पॉलिटिक्स से रिटायरमेंट की और बढ़ रही हैं उमा भारती, मगर जीवन है विवादों से भरा हुआ

कथा बांचने वाली युवा उमा, जो पहला चुनाव हार गई थीं.

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दिसंबर 06, 2018

बीजेपी की महिला नेताओं का जब नाम लिया जाता है, सबसे पहले सुषमा स्वराज, फिर उमा भारती का नाम आता है. पिछले कुछ समय में अब निर्मला सीतारमण का नाम भी लोगों को याद होता जा रहा है. इन दोनों के नाम लोगों को इसलिए याद हैं क्योंकि काफी समय से बीजेपी की चुनावी पॉलिटिक्स में दोनों ने ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. एक ब्रांड की तरह पार्टी का चेहरा बनने से भी इन्हें कोई दिक्कत नहीं रही. लेकिन वो कहते हैं न कि हर युग का अपना एक अंत होता है. उस अंत की कहीं न कहीं शुरुआत होती है. वैसे ही पहले सुषमा स्वराज, और अब उमा भारती ने चुनावी पॉलिटिक्स से दूरी बनाने की घोषणा कर दी है.

सुषमा स्वराज ने विदेश मंत्री के तौर पर काफी पॉपुलैरिटी कमाई.विवाद भी रहे, लेकिन इतने नहीं कि उनसे उनका पॉलिटिकल करियर डिफाइन किया जा सके. उमा भारती के मामले में ये कहना मुश्किल था. एक समय ऐसा था कि उमा भारती बीजेपी की आंखों का तारा हुआ करती थीं. शुरुआत भी दिलचस्प है. कथा बांचती थीं उमा. राजमाता विजयाराजे सिंधिया बड़ी इम्प्रेस हुईं. बीजेपी का टिकट देकर कहा चुनाव लड़ो. साल था 1984. उमा हार गईं. लेकिन पांच साल बाद जीत कर लोकसभा पहुंचीं.

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राममंदिर का मुद्दा जोर पकड़ रहा था. धीरे धीरे इस पर सुगबुगाहट तेज होती जा रही थी. उमा भारती फ्रंट पर इस आन्दोलन में बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रही थीं. इस चीज़ ने उनको संघ, विश्व हिन्दू परिषद वगैरह की आंखों में ऊपर उठा दिया था.

उमा को लेकर बीजेपी के अन्दर भी गुटबाजी हुई. जीत कर वो सीएम भी बनीं मध्य प्रदेश की. अपनी पार्टी से अलग भी हुईं. 2011 में वापस पार्टी जॉइन भी की. अभी गंगा सफाई मंत्री हैं. इनके करियर के पांच सबसे विवादास्पद क्षण ये थे:

1. 2014 में मोदी के साथ भारतीय जनता पार्टी की पूरी मशीनरी चुनाव ने खुद को लोकसभा चुनाव में खुद को झोंक रखा था. तब उमा भारती ने कहा, मोदी अच्छे वक्ता नहीं हैं. लोग उनको सुनने नहीं आते, सिर्फ सपोर्ट दिखाने आते हैं. उमा ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी अच्छे वक्ता थे. नरेंद्र मोदी नहीं.

2. अपनी ही पार्टी के सीनियर लीडर के एन गोविन्दाचार्य के लिए उमा ने अपनी पसंद जाहिर की थी. द वीक को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि वो गोविन्दाचार्य से शादी करना चाहती थीं. 2004 में एक इवेंट के दौरान उमा ने सबके सामने बताया कि गोविन्दाचार्य उनसे शादी करना चाहते थे. लेकिन उमा के भाई नहीं माने. ये बात उमा ने जब बताई, गोविन्दाचार्य उस वक़्त स्टेज पर ही बैठे थे. 

uma-3_750x500_120618023451.jpgतस्वीर: ट्विटर

3. 2004 में ही उमा भारती ने तिरंगा यात्रा निकालने की ठानी. कर्नाटक महाराष्ट्र में अच्छा रिस्पांस मिला. पार्टी वाले सोच में पड़ गए. उमा पॉपुलर हो रही थीं. उनको रोकना ज़रूरी लगा. मुंबई में यात्रा ले जाने से मना कर दिया गया. उमा ने खीज कर राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर दी. अटल बिहारी वाजपेयी ने मनाया तब जाकर मानीं.

4. पार्टी अध्यक्ष आडवाणी के साथ भी उनकी तनातनी हुई. आडवाणी ने पार्टी के अन्दर बढ़ती फूट को देखकर मीटिंग बुलाई थी. सब मौजूद थे. अडवानी ने मेल से रहने की बात कही, उमा उखड़ गईं. आडवाणी ने शांत होने को कहा तो उनको चुनौती दे कर निकल गईं. पार्टी से निकाल भी दी गईं. नई पार्टी बनाई. भारतीय जनशक्ति पार्टी के नाम से. कुछ ना होना जाना था, ना कुछ हुआ.

uma-adv_750x500_120618023524.jpgतस्वीर: ट्विटर

5. 2014 में उमा भारती अपनी लोध जाती के समाज में लोकसभा चुनाव जीतीं, और गंगा सफाई मंत्री बनीं. अभी गंगा में कूदकर जान देने की बात किया करती हैं. गंगा साफ़ हो रही है. अच्छे दिन आ रहे हैं.

 

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