सुचेता कृपलानी, जो आज़ाद भारत की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं

उनका और मायावती का एक बहुत ख़ास कनेक्शन है.

आप पढ़ रहे हैं हमारी स्पेशल सीरीज- वीरांगना. ये सीरीज हम ख़ास तौर पर लेकर आए हैं भारत की आज़ादी का 71वां साल पूरा होने  पर. इस सीरीज में हम उन सभी औरतों और लड़कियों के बारे में बताएंगे जिन्होंने भारत की आज़ादी में कभी न भुलाया जा सकने वाला किरदार निभाया. 1 अगस्त से लेकर 15 अगस्त तक चलने वाली हमारी ये सीरीज उन सभी कहानियों से आपको रू-ब-रू कराएगी जो हमें अक्सर किताबों में पढ़ने को नहीं मिलीं. वीरांगना सीरीज में आज जानिए सुचेता कृपलानी के बारे में.

सुचेता मजूमदार बंगाली परिवार में जन्मी थीं. दिल्ली के इन्द्रप्रस्थ कॉलेज से ग्रेजुएशन की, फिर बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी में पढ़ाने चली गईं. वहीं पर आचार्य जे बी कृपलानी आज़ादी की लड़ाई के लिए वालंटियर्स ढूंढने आए थे. वहीं पर दोनों की मुलाकात हुई. साथ काम करते करते प्रेम हुआ और दोनों ने शादी करने का मन बना लिया.

दोनों के परिवारवाले इस रिश्ते के सख्त खिलाफ थे. क्योंकि कृपलानी सुचेता से 20 साल बड़े थे. गांधी जी भी इस रिश्ते के खिलाफ थे. उनको लगता था कि शादी के बाद वो कृपलानी को खो देंगे. लेकिन सुचेता ने उनसे कहा कि ऐसा कुछ नहीं होगा. उल्टे गांधी जी को कृपलानी के साथ सुचेता भी मिल जाएंगी.

कृपलानी महात्मा गांधी के बहुत करीबी शिष्य थे. फोटो: ट्विटर कृपलानी महात्मा गांधी के बहुत करीबी शिष्य थे. फोटो: ट्विटर

सुचेता ने भारत छोड़ो आन्दोलन में हिस्सा लिया. ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की स्थापना की. 1942 में जब महात्मा गांधी पुणे में अनशन कर रहे थे, उस समय कांग्रेस के सभी बड़े नेताओं के लिए अरेस्ट वारंट जारी हो चुके थे. सुचेता का नाम भी उनमें से था. लेकिन अनशन करते हुए महात्मा गांधी की तबियत बिगड़ने लगी थी. सुचेता अंडरग्राउंड थीं, लेकिन उन्होंने होम सेक्रेटरी से गुज़ारिश की कि वो एक बार गांधी जी से मिलना चाहती हैं. भले ही उनसे मिलने के बाद उनको अरेस्ट कर लिया जाए. वो खुद ही गिरफ्तारी दे देंगी. होम सेक्रेटरी ने गवर्नर से बात की, उन्हें गांधी जी से मिलने दिया गया. यही नहीं, उनको चेतावनी देकर मुंबई छोड़ने की बात कही गई. अरेस्ट नहीं किया गया उन्हें. बंटवारे के समय होने वाले दंगों में उन्होंने गांधी जी के साथ मिलकर काफी सहायता पहुंचाई. वो गांधी जी के साथ नोआखाली भी गई थीं 1946 में.

इलियानोर रूजवेल्ट और दूसरी महिला लीडरों के साथ सुचेता कृपलानी. फोटो: Getty Images इलियानोर रूजवेल्ट और दूसरी महिला लीडरों के साथ सुचेता कृपलानी. फोटो: Getty Images

आज़ादी के बाद भी सुचेता राजनीति में सक्रिय रहीं. कांग्रेस की तरफ से. पूरे भारत में किसी भी राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड उनके नाम है. उनके पति जे बी कृपलानी किसान मजदूर प्रजा पार्टी को लीड कर रहे थे और कांग्रेस के खिलाफ थे, लेकिन ये बात कभी उन दोनों के बीच नहीं आई.  

1963 में मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने एक बहुत बड़ी हड़ताल को संभाला था. राज्य कर्मचारी वेतन बढ़ाने के नाम पर हड़ताल कर रहे थे. ये 62 दिनों तक चली थी. लेकिन सुचेता नहीं झुकीं. तब ही बात चीत शुरू हुई जब राज्य कर्मचारी समझौता करने को तैयार हुए.

सुचेता काफी धाकड़ मुख्यमंत्री मानी गईं. फोटो: विकिमीडिया सुचेता काफी धाकड़ मुख्यमंत्री मानी गईं. फोटो: विकिमीडिया

सुचेता के बाद उत्तर प्रदेश की महिला मुख्यमंत्री बनने वालीं मायावती ही रहीं.

इंटरेस्टिंग बात ये है कि उनका जन्म दिल्ली के सुचेता कृपलानी हॉस्पिटल में हुआ था.

 

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