'मां, तुम मुझसे पहले शादी कर लो, फिर मैं भी कर लूंगी, पक्का'

'पक्की सहेलियां एक दूसरे की बात मानती हैं, लेकिन तुम नहीं मानती.'

नेहा कश्यप नेहा कश्यप
अप्रैल 08, 2019

मां,

जिंदगी ज्यादा खूबसूरत और आसान हो जाती है, अगर कोई साथी हो तो. जब भी मैं शादी करने से मना करती हूं तो तुम यही तो कहती हो न. वैसे सच कहती हो. तुमसे ज्यादा इस बात को कौन समझेगा. कि बिना साथी के जिंदगी कैसी हो जाती है. सालों पहले पापा छोड़कर गए थे. मैं आठ-नौ साल की रही हूंगी न.

हमें बचपन की याद इसीलिए जिंदगी भर सताती है, क्योंकि तब किसी चीज की फ़िक्र नहीं होती. आसपास क्या चल रहा है. क्या टूट रहा है, क्या बिखर रहा है. कुछ समझ नहीं आता. लेकिन काश में कभी बच्ची नहीं होती. तुम्हारे साथ खड़ी रहती. तुमने कितना कुछ अकेले सहा है. बिल्कुल अकेले.

मुझे तुमसे कुछ पूछना है औऱ कहना भी है. पापा के जाने के बाद तुमने मेरी और भाई की परवरिश में खुद को क्यों झोंक दिया. खुद के बारे में कभी क्यों नहीं सोचा. आज जो बात मुझसे कहती हो. तब खुद क्यों नहीं सोची. जिंदगी अकेले गुजार लेने का फैसला किस हक से ले लिया. आज भी उसी पर कायम हो.

मुझे याद है तुम्हारा वो चेहरा. जो हंसना भूल गया था. पापा के जाने के बाद. मुझे याद है कैसे में बाहर से खेलकर आती थी और तुमको अकेले में रोते देखकर तुम्हारे गले से लटक जाती थी. कुछ समझ नहीं आता था लेकिन बस तुमको रोते देखना अच्छा नहीं लगता था. तुम धीरे से आंसू पोंछ लेती थीं. मुझे बहुत दुख है कि मैं कभी बच्ची थी. तुम्हारा रोना, अकेलापन नहीं समझ पाती थी.

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समय और हमारी जिंदगियां धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगीं. मैं टीन एज में आई तो तुम मेरी सबसे अच्छी दोस्त बन गईं. हम बातें करते थे. खूब सारी. जैसे दो टीन एज लड़कियां करती हैं. आज समझ आता है कि तुम सिर्फ पापा ही नहीं, दोस्त, सहेली, बहन वाला हर रिश्ता निभाने में जुटी थीं.

पार्क में, बाजार में जब किन्हीं अंकल-आंटी को साथ में देखती हूं, तो ठिठक जाती हूं. सोचने लगती हूं कि काश तुम भी ऐसे ही घूमो. उससे खूब बातें करो. अपने सारे सुख-दुख बांटों. मैं औऱ भाई आगे अपनी जिंदगियों में और भी ज्यादा बिजी हो जाएंगे.

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याद है, मैंने अखबार में एक विज्ञापन देखा था. शादी का. एक अंकल थे, जो साथी ढूंढ रहे थे. मैंने कहा कि बात करूं, तो तुमने हंसकर टाल दिया. कहा पागलपन मत करो. मां मैं सीरियस थी. आज भी हूं. किसी की याद में जिंदगी काट देना कतई महानता का काम नहीं है. आगे बढ़ो. जिंदगी बहुत बड़ी है. इसे अकेले क्यों बिताना चाहती हो.

जिंदगी में सबसे कष्ट देने वाली चीज अकेलापन है. मैं तुमसे बहुत दूर हूं. हर रोज खुद से लड़ती हूं. कि तुम्हारे अकेलेपन के लिए मैं कुछ नहीं कर सकी. अब भी नहीं कर पा रही हूं. मैं जानती हूं कि मैं औऱ भाई तुम्हारे लिए सबकुछ हैं. और किसी की जरूरत नहीं. लेकिन तुम ही तो कहती हो कि साथी की कमी कोई पूरी नहीं कर सकता. फिर क्यों. मैं चाहती हूं कि तुम शादी कर लो. मुझसे पहले. फिर मैं भी कर लूंगी. पक्का.

 

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