हर्षिता हत्याकांड: दहेज हत्या का केस जिसने पूरे कानपुर को हिला दिया है

हर्षिता ने फोन पर कहा, 'पापा हमें बुला लो, सास झाड़ू से मार रही है.' पिता पहुंचे तब तक मौत हो चुकी थी.

लालिमा लालिमा
जुलाई 11, 2019
हर्षिता की शादी साल 2017 में हुई थी. फोटो- स्पेशल अरैंजमेंट

एक लड़की थी. नाम था हर्षिता अग्रवाल. अभी 7 जुलाई को 28 साल की होने वाली थी. 'थी' इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि अब वो है नहीं इस दुनिया में. वो मर चुकी है. उसे मार दिया गया है. 2 करोड़ के दहेज के लिए उसकी हत्या कर दी गई.

क्या है हर्षिता की कहानी?

हर्षिता कानपुर की रहने वाली थी. अच्छे पढ़े-लिखे, और संपन्न परिवार से थी. पिता कागज़ कारोबारी थे. अपनी बेटी को किसी भी तरह की कोई कमी नहीं होने दी, कभी भी. नाज़ो से रखा था. हर्षिता खुद पढ़ने में अच्छी थी. एनिमेशन में दिलचस्पी थी. इसलिए मां-बाप ने एनिमेशन में ग्रेजुएशन कराने मुंबई भी भेजा था. पढ़ाई के बाद वापस कानपुर आ गई थी. वहीं के डीएसपी कल्याणपुर स्कूल में पढ़ाने लगी थी. कुछ दिन बाद हर पैरेंट्स की तरह, हर्षिता के पैरेंट्स ने भी उसकी शादी करने का फैसला किया.

3-750x500_071119054604.jpgहर्षिता ने एनिमेशन का कोर्स किया था. शादी के पहले अच्छी-खासी नौकरी भी करती थी. इस तस्वीर में अपने पति के साथ है. फोटो- स्पेशल अरैंजमेंट

कानपुर के ही एक लड़के को खोजा. नाम था उत्कर्ष अग्रवाल. उत्कर्ष का फैमिली बिजनेस था. उसके पिता सुशील अग्रवाल की पॉलिस्टर धागे बनाने की फैक्ट्री थी. रिश्ता उस वक्त हर्षिता के घरवालों को जम गया. शादी सेट हो गई. हर्षिता की मां संतोष अग्रवाल, उत्कर्ष की मां रानू अग्रवाल को पहले से ही जानती थीं. उन्होंने ये सुना था कि रानू बहुत तेज़ औरत है, लेकिन उन्होंने सोचा कि वो पढ़ी-लिखीं हैं, शायद लोग इसलिए ऐसा बोलते होंगे. उन्होंने इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया. और यही बात हर्षिता के लिए उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी दिक्कत बन गई.

वापस शादी पर आते हैं. शादी सेट हुई. साल 2017 में शादी हो गई. उस वक्त हर्षिता 25 साल की थी. हर्षिता की मां ने बताया कि शादी के बाद, जब सारे खर्चे का हिसाब किया जा रहा था, तब उत्कर्ष के घरवालों ने कहा कि वो पैसे नहीं देंगे. यानी सारा खर्चा हर्षिता के घरवालों को ही उठाना पड़ा. उन्होंने ही हर जगह पर पेमेंट की. बेटी की शादी की बात थी, इसलिए बात न बढ़े सोचकर ये सब कर दिया. सोचा बेटी खुश रहेगी. लेकिन ऐसा हुआ नहीं.

हर्षिता शादी करके अपने ससुराल चली गई. 3-4 महीने तक सब ठीक रहा. लेकिन फिर उसकी सास दहेज की मांग करने लगी. वो भी 2 करोड़ रुपए के दहेज की. हर्षिता को परेशान किया जाने लगा. घर पर काम करने के लिए एक औरत को पहले से ही रखा था, उसके बाद भी हर्षिता से काम करवाया जाने लगा. उसे दिन-रात परेशान किया जाने लगा.

हर्षिता के माता-पिता को जब ये बात पता चली, तो वो लोग उसे अपने पास ले आए. लेकिन कुछ ही दिनों बाद हर्षिता के ससुराल वाले और उसका पति उत्कर्ष उसे लेने पहुंच गए. वादा किया कि आगे परेशान नहीं किया जाएगा. हर्षिता भी वापस जाने के लिए मान गई. अपने ससुराल चली गई.

6-750x500_071119054759.jpgइस तस्वीर में हर्षिता अपने ससुराल वालों के साथ है. उसकी ननद उसके बगल में खड़ी है, लेफ्ट साइड से दूसरे नंबर पर. बीच में सास रानू है. उसके बगल में उत्कर्ष है. उत्कर्ष के बगल में हर्षिता के ससुर हैं. फोटो- स्पेशल अरैंजमेंट. 

