिलेंगे. जब तक बेटी को गहनों से लादा नहीं, तब तक घरवालों को शादी, शादी नहीं लगती!

हमारे परिवार का एक पहचान वाला जूलर होता है अक्सर. जिसपर हमें बेहद भरोसा होता है. और हम बिना ज्यादा जांच पड़ताल किए उससे गहने खरीदते हैं. हम मानते हैं कि सोना बुरे वक्त पर काम आ सकता है. और उसे नकद में बदलना आसान है. इसीलिए हमारी मम्मियां अपनी बचत से सोना खरीदना पसंद करती हैं. लेकिन क्या होगा जब आपको पता चले कि खरीदा गया सोना बहुत ज्यादा मिलावटी है?

हमने सोने की शुद्धता और परख को लेकर रितिका साहनी से बात की. जो 1986 से संचालित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ जेम्स एंड जूलरी में फेकल्टी हैं:

1. प्रति ग्राम कीमत क्या है

सोना खरीदने से पहले प्रति ग्राम कीमत के बारे में पता कर लें. अलग-अलग शोरूम में सोने के दाम अलग-अलग हो सकते हैं. सही कीमत पता करने के लिए ऑनलाइन चैक कर सकते हैं. या बाजार में कई शोरूम पर कीमतें पूछ सकते हैं. ये याद रहे कि एक ही दाम पर आंख मूंदकर भरोसा न करें.

2. BIS सर्टिफिकेट चेक किया क्या?

भारत में सिर्फ एक-तिहाई गहने हॉलमार्क के साथ होता हैं. हॉलमार्क यानी असली सोना होने की पहचान. सोने की जिस जूलरी पर ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टेंडर्ड (BIS) सर्टिफिकेट नहीं होता वो नकली हो सकता है. BIS एक सरकारी संस्थान है. जो सोने की शुद्धता को प्रमाणित करता है.

ऐसी दिखती है BIS हॉलमार्क वाली गोल्ड जूलरीऐसी दिखती है BIS हॉलमार्क वाली गोल्ड जूलरी

3. पक्का बिल

जूलर पुराना हो तो हम बिल लेने की परवाह नहीं करते. दुकानदार पक्का बिल देने से कतराते हैं. क्योंकि उन्होंने आपको क्या बेचा, और वो कितना शुद्ध है, इसकी डिटेल और कीमत की सही-सही जानकारी देनी पड़ती है. मिलावट करने वाला दुकानदार आपको कभी पक्का बिल नहीं देना चाहेगा. क्योंकि किसी गड़बड़ में आप उसे सुबूत के तौर पर इस्तेमाल कर सकती हैं. वो गहने और उनकी कीमत की जानकारी सादे कागज पर लिख कर दे देगा. पर आप पक्का बिल जरूर मांगिए जिसमें जूलर का नाम और दस्तखत हो.

4. दुकानदार की सोना खरीदने की शर्तें

मुश्किल समय में आप सोने की जूलरी बेचने जाएं. और दुकानदार कहे कि उस ज्वैलरी में टांका है. या कुछ नग (स्टोन) और मीना लगे हैं. जिन्हें काटकर वह सिर्फ सोने के दाम देगा. जो ज्वैलरी की कीमत के आधे होंगे. ऐसे में आपको अपने साथ हुई ठगी का अहसास होगा. बेहतर होगा कि सोना खरीदते समय बिल पर ही बेचने की शर्तें हो. या लिखित रूप से आपको दी जाएं. ताकि आपको गहने मजबूरी में औने-पौने कीमत पर नहीं बेचने पड़ें.

5. पर सोना कितना सोना है?

24 कैरेट का मतलब 100 फीसदी खरा सोना होता है. यानी उसमें किसी और धातु की कोई मिलावट नहीं की गई है. खरा सोना इतना नर्म होता है कि इससे कोई गहना नहीं बनाया जा सकता है. इसीलिए गहने बनाने के लिए सोने में दूसरी धातुओं को मिलाया जाता है. जैसे:

-22 कैरेट गोल्ड में 91.6 फीसदी सोना होता है. यानी 2 कैरेट कोई अन्य धातु मिलाया गया है.

-18 कैरेट गोल्ड में 75 फीसदी खरा सोना होता है. मतलब चार कैरेट अन्य धातु है.

आप दुकानदार से पूछ सकते हैं कि आपके गहने में सोने के साथ किसी धातु की कितनी मिलावट की गई है.

6. बनाने का खर्चा

जूलरी की कीमत में सोने की ही कीमत नहीं होती. आपको ये भी चुकाना होता है 'मेकिंग एंड वेस्टेज चार्ज. 'मेकिंग' माने बनाना. 'वेस्टेज' मतलब बर्बादी. सोने के दाम, शुद्ध सोने के होते हैं. उसमें दूसरी धातु का खर्चा जुड़ता है. इसके अलावा सोने को काटने और टांकने में कुछ सोना बर्बाद हो जाता है. उसके दाम होते हैं वेस्टेज चार्ज.

ज्यादातर दुकानदार आपको इनके बारे में नहीं बताते हैं. मान लीजिए आप 10 ग्राम की सोने की अंगूठी 30,000 रुपये में खरीदती हैं. यानी अंगूठी के प्रति 1 ग्राम की कीमत 3000 रुपये है. अब आप सोने की प्रति ग्राम कीमत जानिए. और घटाइए. अंगूठी और सोने की की प्रति ग्राम की कीमत में जो अंतर है वो मेकिंग चार्ज और वेस्टेज होगा.

7. सही वज़न

दुकानदार जूलरी में लगे स्टोन के साथ जूलरी का वजन करते हैं. जिससे आपको जूलरी की ज्यादा कीमत चुकानी होती है. जैसे मान लीजिए 10 ग्राम की अंगूठी में एक ग्राम स्टोन लगा है और सोने का वजन सिर्फ नौ ग्राम है. ऐसे में ज्वैलरी के सही वजन के बारे में दुकानदार से जान लें. सोने और स्टोन के अलग-अलग दाम जोड़कर पैसे दें.

 

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