मिलिए लूसी विल्स से, जिनकी खोज प्रेगनेंट महिलाओं के लिए वरदान बन गई

लूसी की खोज ने मेडिकल साइंस की दुनिया में बड़ा बदलाव लाया था.

लालिमा लालिमा
मई 10, 2019
लूसी विल्स काम करती हुईं (फोटो- विकिपीडिया), गूगल ने डूडल बनाया है लूसी के लिए (राइट)

कई साल पहले, भारत में इंग्लैंड से एक महिला आई थी. नाम था लूसी विल्स. लूसी पेशे से रुधिर रोग वैज्ञानिक थीं. यानी खून से जुड़ी हुई बीमारियों के बारे में खोजबीन करती थीं. भारत आने का उनका मकसद भी ऐसा ही कुछ था. वो प्रेगनेंट औरतों के लिए वरदान बनकर आई थीं. कुछ साल भारत में रहकर उन्होंने जमकर रिसर्च की, और फिर कुछ ऐसी खोज कर डाली, जिसने इतिहास ही बदल दिया.

अब वो खोज क्या थी, और प्रेगनेंट औरतों में क्या दिक्कत थी, सब बताते हैं. एक-एक करके-

तो लूसी आज से करीब 130-132 साल पहले पैदा हुई थीं. साल था 1888. जगह थी इंग्लैंड का बर्मिंघम. घर पर सब विज्ञान से जुड़े हुए थे. कोई कहीं रिसर्च कर रहा था, तो कोई कहीं और. कोई सांइस से जुड़े हुए पेपर्स लिखता था. माने घर पूरी तरह से विज्ञान से पटा पड़ा था. लूसी भी इसी राह पर चल दीं. इंटरेस्ट तो था ही. पढ़ने में भी बढ़िया थीं. पढ़ती गईं. कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के न्यूहैम कॉलेज से बॉटनी और जियोलॉजी में ऑनर्स की डिग्री ली. लंदन स्कूल ऑफ मेडिसिन फॉर वीमन से भी इन्होंने पढ़ाई की.

पढ़ाई के बाद रिसर्च की दुनिया में आ गईं. 1928 में ये भारत आईं. उस वक्त लूसी थीं 40 साल की. भारत में बॉम्बे आईं. (नोट- अब इसे मुंबई कहते हैं). तो बॉम्बे में टेक्सटाइल इंडस्ट्री में काम करने वाली प्रेगनेंट महिलाओं को होने वाली एक दिक्कत पर इन्हें काम करना था. ये दिक्कत थी एनीमिया.

पहले जान लें कि एनीमिया होता क्या है. आपके खून में रेड ब्लड सेल्स होते हैं. इनकी एक प्रॉपर संख्या होती है. लेकिन कई बार इस संख्या में गिरावट आ जाती है. इसके अलावा इन सेल्स का साइज भी सामान्य साइज से बढ़ जाता है. तब आपका खून हेल्दी नहीं कहलाता. ये कंडीशन ही एनीमिया होती है. सरल शब्दों में कहें तो शरीर में खून की कमी को एनीमिया कहते हैं.

lucy-wills-3-750x500_051019065953.jpgगूगल ने लूसी विल्स के 131वें बर्थडे पर डूडल बनाया है. इसमें लूसी काम करते दिख रही हैं. और उनके सामने प्लेट में ब्रेड रखा हुआ है.

वापस लूसी पर आते हैं. तो जब लूसी बॉम्बे आईं, तब उन्होंने पाया कि बहुत सारी प्रेगनेंट औरतें एनीमिया से जूझ रही हैं. रिसर्च की. तब ये कारण सामने आया था कि अच्छे खानपान की कमी के कारण प्रेगनेंट औरतों को मैक्रोसाइटिक एनीमिया हो रहा है. एनीमिया के इस प्रकार में, रेड ब्लड सेल्स का आकार बड़ा हो जाता है.

फिर क्या, लूसी भिड़ गईं अपने शोध में. उन्होंने चूहों और बंदरों में पहले एक्सपेरिमेंट किए. एनीमिया को रोकने के लिए उन्होंने यीस्ट एक्सट्रेक्ट, आप जिसे खमीर भी कहते हैं, उसका इस्तेमाल उनके खाने में किया. नतीजा ये रहा कि बंदरों और चूहों की सेहत में सुधार हो गया. यानी शोध में ये सामने आया कि प्रेगनेंट महिलाओं को हुए मैक्रोसाइटिक एनीमिया को दूर करने के लिए एक स्पेशल पोषक तत्व की जरूरत होगी. कई साल तक इस स्पेशल पोषक तत्व को 'विल्स फैक्टर' कहा गया.

बाद में भी इस फैक्टर पर रिसर्च हुई. तब इस फैक्टर को फॉलिक एसिड कहा गया. आज भी डॉक्टर्स प्रेगनेंट औरतों को फॉलिक एसिड की गोलियां देते हैं. एक जरूरी बात, रेड ब्लड सेल्स को बनाने में, और हेल्दी रखने में फॉलिक एसिड का बहुत बड़ा हाथ होता है. ये एसिड रेड ब्लड सेल्स को नॉर्मल साइज में रखने में मदद करता है. इसके अलावा प्रेगनेंट औरत के पेट में पल रहे बच्चे के लिए भी फॉलिक एसिड बहुत जरूरी है.

खैर, अपनी रिसर्च करने के बाद लूसी वापस लंदन के रॉयल फ्री अस्पताल चली गईं. वहां पर उन्होंने अपने रिटायरमेंट तक, यानी साल 1947 तक काम किया. लूसी का नाम दुनिया के महान शोधकर्ताओं में शामिल है. लूसी विल्स की मौत साल 1964 में हुई.

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