गुरुग्राम के क्लब में पार्टी करने के लिए अब लड़कियों को शादी करनी पड़ेगी!

क्योंकि सिंगल लड़कियों का क्या भरोसा, क्या पता वे 'देह व्यापार' करती हों!

आपात प्रज्ञा आपात प्रज्ञा
जुलाई 11, 2018
महिला डीजे. और ये क्लब अकेले लड़कियों को नहीं आने दे रहे. सांकेतिक तस्वीर. फोटो क्रेडिट- Getty Images

गुरूग्राम के एमजी रोड पर कई मॉल्स हैं. इन मॉल्स में कई पब और नाइटक्लब्स हैं. इन पब्स और नाइटक्लब्स में अकेली लड़कियों के जाने पर बैन लगा दिया गया है. केवल शादीशुदा महिलाओं को क्लब में जाने की अनुमति है, वो भी केवल अपने पति के साथ. कोई लड़की अगर अपने दोस्त या पार्टनर के साथ आती है तो उसे क्लब में जाने ही नहीं दिया जा रहा है. अकेली महिलाओं के आने पर उन्हें बाहर से ही मना कर दिया जा रहा है. जो महिलाएं लड़कों के साथ आ रही हैं उनसे उनकी शादी का प्रूफ मांगा जा रहा है.

क्लब के मालिकों का कहना है कि उन्होंने यह कदम पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए उठाया है. 3 जुलाई 2018 को गुरूग्राम के कई क्लब्स पर पुलिस ने रेड की थी. पुलिस को शक था कि वहां वेश्यवृत्ति या मानव तस्करी जैसे गैर-कानूनी काम हो रहे हैं. पुलिस की रेड से बचने के लिए क्लब्स ने अकेली महिलाओं के क्लब में आने पर ही रोक लगा दी.

हिन्दुस्तान टाइम्स के अनुसार, क्लब के मालिकों का कहना है कि पुलिस ने सख्त आदेश दिया है कि कोई भी अकेली महिला क्लब में नहीं होना चाहिए. जबकि पुलिस का कहना है कि उन्होंने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया है. उन्होंने कहा कि क्लब्स में बहुत-से गैर-कानूनी काम होते हैं. ऐसे तमाम कामों के खिलाफ पुलिस सख्त कार्रवाई करेगी. हम इन जगहों को इतना सुरक्षित बनाना चाहते हैं कि यहां परिवार के लोग भी जा सकें.

क्लब मालिकों ने बताया कि 3 जुलाई की रेड के बाद असिस्टेंट पुलिस कमीश्नर ने सभी क्लब मालिकों को अपने ऑफिस बुलाया था. पुलिस ऑफिसर ने उन्हें गैर-कानूनी कामों में लिप्त होने का इल्ज़ाम लगाया था. और उन्हें वार्निंग भी दी थी. 

क्लब चेक कर रहे हैं शादी का प्रूफ. सांकेतिक तस्वीर. फोटो क्रेडिट- Getty images क्लब चेक कर रहे हैं शादी का प्रूफ. सांकेतिक तस्वीर. फोटो क्रेडिट- Getty images
   

क्लब मालिकों का डरना स्वाभाविक है. पुलिस की कार्रवाई से अक्सर लोग डर जाते हैं. लेकिन इसका मतलब ये तो नहीं कि आप महिलाओं के साथ भेदभाव करने लगें. कैसे आप यह तय कर सकते हैं कि पति के साथ आने पर महिलाएं सुरक्षित रहेंगी? एक तरफ तो महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की बात की जाती है दूसरी तरफ उन्हें अकेले आने से रोक दिया जाता है. अगर महिलाएं हमेशा पति को साथ लेकर घूमेंगी तो कैसे आत्मनिर्भर होंगी? और जिन महिलाओं की शादी नहीं हुई है या जिनके तलाक़ हो गए हैं या जिनके पति की मृत्यु हो गई है, वो महिलाएं क्या करें? उन्हें तो क्लब में जाने का अधिकार ही नहीं है. 

यहां एक बात और है. भारत में प्रोस्टिट्यूशन गैर-कानूनी है लेकिन यह बहुत बड़ी सच्चाई है कि यहां बहुत-सी महिलाएं प्रोस्टिट्यूशन में हैं. कुछ मजबूरी में तो कुछ अपनी मर्ज़ी से. कानून को मानने के लिए अगर आप उन्हें क्लब में नहीं आने देना चाहते हैं तो ठीक(कानून ही प्रोस्टिट्यूट्स के साथ भेद-भाव पूर्ण व्यवहार करता है) है लेकिन इसके लिए आप सभी महिलाओं के क्लब आने पर रोक कैसे लगा सकते हैं? समानता के अनुसार तो प्रोस्टिट्यूट्स के पास भी अधिकार होने चाहिए. पर फिलहाल भारत के कानून के हिसाब से उन्हें कोई अधिकार नहीं है.

हमने एमजी रोड स्थित कई क्लब्स को फोन किया. कई नम्बर तो ग़लत बताए जा रहे हैं. कई क्लब्स हमारा फोन नहीं उठा रहे हैं. एक क्लब ने फोन उठाया तो कहा कि आप कल फोन करिए. आज हमारे यहां कोई नहीं है. एक क्लब को फोन करने पर उन्होंने अपने मैनेजर से बात कराने की जगह एचआर से बात करवा दी. क्लब्स का सही स्टैंड क्या है यह हम नहीं कह सकते. लेकिन ऐसा कोई भी कदम जो किसी भी विशेष समुदाय के साथ भेदभाव करता है, ग़लत है.

लगता है अब क्लब जाने के लिए शादी करनी पड़ेगी. और जाने के पहले सास-ससुर का आशीर्वाद भी लेना पड़ेगा.

 

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