करण जौहर की फ़िल्म 'स्टूडेंट ऑफ़ द इयर 2' का पोस्टर देखकर लगता है वो कभी स्कूल गए ही नहीं

करन जौहर के फ़िल्मी स्कूल हकीकत से बहुत दूर होते हैं.

सरवत फ़ातिमा सरवत फ़ातिमा
अप्रैल 11, 2019
(फ़ोटो कर्टसी: ट्विटर)

एक बड़ा आलीशान कॉलेज. कूल टीचर्स. सब एकदम हाई-फाई. बच्चों ने ब्रांडेड कपड़े पहने हुए. लड़कियां शॉर्ट्स और स्कर्ट्स में. फुल मेक-अप. लड़के टी-शर्ट और जींस पहने हैं. सबके बाल एकदम परफेक्ट हैं. ऐसा सिर्फ़ करण जौहर की फ़िल्मों में ही मुमकिन है. क्योंकि असल में हिंदुस्तान में स्कूल कैसे होते हैं, ये हम सबको पता है. अगर बाल ज़रा भी इधर के उधर हो जाएं तो टीचर बवाल काट देते थे.

इसलिए जब करन जौहर ने अपनी नई फ़िल्म ‘स्टूडेंट ऑफ़ द इयर 2’ का नया पोस्टर निकाला तो सोशल मीडिया पर सबका बस एक सवाल था. क्या करण ख़ुद कभी स्कूल गए भी हैं? क्योंकि जो स्कूल वो अपनी फ़िल्मों में दिखाते हैं, वैसे स्कूल असल में होते नहीं हैं.

दरअसल करण ने सोशल मीडिया पर ‘स्टूडेंट ऑफ़ द इयर 2’ फ़िल्म में काम कर रही अनन्या पांडे और तारा सुतारिया की तस्वीरें रिलीज़ कीं. ये दोनों स्कूल में पढ़ने वाली दो लड़कियों का किरदार निभा रही हैं. आप ख़ुद देखिए तस्वीरें:

अब किस स्कूल की यूनिफ़ॉर्म ऐसी होती है? हां, माना सिनेमा है. चीज़ें हकीकत से थोड़ी बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई जाती हैं. पर करण की कोई भी फ़िल्म उठाकर देख लीजिए. कभी ख़ुशी कभी ग़म से लेकर स्टूडेंट ऑफ़ द इयर, हर फ़िल्म में स्कूल एक जैसे ही हैं. यहां पढ़ने वाले बच्चे भी.

अब, बच्चे जब ये फ़िल्में देखते हैं, अपने मन में भी वैसी ज़िन्दगी जीने के सपने पाल लेते हैं. उनको भी वही माहौल चाहिए. वैसे ही बिहेव करना है जैसे फ़िल्मों में स्टूडेंट्स करते हैं. यही सबक अब लोग करण को सोशल मीडिया पर भी पढ़ा रहे हैं.

एक यूज़र ने लिखा:

“हम हिंदुस्तान में हैं, करण. किस कॉलेज में ये ड्रेस कोड होता है? कपड़ों के मामले में कुछ भी नहीं बदला. 'कुछ कुछ होता है' से लेकर 'स्टूडेंट ऑफ़ द इयर' तक. मिस ब्रिगेंज़ा से लेकर ये, सब एक ही तरह के कपड़े.”

दूसरे यूज़र ने लिखा:

“ऐसा सिर्फ़ धर्मा प्रोडक्शन के कॉलेज में होता है. क्योंकि अगर ये कोई नॉर्मल हिंदुस्तानी कॉलेज होता तो अभी तक इसपर ऐसे कपड़े पहनने के लिए फाइन पड़ चुका होता.”

एक ट्विटर यूज़र ने तो बहुत ही सही बात कही:

“ये फ़िल्म एक सपनों की दुनिया से है. ये ज़िन्दगी किसी भी कॉलेज स्टूडेंट ने नहीं जी है.”

बात तो सही है. हमें करण से ये उम्मीद नहीं है कि वो हकीकत को परदे पर उतार दें. उनकी फ़िल्म-मेंकिंग का वो स्टाइल ही नहीं है. पर जिस तरह के स्कूल वो अपनी फ़िल्मों में दिखाते हैं, वो सिर्फ़ इंडियन स्टूडेंट्स के दिल पर छुरियां चलाते हैं.

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