स्मृति ईरानी से हर मिनिस्ट्री वापस क्यों ले ली जाती है?

लगातार उनके हाथ में आई मिनिस्ट्री का स्तर गिरता जा रहा है.

उनको I and B मिनिस्ट्री से हटा दिया गया है.

हर पांच साल में इलेक्शन होने ही हैं. 2014 में हुए थे. अब 2019 में होंगे. पिछली बार बीजेपी जीती थी. इस बार फिर से जीतने की तैयारी में है. तो खबर ये है कि 2019 के इलेक्शंस से पहले मोदी सरकार ने अपने मंत्रियों के पोर्टफोलियो में बड़ी उलटफेर की है. इसका क्या मतलब है, और क्यों इस पर बात हो रही है, आइये सब समझते हैं.

अरुण जेटली जी जो हैं, उनको फाइनेंस मिनिस्टर की जिम्मेदारियों से छुट्टी लेनी पड़ी अभी. क्योंकि किडनी का ऑपरेशन हुआ है उनका. नई किडनी लगी है. दो महीने के करीब आराम करने की ज़रुरत है. तो उनका काम अभी पीयूष गोयल देखेंगे. पीयूष गोयल के पास अभी रेलवे मिनिस्ट्री भी है.

स्मृति ईरानी, जिनके पास इनफॉर्मेशन एंड ब्रॉडकास्ट मिनिस्ट्री थी, अब उनसे वो मिनिस्ट्री वापस ले ली गई है. अब उसको राज्यवर्धन सिंह राठौर संभालेंगे. वही राज्यवर्धन सिंह राठौर जिन्होंने ओलंपिक्स में सिल्वर मैडल जीता था शूटिंग में.

क्या स्मृति इरानी अभी खाली बैठी हैं?

नहीं जी. अभी उनके पास टेक्सटाइल मिनिस्ट्री है. बोले तो कपड़े वाला मंत्रालय. लाइमलाइट में कम ही रहता है. लेकिन काम है उनके पास. बात तो ये है कि अभी कुछ दिन पहले ही स्मृति ईरानी को ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट (HRD) मिनिस्ट्री से हटाया गया था. उसके बाद I & B मिनिस्ट्री मिली थी उनको. क्या थीं ये दोनों मिनिस्ट्री? थोड़ा सा समझ लीजिये. चीज़ें थोड़ी क्लियर हो जाएंगी.

ईरानी की खुद की डिग्री पर काफी सवाल उठे थे. फोटो : इंडिया टुडे ईरानी की खुद की डिग्री पर काफी सवाल उठे थे. फोटो : इंडिया टुडे

I & B मिनिस्ट्री वो जो सरकार के लिए कम्युनिकेशन देखती है. कम्युनिकेशन बोलते तो संचार. यानी एक बात को यहां से वहां तक पहुँचाना. ये मिनिस्ट्री टीवी चैनलों और फिल्मों वगैरह पर नज़र रखती है. केंद्र में जो भी हो रहा है वो आम जनता तक पहुंचे इस बात का ध्यान रखती है. अवार्ड देती है. UPSC से सेलेक्ट हुए इंडियन इनफार्मेशन ऑफिसर्स के साथ मिलजुल कर काम करती है.

HRD मिनिस्ट्री यानी ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट मिनिस्ट्री. इंसानों को भी किसी देश का संसाधन ही माना जाता है. संसाधन बोले तो जैसे कोयला, पेट्रोल, खेत, जमीन, मिनरल, पानी वगैरह रिसोर्स होते हैं न जिनका इस्तेमाल करके कोई भी देश आगे बढ़ता है, वैसे ही इन्सान भी रिसोर्स होते हैं. देश की एसेट. उनको डेवलप करना भी एक ख़ास काम है ताकि वो और बेहतर तरीके से विकास में पार्ट लें. कमाएं धमाएं. देश की इनकम बढ़े. ये सब कुछ. तो HRD मिनिस्ट्री देश में स्कूल कॉलेजों का ध्यान रखती है. यूनिवर्सिटियों को पैसे देती है. स्कूल में पढ़ाई का कैसा लेवल है उसका ध्यान रखती है. सुनने में आसान लगता है, है नहीं.