संतोष ने हमें बताया, कि हर्षिता जब वापस गई, तब कुछ महीने सब ठीक रहा. लेकिन उसके ससुराल वाले फिर से अपने पुराने ढर्रे पर आ गए. दहेज के लिए परेशान करने लगे. उसकी ननद की शादी होने वाली थी, उससे पहले वो लोग हर्षिता से 25 लाख रुपए मांगने लगे. कहने लगे कि वो अपने मां-बाप से पैसे मांगकर उन्हें दे.

संतोष बताती हैं,

'हर्षिता हमें कुछ बताती नहीं थी. कसम देने पर बताती थी कि वो लोग ऐसा बोलते हैं. हर्षिता पैसे देने के सख्त खिलाफ थी. इसलिए उसने हमें एकदम मना कर दिया था कि हम पैसे न दें. रानू और सुशील ने बैंक से काफी लोन लिया हुआ था. उस लोन से कई मशीन खरीदकर एक फैक्ट्री लगाई थी. उस लोन को चुकाने के लिए वो मेरी बेटी से पैसा मांगते थे. दो करोड़ रुपए मांग रहे थे. कहते थे कि तुम्हारे पापा के पास बहुत पैसा है, उनसे ले आओ. और अगर नहीं लाई, नहीं मांगी तो तुम्हारे साथ अच्छा नहीं होगा. रोज उसे मारते भी थे. रानू मेरी बेटी को हर बात पर डांटती रहती थी. किसी के भी सामने उसके ऊपर चिल्ला देती थी. उत्कर्ष भी अपनी मां का साथ देता और मेरी बेटी को डांटता रहता था. और बाद में हमसे बोलता था कि वो हर्षिता से बहुत प्यार करता है. हमने उसे कई बार कहा था, कि वो घर छोड़ दे, लेकिन वो नहीं मानी. वो कहती रही कि वो उत्कर्ष से बहुत प्यार करती है. इसलिए उसे छोड़ेगी नहीं. वो कहती थी कि एक दिन सब ठीक हो जाएगा. पर कुछ ठीक नहीं हुआ.'

5-750x500_071119054924.jpgउत्कर्ष भी कई बार हर्षिता को डांटता था. अपनी मां का साथ देता था. फोटो- स्पेशल अरैंजमेंट

सब ठीक करने के लिए ही हर्षिता के पिता ने एक महीने पहले एक ट्रिप प्लान की थी. हर्षिता की एक बड़ी बहन है. उनकी भी शादी हो चुकी है. हर्षिता के पिता पदम अग्रवाल ने यूएस की ट्रिप प्लान की थी. अपनी दोनों बेटियों और दामादों के लिए. साथ में पदम और संतोष भी यूएस गए थे. हर्षिता के पिता ने सोचा था कि कुछ दिन अलग माहौल में रहेगी बेटी, तो सब ठीक हो जाएगा. 15 जून को ही वो लोग भारत लौटे थे.

21 दिन बाद हर्षिता का बर्थडे था, 7 जुलाई को. उसके घरवालों ने बर्थडे पार्टी प्लान की थी. लेकिन 6 जुलाई को हर्षिता का कॉल आया. उसने अपने पापा से कहा, 'पापा हमें बुला लो. सास हमें झाडू से मार रही है'. कुछ देर बाद सुशील अग्रवाल ने पदम अग्रवाल को कॉल किया. और कहा कि वो जल्दी आ जाएं. पदम जब हर्षिता के ससुराल पहुंचे, तो देखा कि तब तक हर्षिता मर चुकी थी. उन्होंने पुलिस को कॉल किया.

whatsapp-image-2019-07-10-at-6_071119055020.jpgहर्षिता के आरोपियों के लिए फांसी की मांग हो रही है कानपुर में. फोटो- स्पेशल अरैंजमेंट

इस मामले में हर्षिता के ससुराल में काम करने वाली डोमेस्टिक हेल्प ने पुलिस को गवाही दी. उसने बताया कि रानू अग्रवाल, हर्षिता को झाडू़ से मारती थी. और 6 जुलाई को भी रानू ने ही हर्षिता को सातवीं मंजिल से धक्का देकर मार डाला. पुलिस ने FIR दर्ज करके आरोपी सास को गिरफ्तार कर लिया है. ससुर और पति की भी गिरफ्तारी हो चुकी है.

वहीं इस वक्त इस केस को लेकर कानपुर में हंगामा मचा हुआ है. लोग आरोपियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. आरोपियों के लिए फांसी की मांग हो रही है. 10 जुलाई को भी विरोध प्रदर्शन हुआ. और 11 जुलाई को कैंडल मार्च निकाला जाएगा. हमने हर्षिता की एक दोस्त से बात की. उन्होंने हमें बताया कि वो लोग चाहते हैं, कि हर्षिता को न्याय मिले. इसलिए वो लोग प्रदर्शन कर रहे हैं.

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