मां बनने की सज़ा भोगतीं सुष्मिता मिश्रा: प्रेगनेंट हुईं तो कहा, 'रिजाइन करो, अब तुम्हारी जरूरत नहीं'

दिन-रात औरत पर मां बनने का दबाव बनाने वाला समाज, मैटरनिटी लीव के नाम से डरता क्यों है?

प्रेरणा प्रथम प्रेरणा प्रथम
दिसंबर 31, 2018

गाज़ियाबाद दिल्ली NCR में आता है. मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट और इंजीनियरिंग कॉलेज काफी हैं वहां. प्राइवेट हैं अधिकतर. वही कॉलेज जहां IIT और NIT के सपनों वाले लोग आकर फ्यूचर बनाने की कोशिश करते हैं. कोशिश कि पढ़ाई हो जाए, तो नौकरी लग जाए. नौकरी लग जाए तो लाइफ थोड़ी सेट हो. इनको पढ़ाने वाले भी सोचते हैं, नौकरी में अगर अच्छा परफॉर्म किया, तो शायद चिंता करने की ज़रूरत नहीं होगी.

सुष्मिता मिश्रा ने भी यही सोचा था. जब इस साल जनवरी में संस्कार कॉलेज ऑफ फार्मेसी एंड रीसर्च में असिस्टेंट प्रफ़ेसर के तौर पर नौकरी शुरू की थी. सब कुछ ठीक चल रहा था. फिर इस साल के अंत में इंस्टिट्यूट की तरफ से ये कहा गया कि जो लोग भी मैटरनिटी लीव लेना चाहते हैं, वो मैनेजमेंट को एडवांस में बता दें ताकि लीव मैनेज की जा सके. सुष्मिता ने बता दिया कि एप्रिल 2019 से उन्हें मैटरनिटी लीव चाहिए होगी. Sanskar College of Pharmacy and Research कॉलेज Sanskar Educational Group के तहत आता है. पहले इस ग्रुप का नाम Shri Ganpati Institute of Technology था.

seg_750x500_123118030754.jpgइंस्टिट्यूट के ऊपर आरोप लगे हैं भेदभाव के. तस्वीर: कॉलेज की वेबसाइट

इसके बाद सुष्मिता ने जो बताया वो हम आपके सामने रख रहे हैं:

‘जब मैंने बताया कि मुझे एप्रिल से मैटरनिटी लीव चाहिए होगी, तब इन लोगों ने मुझ पर नौकरी छोड़ने का दबाव बनाना शुरू कर दिया. मुझे बार-बार कहा गया कि मैं खुद रिजाइन कर दूं. अभी विंटर वेकेशन चल रही है. मैंने कहा मार्च तक मैं पढ़ा सकती हूं, उसके बाद नहीं पढ़ा पाउंगी. उसके बाद मुझे लीव चाहिए होगी. उन लोगों ने कहा कि आप सेमेस्टर के बीच में छोड़ कर कैसे जा सकती हैं. मैंने कहा कि मैं सिलेबस कम्प्लीट करा दूंगी. उन्होंने कहा कि ऐसा वो नहीं करने देंगे. इसके बाद उन्होंने मुझे मेल भेज कर कह दिया कि मेरी सर्विसेज की अब उनको ज़रूरत नहीं है. उन्होंने मुझे नोटिस पीरियड भी नहीं दिया, सीधे आने से मना कर दिया.’

untitled-1_750x500_123118030849.jpgउन्हें ये मेल भेजी गई.

आगे बढ़ने से पहले जान लें कि मैटरनिटी लीव में प्रावधान क्या है, मतलब कितनी छुट्टी मिलती है.

2017 में मैटरनिटी बेनिफिट अमेंडमेंट एक्ट पास हुआ था. इसमें पहले जो तीन महीने की छुट्टी मिलती थी नई मां को, वो अब 26 हफ्ते यानी साढ़े छह महीने की कर दी गई. ये पेड होती है, यानी इसमें आपकी सैलरी बंद नहीं होती.