तो ऐसा है कि स्मृति ईरानी दोनों मिनिस्ट्रीज़ में रहीं. और दोनों ही उनसे वापस ले लिए गए. इसके पीछे क्या वजह है. कुछ वजहें तो साफ़ साफ़ सामने आईं.

1.

आपने भी देखा होगा जब हैदराबाद यूनिवर्सिटी में रोहित वेमुला नाम के स्टूडेंट ने आत्महत्या की थी, उस केस में स्मृति ईरानी की काफी छीछालेदर हुई थी. पता चला था कि स्मृति ईरानी ने बंगारू लक्ष्मण, जो हैदराबाद यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर थे, से काफी बातचीत की थी रोहित के मामले को लेकर. फिर भी रोहित वेमुला के सुसाइड केस में उस नजाकत से काम नहीं लिया गया जैसा होना चाहिए था. इस वजह से सरकार पर लोगों को गुस्सा आया. स्मृति ईरानी ने संसद में हुई बहस में मायावती के सवालों के जवाब में कहा ‘यदि आप मेरे जवाबों से संतुष्ट नहीं हुईं तो मैं अपना सिर काटकर आपके चरणों में चढ़ा दूंगी’. इसे काफी गैरजिम्मेदारना माना गया. मायावती ने कहा संतुष्ट नहीं हूं जवाब से. स्मृति टाल गईं. यू टर्न मार के. बोला हिम्मत है तो आकर ले जाओ.

कई लोगों ने तो इस बात पर स्मृति को ट्वीट किया कि यहां कोई सीरियल नहीं चल रहा है. फोटो : इंडिया टुडे कई लोगों ने तो इस बात पर स्मृति को ट्वीट किया कि यहां कोई सीरियल नहीं चल रहा है. फोटो : इंडिया टुडे

2.

I & B मिनिस्ट्री में भी स्मृति ईरानी के काफी पंगे हुए. हाल में नेशनल फिल्म अवार्ड में तो सरकार की थू-थू हुई ही, जिसमें ये गड़बड़ की गई कि अवार्ड जीतने वालों में से सिर्फ 11 लोगों को राष्ट्रपति कोविंद के हाथ से अवार्ड देने की बात की गई और बाकियों को स्मृति इरानी ने अवार्ड दिए. इसको लेकर लगभग 70 लोगों ने इस अवार्ड फंक्शन का बॉयकाट किया. इसे लेकर सरकार को काफी क्रिटिसिज्म झेलना पड़ा. उससे पहले भी अंदर-अंदर काफी कुछ चल रहा था. वो भी बताते हैं आपको.

3.

प्रसार भारती का नाम सुना होगा आपने. दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो इसी के अंडर आते हैं. इसके हेड अभी सूर्य प्रकाश हैं जिनके बारे में कहा जाता है कि वो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के काफी करीबी हैं. हर साल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (IFFI ) होता है गोवा में जिसमें दूर-दूर से फिल्ममेकर आते हैं. अलग-अलग तरह की फिल्में दिखाई जाती हैं. इसको कवर करने की ज़िम्मेदारी दूरदर्शन की होती है.

1952 से शुरू हुआ ये फिल्म फेस्टिवल सरकार करवाती है. लेकिन पिछले साल स्मृति ईरानी ने इसको कवर करने की ज़िम्मेदारी एक प्राइवेट कम्पनी को दे दी जिसका नाम SOL Productions Ltd. था. ये एक निजी कम्पनी है जिसको फाज़िला अल्लाना और कामना निरूला मेंज़ेस ने शुरू किया था. इसने IFFI की लाइव कवरेज की, ओपनिंग और क्लोजिंग की भी. और I & B मिनिस्ट्री ने प्रसार भारती को कहा कि वो लगभग तीन करोड़ रुपए SOL Productions Ltd. को इस काम के लिए दे. प्रसार भारती ने साफ़ मना कर दिया. सही भी है बात. जो चीज़ दूरदर्शन कर सकता है, उसे किसी बाहर की कम्पनी को क्यों देना.

