पैरों में पस पड़ गया था, आंखें जल गई थीं, मगर प्यार जिंदा था

सरवत फ़ातिमा सरवत फ़ातिमा अप्रैल 30, 2018
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वो अस्पताल का बिस्तर था, जहां प्रमोदिनी की मुलाकात उससे हुई, जो उसका जीवनसाथी बनने वाला था. सरोज, प्रमोदिनी की नर्स का दोस्त था. और यूं ही अस्पताल गया था. उसे प्रमोदिनी की मां रोती हुई मिलीं. उसके बाद वो प्रमोदिनी से मिला. और मुलाकातों का सिलसिला प्रेम में बदल गया. 

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