'2.0' ट्रेलर रिव्यू: अक्षय-रजनीकांत के भारी भरकम लुक ने फिल्म की ये बड़ी बात छिपा दी

पता चल गया, कि आखिर '2.0' में एमी जैक्सन को क्यों लिया गया?

लालिमा लालिमा
नवंबर 03, 2018
फिल्म '2.0' का ट्रेलर आ गया है. फोटो- वीडियो स्क्रीनशॉट

फिल्म '2.0' का ट्रेलर आ गया है- हिंदी और तमिल, दोनों भाषा में. ग्राफिक्स का जबरदस्त इस्तेमाल दिख रहा है. एक्शन सीन्स की भरमार है. साइंस फिक्शन फिल्म है. फिल्म में अक्षय कुमार, रजनीकांत और एमी जैक्सन हैं. अक्षय विलेन बने हैं. तो रजनीकांत का डबल रोल है. एक तो डॉक्टर वसीगरन और दूसरा रोबोट 'चिट्टी'. एमी भो रोबोट बनी हैं.

rewrert_110318035021.jpgफोटो- वीडियो स्क्रीनशॉट

'2.0' साल 2010 में आई फिल्म एंथीरन यानी रोबोट का ही सीक्वल है. लोगों ने इसे काफी पसंद किया था, शायद इसलिए इसका दूसरा भाग बनाने का फैसला किया गया. '2.0' में चिट्टी के लुक को थोड़ा अपग्रेड कर दिया है. और इसमें ऐश्वर्या राय नहीं हैं, एंथीरन में थीं. फिल्म 29 नवंबर को रिलीज हो रही है. कहा जा रहा है कि '2.0' को बनाने में 500 करोड़ रुपए लगे हैं. फिल्म के डायरेक्टर हैं एस शंकर. एंथीरन भी इन्होंने ही डायरेक्ट की थी. फिल्म के बारे में आगे कुछ जानने से पहले एक बार ट्रेलर देख लीजिए-

एस शंकर, साउथ के बड़े डायरेक्टर हैं. फिल्में डायरेक्ट भी करते हैं और उसकी कहानी भी लिखते हैं. '2.0' की कहानी भी एस शंकर ने लिखी, राइटर बी जयमोहन के साथ मिलकर. जयमोहन तमिल और मलयालम भाषा के लेखक हैं.

joijio_110318035042.jpgफोटो- वीडियो स्क्रीनशॉट

ट्रेलर को देखकर जो स्टोरी हमारी समझ में आई है, वो ये है कि अक्षय विलेन हैं. वो स्मार्टफोन्स को लोगों से छीनते हैं. अपने शरीर में पहनते हैं. दुनिया में तबाही मचाते हैं. रजनीकांत यानी डॉक्टर वसीगरन, अक्षय से लड़ने के लिए चिट्टी को भेजते हैं. दोनों के बीच धमाकेदार लड़ाई होती है. भारतीय वायु सेना भी लड़ने आती है. आखिर में क्या हुआ, ये तो नहीं दिखाया गया. लेकिन हर फिल्म की तरह जीत तो हीरो की ही होगी. यानी उम्मीद करते हैं कि अक्षय के आतंक को रजनीकांत रोकने में सफल होते होंगे.

gfdsgfdgfdg_110318035059.jpgफोटो- वीडियो स्क्रीनशॉट

फिल्म के ट्रेलर में कुछ ऐसा भी है, जिसपर आपका ध्यान नहीं गया होगा. क्योंकि वो बारीक सा प्वाइंट रजनीकांत और अक्षय कुमार के भारी भरकम लुक के सामने कहीं छिप सा गया. वो प्वाइंट है एमी जैक्सन की मौजूदगी. 2 मिनट 6 सेकेंड के ट्रेलर में एमी मुश्किल से 2 या 3 सेकेंड के लिए ही दिखीं. और वो भी केवल उनकी झलक दिखी. आवाज तो सुनाई ही नहीं दी, क्योंकि ट्रेलर में वो जहां भी दिखीं, चुप खड़ी रहीं.

capture-1_110318035111.jpgफोटो- वीडियो स्क्रीनशॉट

साउथ फिल्म इंडस्ट्री की ज्यादातर फिल्में, या इक्का-दुक्का फिल्मों को छोड़कर आप पूरी फिल्में कह सकते हैं. सभी मर्दों को केंद्र में रखकर ही बनती हैं. इन फिल्मों में हिरोइन तो होती हैं, लेकिन कभी स्ट्रॉन्ग किरदार के साथ नहीं, बल्कि छुई-मुई लड़की की तरह उन्हें पेश किया जाता है. उनका रोल भी ज्यादातर फिल्मों में केवल हीरो की प्रेमिका तक ही सीमित रहता है. वो हीरो की तरह एक्शन करते नहीं दिखतीं, गुंडों से लड़ते नहीं दिखतीं, कड़े फैसले लेते नहीं दिखतीं.