ए सूर्य प्रकाश ने इस मामले मेंझुकने से मना कर दिया. फोटो : डीडी न्यूज  ए सूर्य प्रकाश ने इस मामले मेंझुकने से मना कर दिया. फोटो : डीडी न्यूज

खबरें आईं कि प्रसार भारती के इस कदम से नाराज़ होकर स्मृति ईरानी ने दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो के लोगों की सैलरी रोक दी. फिर प्रसार भारती को वो पैसे अपने इमरजेंसी वाले फंड से निकाल कर देने पड़े. इस वजह से प्रसार भारती और केंद्र सरकार के बीच ठन गई. प्रसार भारती के साथ एक भसड़ और हो गई.

I & B मिनिस्ट्री ने दो जर्नलिस्ट्स के नाम सजेस्ट किये थे. दूरदर्शन और प्रसार भारती के टॉप एडिटोरियल यानी सम्पादकीय पोस्ट्स के लिए. द इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक़ बिजनेस टीवी इंडिया के एग्जीक्यूटिव एडिटर सिद्धार्थ ज़राबी और मेल टुडे अखबार के अभिजीत मजूमदार के अपॉइंटमेंट के लिए मिनिस्ट्री ने काफी ज्यादा सैलरी की बात की. उनको जितने पैसे देने की बात की गई उतने प्रसार भारती अफोर्ड नहीं कर सकता था.ये तो हुई एक बात.

4.

भानुमती का पिटारा खुला ही है तो पढ़ते जाइए. बात चली है तो दूर तलक जाएगी. इंडियन इनफार्मेशन सर्विसेज (IIS) में लोग UPSC की परीक्षा देकर आते हैं. यही ऑफिसर I & B मिनिस्ट्री के साथ काम करते हैं. ‘द वायर’ में छपी खबर के मुताबिक़ जो लोग स्मृति ईरानी के साथ काम करते हैं उन्होंने ये शिकायत की कि स्मृति जिस भी ऑफिसर से नाराज़ होती हैं उसका ट्रान्सफर कर देती हैं. इस तरह का बिहेवियर उनको बहुत नागवार गुजर रहा था. तो ये हुई बात कि अन्दर ही अन्दर क्या चल रहा था. इसके ऊपर जो नेगेटिव पब्लिसिटी हो रही थी उसपर सरकार की बहुत थू-थू हो रही थी. इसी टाइम पर I & B मिनिस्ट्री ने सर्कुलर जारी कर दिया कि फेक न्यूज से लड़ने के लिए अब नए नियम-कानून बनेंगे. वो नियम-कानून ऐसे थे कि मीडिया हाउसेज ने खुलकर विद्रोह कर दिया. क्योंकि उनकी वजह से किसी भी जर्नलिस्ट की ऐसी तैसी की जा सकती थी. पीएम ऑफिस ने सर्कुलर वापस ले लिया. मुंह की खाई I & B मिनिस्ट्री ने.

ईरानी के क़दमों की ज़्यादातर आलोचना ही हुई.समर्थन काफी कम मिला.फोटो : पीटीआई ईरानी के क़दमों की ज़्यादातर आलोचना ही हुई.समर्थन काफी कम मिला.फोटो : पीटीआई

अब जब कोई मिनिस्टर बार-बार ऐसे विवाद में फंसता रहे तो सरकार के लिए प्रेस को संभालना मुश्किल होता है. लेकिन स्मृति कोई ऐसी पहली मिनिस्टर नहीं है मोदी सरकार में जिन्होंने ऐसे कदम उठाये हैं जिनकी आलोचना हुई हो. हाल में ही त्रिपुरा के चीफ मिनिस्टर बने बिप्लब देब के बयान भी काफी लाइमलाइट में रहे हैं.

लेकिन स्मृति को ही बार बार मिनिस्ट्री से क्यों हटाया जा रहा है. इसपर एक टेक ये हो सकता है कि प्रसार भारती के चीफ सूर्य प्रकाश RSS यानि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के करीबी हैं. और आरएसएस से सीधे भिड़ने का नुकसान स्मृति को भुगतना पड़ा.

सत्ता और सरकार के गलियारों में असल में क्या चल रहा होता है, ये तोकिसी भी बाहरी व्यक्ति के लिए पता कर पाना मुश्किल है. जितने लोग, उतने पक्ष. 

 

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