दक्षिण भारतीय सिनेमा और हिरोइन के पेट का दीवाना हीरो

30 साल हो गए, जाने कितनी हिरोइनों के पेट को उनसे बड़ा किरदार मिल गया.

साउथ इंडियन मूवीज. इन्हें बनाने के लिए आपके पास एक हीरो होना चाहिए. मूछों वाला हो तो ज्यादा बेहतर. अच्छी लोकेशन पर कुछ गाने. 100 के करीब बैकग्राउंड डांसर. एक गोरी स्किन वाला पेट. और एक जोड़ी जांघें.

ये कहानी बेशक हर फिल्म की नहीं है. कोई भी इंडस्ट्री सभी फ़िल्में तो खराब नहीं बना सकती. क्लासिक्स भी बनाती है. पर जिन तेलुगु, तमिल और मलयाली फिल्मों को हम 'साउथ इंडियन' पुकारते हैं, जिन्हें हम टीवी पर आए दिन, हिंदी में डब किया हुआ देखते हैं. वो ऐसी ही निकलती हैं. 

तमिल, तेलुगू, कन्नड़ और मलयाली सिनेमा में हिरोइन से ज्यादा उसका पेट और जांघों का करियर स्कोप होता है. क्योंकि इन्हें हर सीन में ठूंस दिया जाता है. कॉमेडी सीन में हीरो, हिरोइन के पेट में गुदगुदी करता है. थ्रिलर सीन में पेट को दबोचकर बचाता है. हॉरर सीन में भी कुछ ऐसा ही है.

लेकिन रोमैंस सीन में हीरो और हिरोइन की कमर की बॉन्डिंग सबसे खास होती है. पेट को चूमकर, मुंह रगड़कर, ऊंगलियां घुमाकर, चुटीं काटकर, हाथों से दबाकर- हर तरह से पेट का इस्तेमाल होते दिखता है. और हिरोइन से तो ऐसे एक्सप्रेशन निकलवाए जाते हैं कि उसे पेट छूने से सीधा ऑर्गेज्म प्राप्त हुआ है.

पेट पर ऑमलेट बनाने और लट्टू घुमाने जैसे काम भी किए गए हैं. शुरुआत लगभग 30 साल पहले आई एक फिल्म से करते हैं.

Chinna Gounder- चिन्ना गोउंडर (1991)

lattoo_750_060319070958.jpgतस्वीर : यूट्यूब

एक्ट्रेस सुकन्या और एक्टर थे विजयकांत. सीन में कुछ टीनएज लड़के हिरोइन को खदेड़ते हुए खंडहर तक ले आते हैं. जबरदस्ती लेटाकर हिरोइन के हाथ-पैर पकड़ लेते हैं. अब होती है हीरो की एंट्री. वो साड़ी का पल्लू हटाता है और हिरोइन की कमर पर लट्टू घुमाने लगता है. हिरोइन चिल्लाती है, लेकिन बैकग्राउंट म्यूजिक इतना लाउड होता है कि चिल्लाना समझ नहीं आता है. हिरोइन भागती है. उसे पकड़ने के लिए लड़के उसके पीछे भागने लगते हैं. गाना शुरू हो जाता है.

सीन विचलित करने वाला है. मगर अपेक्षित है कि दर्शक को इसमें मजा आए.

Love Birds- लव बर्ड्स (1996)

love-birds_750_060319071016.jpgतस्वीर : यूट्यूब

इस फिल्म में एक्टर प्रभुदेवा (वही जो कोरियोग्राफर भी हैं) और एक्ट्रेस नगमा थीं. हिरोइन कितनी हॉट है, ये ऑडियंस को ये कैसे पता चलेगा. डायरेक्टर ने दर्शकों को ये बताने के लिए बहुत नायाब आइडिया निकाला. हीरो, हिरोइन के पेट पर दो अंडों का ऑमलेट बनाता है. सीन 40 सेकेंड का होता है, जिसमें ऑमलेट पक भी जाता है. हैरानी की बात ये है कि इससे ज्यादा टाइम तो गैस और अवन में ऑमलेट बनाने में लगता है.

Souryam- सौर्यम (2008)

capture-missing_060319071035.jpgतस्वीर : यूट्यूब

एक सीन में हीरो-हिरोइन को कुछ लोग घेर लेते हैं. हिरोइन को बचाने के लिए हीरो उसे साइड करता है. हाथ पकड़कर नहीं बल्कि पेट को दबाकर. उसे इस सिचुएशन में भी हीरो पेट पर चूटीं काटना नहीं भूलता. क्योंकि लड़की का यौन शोषण करने का हक किसी और को कैसे हो सकता है. हीरो के होते हुए. 

मिरापेकेय- Mirapakay (2011)

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फिल्म में एक सीन है. हिरोइन स्कूटी चला रही है. हीरो पीछे बैठा है. हीरो बार-बार हिरोइन की कमर पकड़ता है. गुदगुदी करता है. गाड़ी डगमगाती है. फिल्म में हिरोइन के पास थोड़ा दिमाग होता है. वो पूछती है, 'स्कूटी पर इस तरीके से मुझे पकड़ना क्या ठीक है. अगर तुम्हें लगता है ये सही है, तो मैं तुम्हें गाड़ी से गिरा सकती हूं.' खैर, दोनों सही-सलामत घर पहुंच जाते हैं. बिना हेलमेट के. सीसी: ट्रैफिक पुलिस. 

एफ2- f2 (2019)

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तस्वीर : यूट्यूब

फिल्म में 4.32 मिनट का एक गाना है. एक्ट्रेस तमन्ना भाटिया और मेहरान पर पिक्चराइज है. गाने में फोकस हीरो के चेहरे और दोनों हिरोइन की कमर पर होता है. पूरे गाने में फोकस दोनों एक्ट्रेस के पेट पर है. गाने में वो नागिन डांस करती हैं. भांगड़ा और बैली डांस करती है. दरअसल डांस हर फॉर्म नजर आता है. लेकिन कैमरा पेट से नहीं हटता.

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फिल्म के पोस्टर भी सीन या गाने की तरह जैसे ही होती हैं.

पुरुष प्रधान इंडस्ट्री और पुरुष प्रधान इन फिल्मों में हिरोइन एक्टिंग का टेलेंट दिखाने से चूक जाती हैं. क्योंकि उनका काम एक्टिंग करना है ही नहीं. उनका काम हीरो की वस्तु होना है. असल में तो उनकी कमर, उनका पेट लीड रोल में कास्ट होता है.

 

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