मिलिए मेजर प्रेरणा सिंह से, जिनका नाम जोधपुर वाले गर्व से लेते हैं

नाक की नथ या साड़ी का गुलाबी रंग देखकर इन्हें कोई आम इंसान न समझिएगा.

मेजर प्रेरणा सिंह का नाम जोधपुर वाले फ़ख्र से लेते हैं. इसलिए नहीं कि वो एक मेजर हैं. इसलिए कि जहां पर अभी भी लड़कियों को पढ़ाना मुश्किल और टेढ़ी खीर मानी जाती है, वहां से वो आर्मी में गईं. 2011 में उन्होंने आर्मी जॉइन की. 2017 में मेजर के पद पर प्रमोशन हुआ. पेशे से वकील और सोशल एक्टिविस्ट मान्धाता सिंह धमोरा से शादी हुई. चार साल की बेटी है प्रतिष्ठा. ऑडनारी ने उनसे बात की. जानने की कोशिश की कि वो अपनी कहानी सुनातीं तो कैसे सुनातीं.

फोटो: फेसबुक फोटो: फेसबुक

आज जब आप मुड़ कर देखती हैं पीछे, तो अपनी इस कहानी के बारे में सबसे अच्छी बात क्या लगती है आपको?

बहुत ही खूबसूरत था. कोई परेशानी नहीं हुई. स्कूल अच्छा था. मैं नेशनल कैडेट कॉर्प्स में भी थी. पापा बैंक ऑफ बड़ौदा में हेड कैशियर थे, सिंपल सा परिवार था. मेरे नानोसा मेरे रोल मॉडल थे. बीएसएफ (BSF – Border Security Force) में रह चुके थे, बहुत डिसिप्लिन वाले थे. उनकी वजह से यकीन हुआ कि मेरे अंदर भी ये काबिलियत है कि मैं कुछ कर सकती हूं. मेरी मां को उन पर बहुत नाज़ था, इसलिए वो भी चाहती थीं कि मैं डिफेन्स फोर्सेज में जाऊं.

प्रेरणा और उनके पति मान्धाता. फोटो: फेसबुक प्रेरणा और उनके पति मान्धाता. फोटो: फेसबुक

आपको पूरा सपोर्ट मिला घर परिवार से?

बिल्कुल. मेरे पेरेंट्स से लेकर मेरे ससुरालवालों तक, हर किसी ने मेरा साथ दिया. शुरु-शुरु में पापा थोड़े से झिझक रहे थे. नहीं भेजना चाहते थे मुझे. लेकिन भाई जब CDS (Combined Defence Services ) और SSB के एक्जाम्स दे रहा था तो मैं भी दे आई. सेकण्ड ईयर में थी मैं उस वक़्त. पहले अटेम्प्ट में क्लियर हो गया एक्जाम. कोई कोचिंग नहीं ली मैंने किसी भी एक्जाम के लिए. सही समय पर सही डिसीजन ले लिए, ये बहुत इम्पॉर्टेन्ट रहा शायद मेरी जर्नी में. अपने पेरेंट्स को कन्विंस किया मैंने, तो वो मान गए. पापा की झिझक मम्मी ने दूर कर दी. उन्होंने जब देखा कि मैं जाना चाहती हूं आर्मी में, तो उन्होंने कहा, ‘जाना चाहती हो तो ज़रूर जाओ’.

प्रेरणा और मान्धाता अपनी बेटी प्रतिष्ठा के साथ. फोटो: फेसबुक प्रेरणा और मान्धाता अपनी बेटी प्रतिष्ठा के साथ. फोटो: फेसबुक

आपकी मम्मी के अलावा आपकी लाइफ में क्या कोई ऐसी महिला है जिनको आप अपने लिए ऑडनारी मानती हैं?

मेरी स्कूल प्रिंसिपल. उन्होंने मुझमें हमेशा भरोसा दिखाया. मेरे परेंट्स को कहती थीं कि इसको बाहर पढने भेजो. मैं पढ़ाई में अच्छी थी, डिबेट वगैरह में जाती रहती थी, स्टेट लेवल तक गई थी. तब भी वो कहती थीं कि प्रेरणा तुम बहुत अच्चा करोगी लाइफ में. आज भी मुझसे टच में हैं वो. मुझे हमेशा बताती हैं, कि शी इज प्राउड ऑफ मी. मुझे बहुत सपोर्ट किया उन्होंने, काफी अच्छा रहा उनका ये सपोर्ट.

पारंपरिक राजपूती पोशाक में प्रेरणा. फोटो: फेसबुक पारंपरिक राजपूती पोशाक में प्रेरणा. फोटो: फेसबुक

घर और आर्मी की जिंदगी बैलेंस करना मुश्किल होता होगा? ये तो पुरुषों के लिए भी है. आप कैसे करती हैं?

मेरे पति बहुत सपोर्टिव हैं. आम तौर पर फौजी लोग फौजियों से ही शादी करते हैं क्योंकि वो एक-दूसरे की लाइफस्टाइल समझते हैं. ज़रूरतें समझते हैं. मेरे पति सोशल एक्टिविस्ट हैं. फिर भी जब भी मुझे ज़रूरत होती है, वो हमेशा मेरे साथ खड़े होते हैं. अपने करियर को पीछे रखकर मेरे करियर को प्रायोरिटी देते हैं. अपने इवेंट बदल देते हैं या छोड़ देते हैं ताकि मेरे इवेंट्स में मेरा साथ दे सकें. मेरी बेटी का ध्यान रखने के लिए मेरे सास-ससुर या मेरे पेरेंट्स आ जाते हैं. वो कभी अकेली नहीं रहती. उसके पापा या दादा-दादी हमेशा उसके पास होते हैं.

बेटी प्रतिष्ठा के साथ प्रेरणा. फोटो: फेसबुक बेटी प्रतिष्ठा के साथ प्रेरणा. फोटो: फेसबुक

अब आप मेजर हैं, करियर के लिहाज से आर्मी कैसी है?

मैं अभी पढ़ाई कर रही हूं. आर्मी में आप पढ़ाई भी करते हैं, अलग अलग कोर्सेज होते हैं. मैं कोर ऑफ़ मिलिट्री इंजीनियरिंग में हूं. यंग ऑफिसर्स कोर्स में अल्फ़ा इंस्ट्रक्टर भी रह चुकी हूं. मैंने बीएससी मैथ्स में किया, लेकिन मेरी अकैडमिक्स अच्छी थी तो टेक्निकल डिपार्टमेंट में मुझे अलाऊ किया गया, और अब मुझे बी टेक की डिग्री भी मिलेगी.

यूनिफ़ॉर्म में प्रेरणा. फोटो: फेसबुक यूनिफ़ॉर्म में प्रेरणा. फोटो: फेसबुक

जो लड़कियां आर्मी में आना चाहती हैं, उनको क्या मेसेज देंगी?

डिफेन्स फोर्सेज एक ऐसा प्लेटफ़ॉर्म है जहां आना गर्व की बात है. आपको ऐसा लगेगा कि आप अपनी ज़िन्दगी में कहीं ऐसी जगह पहुंची हैं जहां आकर आपको सच्ची ख़ुशी मिली है. यहां बहुत इज्ज़त मिलेगी आपको. कुछ कर गुजरने का जज्बा मिलेगा. अगर आपकी फैमिली को दिक्कत है इस करियर से तो उनको कन्विंस करिए. जैसे मैंने किया. जब वो देखेंगे कि देश की सेवा करने और एक बेहतरीन इंसान बनने का मौका डिफेन्स जैसा कम ही मिलता है, तो वो ज़रूर मानेंगे.

 

 

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