क्या सजा मिली कठुआ में 8 साल की बच्ची का रेप करने वालों को?

चार दिनों तक गैंगरेप के बाद मार दी गई थी आठ साल की मासूम.

कुसुम लता कुसुम लता
जून 10, 2019

कठुआ गैंगरेप-मर्डर केस. पिछले साल सामने आए इस मामले में पठानकोट की अदालत ने तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. इनमें सांजी राम, सब इंस्पेक्टर दीपक खजूरिया और परवेश शामिल हैं. इन्हें रनबीर पीनल कोड (RPC) की धारा 376 (रेप), 302 (मर्डर) और 120 बी के तहत सजा दी गई है. वहीं सबूत मिटाने के दोषी पाए गए तीन पुलिसवालों को पांच साल कैद की सजा सुनाई गई है.

इससे पहले कोर्ट ने इस मामले में 6 लोगों को दोषी करार दिया था. इस मामले के एक आरोपी विशाल जंगोत्रा को कोर्ट ने सभी आरोपों से बरी कर दिया है. विशाल ने दलील दी थी कि घटना के वक्त वह मेरठ में था. इस मामले का आठवां आरोपी नाबालिग है. उसकी उम्र को लेकर सुनवाई जारी है, इस वजह से उसके खिलाफ गैंगरेप-मर्डर केस में फिलहाल सुनवाई शुरू नहीं हुई है.

जिन लोगों को उम्रकैद की सजा हुई है उनके नाम हैं- ग्राम प्रधान सांजी राम (मुख्य आरोपी), स्पेशल पुलिस ऑफिसर दीपक खजुरिया, परवेश. सांजी राम इस पूरी वारदात का मास्टरमाइंड है. उसने बकरवाल समुदाय को डराने और उन्हें सबक सिखाने के मकसद से इस पूरी घटना की योजना बनाई थी. परवेश ने नाबालिग आरोपी के साथ मिलकर बच्ची को बंधक बनाया. उसे नशीली दवाएं देकर उसके साथ रेप किया. स्पेशल पुलिस ऑफिसर दीपक खजूरिया को जब बच्ची के बंधक होने का पता चला तो उसने भी उसके साथ रेप किया. 

जिन लोगों को पांच साल की सजा हुई वो हैं- असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर तिलक राज, असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर आनंद दत्ता और पुलिस ऑफिसर सुरेंद्र कुमार. ये तीनों सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने के दोषी पाए गए हैं.

मामला जम्मू का है लेकिन सुनवाई पठानकोट में  हुई. इसके पीछे भी एक बड़ी वजह है. दरअसल, जम्मू-कश्मीर पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अप्रैल, 2018 में जम्मू कोर्ट में चार्जशीट फाइल की. तब वहां के वकीलों ने काफी विरोध किया था. इसके बाद पुलिस ने मामला जम्मू से ट्रांसफर करने की मांग की थी, सुप्रीम कोर्ट ने मामला पठानकोट ट्रांंसफर किया है.

आइये जान लेते हैं मामला क्या था?

कठुआ गैंगरेप-मर्डर का मास्टरमाइंड सांजी रामकठुआ गैंगरेप-मर्डर का मास्टरमाइंड सांजी राम

10 जनवरी, 2018 को इस बच्ची को उसके घर से किडनैप किया गया. 12 जनवरी को उसके पिता ने पुलिस में बच्ची की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखाई. 17 जनवरी को उसकी लाश गांव के करीब एक जंगल में मिली. मामला अप्रैल, 2018 में चार्जशीट दाखिल होने के बाद चर्चा में आया. जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इस मामले में 15 पन्नों की चार्जशीट फाइल की थी. इस चार्जशीट में लिखी बातें रोंगटे खड़े करने वाली थीं. चार्जशीट में लिखा था-

बच्ची को किडनैप करके एक स्थानीय मंदिर में बंधक बनाकर रखा गया. चार दिनों तक उसे नशे की गोलियां दी गईं. इस दौरान उसका कई बार रेप किया गया. अलग-अलग लोगों ने उसके साथ रेप किया. और आखिर में उसे मारकर फेंक दिया गया. रेप के सबूत मिटाने के लिए हत्या के बाद आरोपियों ने बच्ची को नहलाकर उसके कपड़े भी धोए थे.

चार्जशीट के एक हिस्से में लिखा है कि मामले के एक आरोपी को रेप करने के लिए ही मेरठ से जम्मू बुलाया गया था. वहीं नाबालिग आरोपी की उम्र को लेकर भी काफी विवाद हुआ था. द वायर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर की क्राइम ब्रांच ने इस साल फरवरी में उसकी मेडिकल रिपोर्ट कोर्ट में जमा की थी. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि आरोपी की उम्र 20 साल से अधिक है. अभी उसकी उम्र को लेकर सुनवाई चल रही है, इसलिए कठुआ मामले में उसके खिलाफ केस शुरू नहीं हुआ है.

बकरवाल समुदाय को सबक सिखाने के लिए बच्ची को बनाया शिकार

बच्ची का परिवार घुमंतू बकरवाल समुदाय से आता है. ये समुदाय सर्दी के दिनों में जम्मू में रहता है जबकि गर्मियों में अपने जानवरों को लेकर कश्मीर चला जाता है. चार्जशीट के मुताबिक, आरोपी बकरवाल समुदाय को सबक सिखाना चाहते थे. उन्हें डराना चाहते थे ताकि वे इलाका छोड़कर भाग जाएं. इसलिए बच्ची को निशाना बनाया गया. बच्ची का अपहरण करने, उसका गैंगरेप करने और उसकी हत्या की पूरी योजना सांजी राम ने बनाई थी. घटना जब सामने आई तब जम्मू-कश्मीर में बीजेपी-पीडीपी गठबंधन की सरकार थी. महबूबा मुफ्ती मुख्यमंत्री थीं. बीजेपी के दो नेता चौधरी लाल सिंह और चंदर प्रकाश गंगा ने फरवरी, 2018 में आरोपियों के समर्थन में रैली निकाली थी. ये दोनों उस वक्त राज्य सरकार में मंत्री भी थे. बाद में दोनों से इस्तीफा ले लिया गया था.

इस मामले में घटना के ठीक डेढ़ साल बाद फैसला आया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बच्ची के पेरेंट्स इस फैसले खुश नहीं हैं. उन्हें उम्मीद थी कि दोषियों को मौत की सजा मिलेगी. सोशल मीडिया पर भी कई लोग दोषियों को मिली उम्रकैद की सजा को कम बता रहे हैं. वहीं, कोर्ट में बच्ची की तरफ से केस लड़ने वाली वकील दीपिका सिंह रजावत ने ट्वीट किया कि ये फैसला उस बच्ची को श्रद्धांजलि है.

 

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