gfdsgfdggf_110318035144.jpgफोटो- वीडियो स्क्रीनशॉट

वो दिखती हैं तो केवल गुंडों की चपेट में, जिनसे छुड़ाने के लिए हीरो आता है, मारधाड़ करता है और बचा ले जाता है. वो दिखती हैं तो अमीर बाप की नकचढ़ी बेटी के रूप में, जिसे आखिर में हीरो ही सुधारता है, उसके सामने गरीबों की सेवा करके या गुंडों से मारपीट करके. फिल्मों में दिखाया जाता है कि मर्द गुंडों को पीटता है, उनसे पिटता है, तभी समाज सुधरता है. जैसे बातचीत से तो किसी प्रॉब्लम को सॉल्व ही नहीं कर सकते. हिरोइन मर्दों के पीछे चलती हैं.

hdgfdzfdgfdg_110318035156.jpgफोटो- वीडियो स्क्रीनशॉट

हम ये कतई नहीं कह रहे कि हिंदी फिल्मों में हिरोइनों को बड़ा भारी रोल मिल रहा है, या उनकी मौजूदगी मर्दों के बराबर है. यहां भी हालात कुछ ज्यादा अच्छे नहीं हैं. हाल ही में 'ठग्स ऑफ हिंदोस्तान' का ट्रेलर रिलीज हुआ था, जिसमें न तो कैटरीना कैफ का कोई डायलॉग था और न ही फातिमा सना शेख का. लेकिन फिर भी कुछ फिल्में बन रही हैं या बन चुकी हैं, जिनमें हिरोइनों को थोड़ा स्पेस देने का कष्ट किया गया है.

फिल्म में एमी को क्यों लिया?

अब '2.0' का ट्रेलर देखकर ये भी लगा कि फिल्म में अगर एमी जैक्सन को नहीं लेते तो शायद फिल्म की कहानी में ज्यादा कोई फर्क नहीं पड़ता. तो सवाल ये है कि उन्हें लिया क्यों? उसका जवाब आपको हम बताते हैं. जवाब है- पुरुष ऑडियन्स को सिनेमाघरों तक खींचकर लाना और फिल्म की कमाई बढ़ाना.

hgfhgfhgfdhhgf_110318035228.jpgफोटो- वीडियो स्क्रीनशॉट

सुंदरता के स्टीरियोटाइप के मुताबिक एमी मर्दों की नजर में सुंदर औरत हैं. गोरी हैं, विदेशी हैं, आंखें बड़ी-बड़ी हैं, शरीर से मोटी भी नहीं हैं. इसलिए फिल्म में उन्हें लेना जरूरी था. बिजनेस के प्वाइंट से. अरे, फिल्म को कमाई भी तो करना है. और ट्रेलर में भी एमी की मुंह दिखाई करना जरूरी था, ताकि सुंदरता के तथाकथित पैमाने पर चलने वाले मर्द खींचे चले आएं. फिल्म के पहले पार्ट एंथीरन में भी ऐश्वर्या राय को लिया गया था. जबकि ऐसा नहीं था कि उनके न होने से कहानी नहीं आगे बढ़ेगी, लेकिन वही बात, पुरुष ऑडियन्स को जो सिनेमाघरों तक लाना था.

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सोचने वाली बात है कि इतना टाइम बीतने के बाद भी, औरतों के कामयाब होने के बाद भी, फिल्मों में हिरोइनों को लीड में रखकर भी बैकग्राउंड में धकेलने वाला रवैया कब तक चलेगा? ऐसी फिल्में ज्यादा क्यों नहीं बन रहीं, जिनमें हीरो और हिरोइन बराबरी में दिखें. ऐसी फिल्में, जिनमें अगर हिरोइन के अंदर कमजोरी दिखाई जा रही है, तो हीरो को भी परफेक्ट न दिखाया जाए (जो की असल में कोई मर्द या औरत नहीं होते. ऐसी फिल्में क्यों नहीं बन रहीं, जिनमें दोनों एक-दूसरे की कमजोरियों को पूरा करते हुए, आगे बढ़ें, बराबरी के साथ.

gfdsgfdsgfdg_110318035254.jpgफोटो- वीडियो स्क्रीनशॉट

 

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