औरतों की हत्या करने में उनके घरवाले ही सबसे आगे हैं

वो भी पढ़ें, जो कहते हैं औरतें घर पर रहें तो सुरक्षित रहेंगी.

यूनाइटेड नेशंस (यूएन-UN) का नाम अक्सर सुनते या पढ़ते रहते हैं लोग. समझते हैं कि कोई अंतरराष्ट्रीय संस्था है, समाजसेवा वगैरह जैसे काम देखती है. लेकिन सिर्फ इतना ही काम नहीं है यूएन का. यूएन कोई सरकार भी नहीं है. इसे ऐसे समझिए कि यूनाइटेड नेशंस की जगह ग्लोब में वही है जो क्लास में मॉनिटर की होती है. हालांकि ये मॉनिटर कितना इफेक्टिव है, उस पर बहस चलती रहती है. समय समय पर यूनाइटेड नेशंस दुनिया में उठ रही समस्याओं, उनके बुरे असर, उनसे निपटने के तरीके, इन सब पर भी बात करता है. स्टडी करवाता है. रीसर्च के लिए फंडिंग देता है.

ऐसी ही एक स्टडी में सामने आया है कि पूरी दुनिया में रोज़ 137 के करीब औरतें अपनी ही जानपहचान के किसी व्यक्ति द्वारा मार दी जाती हैं. यूनाइटेड नेशंस ऑफिस ऑन ड्रग्स एंड क्राइम ने इस स्टडी के रिजल्ट जारी किए हैं. ये जानकारी 25 नवम्बर को जारी की गई. इसके पीछे भी एक वजह है.

25 नवम्बर को हर साल एलिमिनेशन ऑफ वायलेंस अगेंस्ट विमेन डे मनाया जाता है. यानी महिलाओं के ऊपर होने वाली हिंसा को मिटाने का दिन. 16 दिन तक इस मसले को हाईलाईट किया जाता है. यानी 10 दिसंबर तक. यूनाइटेड नेशंस विमेन ने 25 नवम्बर के इस इवेंट में नारंगी रंग की लाइटें जलाईं और दिल्ली के यूएन हाउस को नारंगी रौशनी में नहला दिया. ये काम वो पहले भी दुनिया की अलग अलग महत्वपूर्ण इमारतों के साथ कर चुके हैं. नारंगी रंग को एकता और साहस का प्रतीक माना जाता है. इसी के तहत 'Orange The World' की मुहिम चलाई गई है यूएन की तरफ से.

un-women-750x500_112718055847.jpgतस्वीर: ट्विटर

इस पूरी मुहिम में कई तरीकों से महिलाओं पर हो रहे अत्याचार, और उनके ऊपर हो रही हिंसा को लोगों की जानकारी में लाने की कोशिश की जाती है. लोगों को जागरूक बनाने की कोशिश की जाती है. जिस स्टडी की हम यहां बात कर रहे हैं, वो स्टडी बताती है कि हत्या के मामलों में अधिकतर मरने वाली औरतें अपने करीबी लोगों की शिकार होती हैं.

जो डेटा इकट्ठा हुआ है, वो ये बताता है कि इरादतन हत्या के मामलों में पुरुषों की संख्या ज्यादा ज़रूर है. लेकिनं रेशियो (अनुपात) के हिसाब से देखें तो पाएंगे कि ज़्यादातर महिलाओं के केस में मारने वाले लोग उनके करीबी (नजदीकी परिवार या पति) थे, जबकि पुरुषों के साथ ये केस नहीं है. यही नहीं, सबसे ज्यादा खतरा इस मामले में एफ्रिका की महिलाओं को है. लेकिन 2017 में एशिया में सबसे ज्यादा औरतें मारी गईं, अपने पति, प्रेमी या घरवालों द्वारा. UNODC की ये रिपोर्ट ये भी बताती है कि जो महिलाएं अपने पतियों/प्रेमियों की हत्या करती हैं, उन्होंने काफी समय तक शारीरिक हिंसा झेली होती है. यही नहीं, औरतों के ऊपर होने वाली हिंसा के अधिकतर मामले रिपोर्ट ही नहीं होते हैं.

unodc-file-750x500_112718055925.jpgयूनाइटेड नेशंस की रिपोर्ट

महिलाओं के ऊपर होने वाली हिंसा सिर्फ सेक्सुअल नहीं होती, शारीरिक, मानसिक, आर्थिक भी होती है. लेकिन ओब्जेक्टिफिकेशन के इस टाइम में शरीर से परे सोचने वाले लोग कम ही होते हैं. इसलिए बाकी तरह की हिंसा को देखने और समझ सकने वाले लोग बहुत कम होते हैं. इसी के लिए जागरूक बनाने की कोशिश यूएन में चल रही है. कितनी सफ़ल होती है, ये तो समय बताएगा.

 

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