इस मामले में जानकारी के लिए जब संस्कार कॉलेज ऑफ फार्मेसी में कांटेक्ट किया गया तो हमारी बात उनके मीडिया अफेयर्स देखने वाले मुन्ना मिश्रा से हुई. वो कॉलेज में अंग्रेजी के प्रफेसर हैं, मीडिया काम काम उनको एडिशनल असाइन्मेंट के तौर पर दिया गया है ऐसा उन्होंने हमें बताया. उनके मुताबिक़,

‘हमने एम्प्लोई को इसलिए रिलीव नहीं किया क्योंकि वो प्रेग्नेंट हैं. हम उन्हें कंटीन्यू करते, चाहे वो प्रेग्नेंट हों या न हों. लेकिन हमारी प्रायोरिटी स्टूडेंट्स हैं. हमें फीडबैक आया था कि स्टूडेंट्स उनसे खुश नहीं हैं. हमने उन्हें रिजाइन करने के लिए इसलिए कहा ताकि उनको टर्मिनेट ना करना पड़े. इस तरह वो दूसरी नौकरी भी आराम से ढूंढ सकती थीं. वो महिला हैं, संयोग से अभी प्रेग्नेंट भी हैं इसलिए इसे भावनात्मक इशू बना रही हैं. उनके सर्विस अग्रीमेंट में लिखा था कि एक साल के प्रोबेशन में उनको हटाया जा सकता है. वो प्रोबेशन पर थीं. कॉलेज को परफॉरमेंस से इशू था’.*

जब मुन्ना मिश्रा से पूछा गया कि इस ‘फीडबैक’ को लेकर कोई प्रूफ है कि आपने स्टूडेंट्स से पूछा इनके बारे में. मुन्ना मिश्रा ने कहा कि ऐसा कोई रिटेन फीडबैक नहीं होता. बस पूछते रहा जाता है स्टूडेंट्स से. उन्होंने कहा कि चूंकि वो प्रेग्नेंट हैं, इसलिए सुष्मिता इस बात का फायदा उठाना चाह रही हैं.

sushmita_750x500_123118031019.jpgसुष्मिता के ऊपर कॉलेज ने जब इस तरह के आरोप लगाए तो हमने सीधे स्टूडेंट्स से बात की.

हमने उनके स्टूडेंट्स से बात की. वो स्टूडेंट्स जिनको सुष्मिता ने पढ़ाया था. (यहां पहचान छुपाने के लिए नाम बदल दिए गए हैं)

राहुल* ने बताया,

‘सुष्मिता मैम समय से पहले सिलेबस खत्म करवा देती हैं, और बहुत अच्छे से पढ़ाती हैं. उनको लेकर किसी स्टूडेंट को कोई दिक्क्कत नहीं थी’.

राहुल ने ही हमें बताया कि स्टूडेंट्स की लॉग इन आईडी होती है, जससे वेबसाइट पर वो अपने टीचर्स का फीडबैक दे सकते हैं. ये रिटेन होता है.

अस्मिता* ने बताया

‘ सुष्मिता मैम बहुत अच्छा पढ़ाती हैं. कोई दिक्कत होती है तो समझा देती हैं. बहुत फ्रेंडली और स्वीट हैं.’

देबोलीना* ने बताया,

‘मैं अपने और अपने ग्रुप की लड़कियों के बारे में तो गारंटी से कह सकती हूं कि हमारे लिए सुष्मिता मैम सही टीचर थीं. हमें उनसे कभी कोई दिक्कत नहीं हुई. किसी और ने कम्प्लेन की हो तो उसका कुछ नहीं कह सकती लेकिन हमारी तरफ से ऐसी कोई बात नहीं हुई’.

जब स्टूडेंट्स के फीडबैक के साथ दुबारा कॉलेज प्रशासन से बात की गई तो प्रफेसर मुन्ना मिश्रा ने कहा

‘रिटेन फीडबैक वाला पोर्टल तो अभी नया नया आया है. इसके आने के बाद से तो एग्जाम ही शुरू हो गए थे बच्चों के. हमारी तरफ से जो बात कहनी थी हमने कह दी. आप इसे जैसे लिखना चाहें, आपके विवेक पर निर्भर है’.

इस खबर में आगे क्या होता है, उसे लेकर हम आपको अपडेट करते रहेंगे. सुष्मिता इस मामले में कानूनी सहायता लेने की सोच रही हैं.

 

* इस आर्टिकल में प्रोबेशन की बात एड की गई है हमारे फॉलो अप के बाद. इस पूरे मामले में प्रोबेशन पीरियड में निकालना मसला नहीं था, मसला निकाले जाने के पीछे की वजह का था. लेकिन फॉलो अप के बाद इसे मेंशन कर दिया गया है.

 

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