औरतों के हक़ के लिए बोला तो 38 साल की जेल कर दी, 148 कोड़े बरसाने को कहा

दुनिया वाले सम्मान दे रहे, अपनी सरकार कोड़े मार रही है

ईरान. पुराने ज़माने का पर्शिया. फारस. उससे भी पहले, मेसोपोटामिया क्षेत्र में पड़ने वाली जगह जहां आज के टर्की और सीरिया भी शामिल हैं. इतिहास बहुत पुराना है इस जगह का. लेकिन जिस इतिहास से हमें मतलब है इस वक़्त, वो शुरू होता है 1970 से. पहले ईरान सेक्यूलर स्टेट था. याने धर्मनिरपेक्ष. 1979 में इस्लामिक रिवोल्यूशन के बाद ईरान की सारी धर्मनिरपेक्षता परे कर दी गई, और ईरान इस्लामिक राष्ट्र बन गया.

iran-air_750_031319020200.jpgइस्लामिक राष्ट्र बनने से पहले ईरान एयरलाइन्स की एयर होस्टेसेज

तब से लेकर अब तक ईरान में बहुत बदलाव आ गए हैं. वहां औरतों के लिए हिजाब पहनना कम्पलसरी हो गया है. कट्टर इस्लाम का बोलबाला है. बीच में बहुत कुछ हुआ, लेकिन उन सबके बारे में बात करेंगे तो पन्ने पलटते -पलटते रात हो जाएगी.

खैर, वहां की बात इसलिए हो रही है, क्योंकि वहां की ह्यूमन राइट्स लॉयर नसरीन सौतौदेह को 38 साल की सज़ा हुई है. यही नहीं, इसके साथ 148 कोड़े लगाने का भी आदेश दिया गया है. उनका गुनाह क्या था? गरीब, महरूम, बेजार लोगों के हक के लिए केस लड़ना. औरतों की आज़ादी के हक को मांगने में अपनी आवाज़ ऊंची करना.

nasrin_750_031319020220.jpgतस्वीर: फेसबुक

कौन हैं नसरीन सौतौदेह?

ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट और लॉयर हैं. पूरी दुनिया में मशहूर हैं. 2016 में भी इन्हें जेल में डाल दिया गया था. ये उन लोगों के लिए काम करती थीं जिनके पास और कोई ऑप्शन नहीं होता था. जैसे सताए हुए बच्चे, और उनकी माएं जो अपने अत्याचारी पिता और पतियों के पास वापस नहीं जा सकते थे. इन्होंने उन औरतों के लिए भी लड़ाई लड़ी जो अनिवार्य हिजाब के नियम को नकारते हुए सिर खुला रखने की जुर्रत करती हैं. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके इस काम की सराहना हो चुकी है. वहीं कानून के जानकारों का ये कहना है कि इसी वजह से शायद नसरीन को इतनी बड़ी सजा मिली है. पांच साल एक मामले में, और 33 साल एक मामले में.

nasrin-2_750_031319020327.jpgनसरीन की पिछली सजा में उनके 20 साल तक देश से बाहर जाने पर बैन लगा दिया गया था

एमनेस्टी ने भी नसरीन को सपोर्ट किया है. उनकी आज़ादी की मांग उठ रही है. नसरीन इससे पहले भी कैद की जा चुकी हैं. 1995 के बाद से उन्होंने अपनी प्रैक्टिस शुरू की थी, क्योंकि उन्हें उनके क्रेडेंशियल देने में सरकार ने बहुत वक़्त लगाया था. और तब से लेकर अब तक 2011 में भी उन्हें कैद किया जा चूका है और पिछले साल जून में. इस बार उन पर चार्जेज लगाए गए हैं कि उन्होंने करप्शन और वेश्यावृत्ति को बढ़ावा दिया, पब्लिक के सामने बिना हिजाब के आकर एक पाप भरा काम किया, और पब्लिक ऑर्डर को तहस नहस किया’.  

reza-nasrin_750_031319020441.jpgनसरीन के पति रज़ा खानदान ने केस के रिजल्ट से जुड़ी जानकारी अपने फेसबुक पर साझा की. वो इस लड़ाई में शुरू से नसरीन के साथ खड़े रहे हैं.

अंतरराष्ट्रीय कम्युनिटी के प्रतिनिधि  भी इसकी आलोचना कर रहे हैं, एमनेस्टी इंटरनेशनल के फिलिप लूथर ने कहा कि नसरीन को दी गई सज़ा ईरान में दी गयी अब तक की सबसे कड़ी सजा है जो एमनेस्टी ने देखी. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ये मांग करता है कि नसरीन को फ़ौरन बिना किसी शर्त के रिहा कर दिया जाए.

 

लगातार ऑडनारी खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करे      

Copyright © 2019 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today. India Today Group