कांग्रेस को खुश होने की एक वजह तो मिली, नवजोत सिंह सिद्धू बरी हो गए

नवजोत सिंह सिद्धू के खिलाफ 30 साल पुराने रोड रेज मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज.

15 मई 2018 खास दिन है. क्योंकि सुप्रीम कोर्ट नवजोत सिंह सिद्धू के खिलाफ दर्ज़ ‘रोड रेज केस’ पर फैसला आ गया है. उन्हें गैर-इरादतन हत्या के मामले में बरी कर दिया है. 

यह रोड रेज मामला था क्या?

यह मामला 30 साल पुराने उस विवाद का है, जिसमें सिद्धू पर एक वृद्ध व्यक्ति को जान से मारने का आरोप लगा. यह पूरा मामला 1988 का है. एक दिन सिद्धू पटियाला के शेरावाले गेट बाज़ार गए थे. वे अपने दोस्त रूपिंदर सिंह संधू के साथ थे. वहां स्टेट बैंक की पार्किंग में एक व्यक्ति के साथ उनकी कहा-सुनी हो गई. वह व्यक्ति थे गुरनाम सिंह. कहा-सुनी झगड़े में बदली और झगड़ा हाथापाई में. 65 साल के गुरनाम सिंह के साथ उनके भांजे भी थे. उनके भांजे ने बताया कि सिद्धू ने गुरनाम को घुटना मारकर सड़क पर गिरा दिया. इसके बाद गुरनाम को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इससे पहले ही वो दम तोड़ चुके थे. बाद में मेडिकल रिपोर्ट में गुरनाम सिंह की मौत का कारण दिल का दौरा पड़ना बताया गया.

उस ही दिन सिद्धू और उनके दोस्त के खिलाफ केस दर्ज़ हुआ. केस दर्ज़ हुआ गैर-इरादतन हत्या का. पंजाब सरकार और पीड़ित परिवार ने यह केस दर्ज़ करवाया. यह केस सेशन कोर्ट में चला. साल 1999 में सेशन कोर्ट से सिद्धू को राहत मिली. केस को डिसमिस कर दिया गया. कोर्ट ने कहा कि दोनों के खिलाफ पक्के सबूत नहीं हैं. ऐसे में सिर्फ शक के आधार पर केस जारी नहीं रख सकते. मौके पर मौजूद गुरनाम के भांजे ने सिद्धू और उनके दोस्त के खिलफ गवाही दी थी. इसके बावजूद, सिद्धू और संधू को केस से बरी कर दिया गया.

साल 2002 में राज्य सरकार ने सिद्धू के खिलाफ पंजाब हाईकोर्ट में अपील की.

नवजोत सिंह सिद्धू नवजोत सिंह सिद्धू

6 दिसम्बर 2006 को पंजाब हाईकोर्ट का फैसला आया. न्यायाधीश महताब सिंह और बलदेव सिंह की हाई कोर्ट बेंच ने सिद्धू और उनके दोस्त को दोषी माना. सिद्धू और संधू को 3-3 साल की सज़ा हुई. एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया. उन्होंने 11 जनवरी 2007 को चंडीगढ़ कोर्ट में सरेंडर किया. सरेंडर के एक ही दिन बाद 12 जनवरी को उन्हें ज़मानत मिल गई. 25 हज़ार रुपए का बॉन्ड भरा गया.

सिद्धू ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की. सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धू के पक्ष में फैसला दिया. उनकी सज़ा पर रोक लगा दी गई.

इस केस में नया मोड़ इस साल 2018 में आया. याचिकाकर्ता ने सिद्धू के खिलाफ नए सबूत पेश किए. 11 अप्रेल को याचिकाकर्ता ने कोर्ट में सिद्धू के एक टीवी इंटरव्यू की सीडी पेश की. उस सीडी में बताया गया है कि 2010 में सिद्धू ने खुद स्वीकार किया था कि उनकी ग़लती से गुरनाम सिंह की मौत हुई थी. याचिकाकर्ता ने इंटरव्यू की सीडी और यूट्यूब लिंक दोनों ही दिए हैं. साथ ही मांग की है कि इसे सबूत का हिस्सा माना जाए.

“सिद्धू के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का नहीं बल्कि हत्या का मामला होना चाहिए. क्योंकि सिद्धू को ये पता था कि वे क्या कर रहे हैं. उन्होंने जो किया समझबूझ कर किया. इस लिए उन पर हत्या का मुकदमा चलना चाहिए. अगर ये रोड रेज़ का मामला होता तो वे हिट करते और मौके से भाग जाते. लेकिन सिद्धू ने पहले उन्हें गाड़ी से निकाला, जोर का मुक्का मारा और कार की चाभी भी निकाल ली.”

याचिकाकर्ता ने कहा कि वो यह सबूत पहले कोर्ट में इसलिए जमा नहीं कर पाया क्योंकि उसे इसकी जानकारी नहीं थी. अभी इसकी जानकारी मिली है. अब कोर्ट के सामने किया है ताकि सच सामने आ सके.

नवजोत सिंह सिद्धू नवजोत सिंह सिद्धू

बीते दिन हुई सुनवाई में पंजाब सरकार ने सिद्धू का साथ नहीं दिया. उन्होंने कहा है कि पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला सही था. सरकार ने कोर्ट को बताया कि निचली अदालत का वह निष्कर्ष ग़लत था, जिसमें उन्होंने माना कि गुरनाम सिंह की मौत ब्रेन हैमरेज से नहीं बल्कि हार्ट-अटैक से हुई थी.

मगर अब अंततः 15 मई 2018 को सिद्धू को सुप्रीम कोर्ट ने गैर-इरादतन हत्या के मामले में बरी कर दिया है. उनके फ़िलहाल लड़ाई-झगड़े का दोषी पाया गया है, जिसके चलते उन्हें 1000 रूपये का जुरमाना भरना होगा.

 

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