किन लड़कियों के शरीर देखकर बनाए जाते हैं कपड़े डिस्प्ले करने वाले पुतले?

गोरी, पतली कमर वाली इन मैनेक्विन के असली शरीर कहां हैं?

एक अमेरिकी टीवी शो है 'द मार्वेलस मिसेज मेज्ल्स'. उसकी नायिका अपने पास इंच टेप रखती है. उसकी आदत होती है थोड़े-थोड़े दिनों पर अपनी बॉडी को नापने की. जांघों पर सेंटीमीटर भी ज्यादा चर्बी आ गई तो मानों उसके जीवन में ज़लज़ला आ जाएगा. शो की सेटिंग लगभग 60 साल पहले की है. मगर 'परफेक्ट बॉडी' के पीछे की ये दीवानगी आज भी जीवित है.

और दिखती है हमारे मैनेक्विन्स में. मैनेक्विन यानी वो पुतले जो डिस्प्ले के लिए लागाए जाते हैं. जैसे कपड़ों या एक्सेस्जरीज की दुकानों पर.

इन पुतलों को कभी ध्यान से देखिए. छरहरा शरीर, भरे हुए स्तन, पतली कमर. और अब सोचिए कि क्या आपका शरीर ऐसा है. मुमकिन है हो भी. मगर आपके चारों ओर जो भी महिलाएं हैं, क्या वो इस बॉडी टाइप की हैं. क्या उनकी कमर उतनी ही पतली है.

mrs-maisel_073119054420.jpg'मार्वेलस मिसेज मेजल्स' का वो दृश्य जिसमें मिज (नायिका) अपनी बॉडी का हर हिस्सा नापती है.

कस्टम मेड लड़कियां

अक्सर हम घर में इंटीरियर का काम करवाते हैं तो अपनी मर्जी के हिसाब से चीजें डिज़ाइन करते हैं. सोफ़े, बेड, डाइनिंग टेबल खरीदने के बजाय अपने हिसाब से बनवाते हैं. क्योंकि हम चाहते हैं कि हम जो वस्तु घर ला रहे हैं, वो हमारी आंखों को सुकून दे. हम चाहते हैं ऐसी ही वस्तु लड़की भी हो. जिसे उस हिसाब से ढाला जा सके, जिस तरह वो हमें भाती रहे.

'हमें' का अर्थ केवल पुरुषों से नहीं है. 'हम', यानी एक समाज के तौर पर हम सभी, औरतों को एक बॉडी टाइप में देखना चाहते हैं. ये बॉडी टाइप ही एक दिए हुए समय पर खूबसूरती का मानक बन जाते हैं. एक समय ऐसा था कि श्रीदेवी की मांसल जांघों में सेक्स अपील दिखती थी. और आज की तारीख में दीपिका पादुकोण की लकड़ीनुमा टांगों को खूबसूरत माना जाता है. आप खुद सोचें, नोरा फतेही के इस दौर में क्या आज थुलथुल जांघों वाली लड़की को आइटम सॉन्ग में देखना पसंद करेंगे?

deepika-sridevi_073119055805.jpgऔरतें वही हैं, मगर सुंदरता की परिभाषा बदलती रहती है. औरतों पर प्रेशर है कि बदलती परिभाषाओं के साथ वे भी बदलें.

एक पुरुषवादी बाज़ार है, हो हमारे लिए सुंदरता क्या है, ये तय करता है. और हम मानते जाते हैं. पुरुषवादी बाज़ार का मतलब ये नहीं कि यहां सब पुरुषों के लिए बनता है. बल्कि ये है कि पुरुषों को क्या सूट करेगा. अगर उन्हें गोरी लड़कियां पसंद हैं तो लड़कियों को फेयरनेस क्रीम बेची जाएगी. अगर उन्हें चिकने हाथ-पांव पसंद हैं तो लड़कियों को शरीर के बाल हटाने वाली क्रीम बेची जाएगी. अगर उन्हें टाइट योनियां पसंद हैं तो वजाइनल टाइटनिंग क्रीम बेची जाएगी.

चूंकि खूबसूरती के मानकों में फिट होना, किसी भी लड़की के लिए समाज में फिट होने का सबसे आसान तरीका है, वो इन प्रोडक्ट्स को लेना चाहती हैं. कौन सी लड़की अपनी मर्ज़ी से काली या मोटी दिखना चाहती है? कौन सी लड़की काली और मोटी होना चाहेगी, जब उसे मालूम है कि नायक जिस नायिका से बेतहाशा प्यार करता है, वो हमेशा गोरी और दुबली होती है.

हर वक़्त, हर क्षण, औरतों के शरीर को कस्टम मेड तरीके से बनाया जाता है. जैसे ऑर्डर पर कपड़े बनवाए जाते हैं.

फैशन इंडस्ट्री

तमाम ब्रांड्स हमारे लिए हमारी कमर का साइज़ तय कर देते हैं. फैशन इंडस्ट्री के हाथों में हमारे शरीर की कमान है. इसलिए आप नहीं, वो तय करते हैं कि आपका शरीर स्मॉल है, मीडियम है, लार्ज है, या एक्स्ट्रा लार्ज है. या आप प्लस साइज़ हैं और नतीजतन मजाक और सहानुभूति का पात्र बनने की केटेगरी में आ चुकी हैं.

अगर उन्हें लगता है कि 28 कमर वाली लड़कियां मीडियम हैं. तो 28 इंच से ज्यादा की कमर वाली लड़की अपने आप मोटी हो जाती है.

हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक़ मैनेक्विन को मीडियम साइज़ पहनाए जाते हैं. अखबार से बात करते हुए एक मैनेक्विन के व्यापारी बताते हैं कि उन्हें गारमेंट कंपनियों से निर्देश आते हैं कि लड़कियों के मैनेक्विन दीपिका पादुकोण की तरह बनने चाहिए. लड़कों के मैनेक्विन बाहुबली जैसे बनाने के निर्देश दिए जाते हैं.

manequinn-2_073119054535.jpgडिस्प्ले में लगे ये कपड़े या तो हमें पूरी तरह हताश कर सकते हैं कि हम परफेक्ट नहीं हैं. या हमें असुरक्षा का भाव दे सकते हैं, ये सोचने पर मजबूर कर सकते हैं कि क्या यही शरीर परफेक्ट हैं, जो हमें दिख रहे हैं. 

मगर दीपिका और प्रभाष के बॉडी स्ट्रक्चर वाले ये मैनेक्विन दीपिका या प्रभाष के कपड़े नहीं, आम लड़के-लड़कियों के लिए कपड़े डिस्प्ले करते हैं. वो लड़के-लड़कियां जो न दीपिका, न प्रभाष की तरह दिखते हैं. डिस्प्ले में लगे ये कपड़े या तो हमें पूरी तरह हताश कर सकते हैं कि हम परफेक्ट नहीं हैं. या हमें असुरक्षा का भाव दे सकते हैं, ये सोचने पर मजबूर कर सकते हैं कि क्या यही शरीर परफेक्ट हैं, जो हमें दिख रहे हैं. हमें कॉन्फिडेंस इशूज दे सकते हैं.

जो मैनेक्विन हमारे कपड़े पहनते हैं, वो हमारे जैसे हैं ही नहीं. मैनेक्विन की भूमिका महज कपड़े डिस्प्ले करना नहीं रह जाता. क्योंकि वो तो हैंगर भी कर सकते हैं. मैनेक्विन एक बॉडी टाइप बन जाते हैं, जो मिडिल क्लास पाना चाहता है. किसी एथनिक वियर की दुकान में जाने वाली वो लड़की जिसकी शादी होने वाली, ठीक वैसी ही दिखना चाहती है जैसे बेहद सुंदर लहंगा पहनी हुई मैनेक्विन है. मुमकिन है कि आने वाले तीन महीनों के लिए वो खाना छोड़ दे ताकि स्टेज पर वो 'परफेक्ट' दिख सके.

पुतले और कल्पना

लड़कियों के मैनेक्विन के पास पतली कमर हो, भरे हुए स्तन हों, ये सिर्फ इसलिए जरूरी नहीं कि लड़कियां उस बॉडी को पाने के सपने देखें. मैनेक्विन पुरुषों को भाएं ये भी जरूरी है. हिंदुस्तान टाइम्स में छपी रिपोर्ट के मुताबिक़ जो पुतले पहले 36-30-39 के साइज़ में बनते थे, अब 34-28-26 के साइज़ में बनने लगे हैं. पतली कमर और छोटे कूल्हों की और शिफ्ट होता फैशन न सिर्फ असल भारतीय औरतों से दूर है, बल्कि नस्लभेदी है. क्योंकि भारतीय औरतें ऐसी नहीं होतीं.

mannequin-1_073119054609.jpgकुछ साल पहले मुंबई नगर निगम ने लड़कियों के अंतर्वस्त्र डिस्प्ले करने वाले मैनेक्विन बैन कर दिए थे.

कुछ साल पहले मुंबई नगर निगम ने लड़कियों के अंतर्वस्त्र डिस्प्ले करने वाले मैनेक्विन बैन कर दिए थे. उनका कहना था कि लड़कियों को बिकिनी या ब्रा-पैंटीज़ में देखकर उनके अंदर रेप करने की इच्छा जागती है. ये फैसला इस बात का सबूत तो है ही, कि रेप की जिम्मेदारी हम पुरुषों के अलावा हर दूसरी चीज पर डालने के लिए तैयार हैं. साथ ही इस बात का भी प्रमाण है कि औरत के शरीर को सेक्शुअलाइज करने का एक भी मौका हम नहीं छोड़ते. चाहे वो पुतला ही क्यों न हो.

 

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