फिल्म रिव्यू: ठग्स ऑफ़ हिंदोस्तान

पानी के जहाज़ों के अलावा अमिताभ, आमिर, कटरीना और दंगल वाली फातिमा सना शेख हैं फिल्म में.

तस्वीर में हिरोइन खोजिए.

फिल्म: चाटना मेरा स्वभाव है

ऑडियंस: और चटना मेरा

कुछ फ़िल्में, फ़िल्में नहीं होतीं. वो मानव इतिहास पर बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न होती हैं. उन्हें देखकर आप अंतरात्मा तक हिल जाते हैं. ये फ़िल्में आपको झकझोर देती हैं. आपको याद दिलाती हैं कि प्रिये तुम कबसे सोयी नहीं हो. अभी सीट को पीछे कर सो जाओ. ऐसी नौकरी क्यों करती हो जिसमें तुम्हें छुट्टी के दिन भी 8 बजे का अलार्म लगाना पड़ता है ऐसा सिनेमा देखने के लिए.

मैंने फिल्म से वापस आकर खुद को देखा तो पाया कि एक 'काफ्काएस्क' दुनिया में हूं. ये दुनिया एक क्वेश्चन मार्क बन चुकी है. कुछ सवाल आपसे साझा करती हूं.

1. अमिताभ नरेटर क्यों नहीं हैं

अमिताभ का जन्म पीरियड और हिस्टोरिकल फैंटेसी फिल्मों में काम करने के लिए नहीं, उनका नरेशन करने के लिए हुआ है. चाहे अपनी लगान ले लो, जोधा अकबर, परिणीता. यहां तक कि मणिकर्णिका. अब तो कोई बड़े बजट की पिक्चर आने के पहले ही उसके बैकग्राउंड में दिमाग अमिताभ की आवाज फिट कर लेता है. अमिताभ की जगह किसी और की आवाज सुनकर दिल बैठ सा गया. अमिताभ का किरदार देखकर तो पूरा ही बैठ गया. वैसे भी फिल्म है आमिर के बारे में. अमिताभ से नरेशन करवा लेते तो इज्जत ही रह जाती.

2. 1795 में लोग दे प्याला दे प्याला चाय कैसे पी रहे

हमने तो ऐसा सुना था कि 1820 के बाद चाय के बागान वगैरह बनने शुरू हुए थे. कमर्शियल खेती हुई फिर चाय की. इंडिया वाले तो अपनी चाय बनाते नहीं थी. अंग्रेजन का दिया हुआ चस्का था. यहां रोनित रॉय न केवल चाय पी रहे बल्कि पिला रहे. और अंग्रेज कमांडर जॉन क्लाइव बढ़िया चाय पीते हुए इंडिया की मौत का तमाशा देख रहा.

clive_110818021556.jpgहिंदी बोलने वाले अंग्रेज क्लाइव के किरदार में लॉयड ओवेन

3. अंग्रेज आपस में हिंदी में क्यों बात करते हैं

क्या उन्हें मालूम है कि वो एक हिंदी फिल्म के अंदर हैं? या उन्हें हिंदी की आदत लग गई है? हमारे यहां देखिए, अगर 5 के ग्रुप में कोई 2 लोग एक ही मातृभाषा वाले निकल आए तो उनको घंटा फर्क नहीं पड़ता कि बाकी लोग सहज हैं या असहज. वो तो अपनी ही भाषा बोलते हैं.

4. ज़फीरा आगे आकर लीड क्यों नहीं करती

पहले तो इंटरवल तक फातिमा सना शेख के किरदार का नाम समझ में नहीं आता. कभी लगता है जखीरा है, कभी जहीरा, कभी बघीरा. लास्ट सीन में नाम ढंग से समझ में आया. उसके सामने उसके मां-बाप को अंग्रेज गोली मार देते है. उसे बदला लेना है. मतलब बेसिकली पूरी लड़ाई उसकी है.

zafira_110818021843.jpgज़हीरा/ज़फीरा/जखीरा/बघीरा

मगर वो सिर्फ बैकग्राउंड से तीर चलाती है. न लड़ती है. न डायलॉग बोलती है. केवल मुसीबत में फंसती है. हीरो, एंटी-हीरो सब उसको बचाने में लगे रहते हैं. अनट्रेंड ठग भी उस ट्रेन्ड लड़ाका से बेहतर लड़ते हैं. भाई लड़कियों का कोई काम नहीं होता तो उन्हें फिल्म में क्या महिला कोटा भरने के लिए लेते हो? या महज पुरुषों का सॉफ्ट साइड दिखाने के लिए?

5. महिला कोटा यानी कटरीना कैफ कौन से देश से हैं

देखिए क्या है कि इतिहास कहता है उस वक़्त तवायफें होती थीं. बट आई एम सॉरी, उनके ऐब्स नहीं होते थे. कभी ऐसा सुना तो नहीं. ऐसा भी नहीं सुना कि वो खुली जांघों वाले कपड़े पहनती हों. मगर चलो ठीक है, डांसर है. और फिल्म में हिस्ट्री नहीं खोजनी चाहिए. पर कोई एक बात बता दे. इतनी ज्यादा इंडियन डांसर की एक्सेंट इतनी इंग्लिश क्यों है. क्या वो दिन ख़त्म हो गए जब कटरीना की आवाज डब कर दी जाती थी.

suraiyya_110818021657.jpgमहिला कोटा से आई सुरैय्या

6. और अगर कटरीना फिल्म में हैं भी तो पोस्टर में क्यों हैं

कुल दो डायलॉग हैं कटरीना के फिल्म में. दूसरा डबल मीनिंग है. खैर. महज दो डायलॉग और दो गाने होने के बावजूद वो पोस्टर पर हैं. गेस्ट अपीयरेंस को गेस्ट अपीयरेंस मानने में कैसी शर्म. मगर नहीं, कटरीना के स्टारडम को देखते हुए फातिमा सना शेख को पोस्टर में और पीछे धकेल दिया गया. ट्रेलर में कटरीना की मौजूदगी देखकर लगा था कि प्लॉट में इनका कुछ योगदान होगा. मगर अफ़सोस.

7. ज़ीशान अयूब के किरदार को कौन सी विद्या आती है

बुद्धू टाइप के पंडित बने हैं फिल्म में. यूं भी नहीं कि आमिर शरलॉक हों तो पंडित वॉटसन हों. जैसे अपनी बाकी फिल्मों में जीशान ने हीरो के किरदार में जान डाली है, वैसा इस बार कुछ भी नहीं हुआ है. खासकर रांझना के मुरारी के बाद. हीरो, एंटी हीरो और कॉमिक रिलीफ, हर किरदार आमिर ही कर रहे हैं. आमिर कहते हैं अंग्रेजों से कि पंडित को छोड़ दो. उसकी विद्या से आजाद को हराएंगे. ये विद्या कौन सी थी, पता न पड़ा.

zeeshan_110818021754.jpgरांझना का मुरारी भी कुछ न कर सका

8. अमिताभ के पीछे बाज़/चील/अज्ञात पक्षी क्यों उड़ता है

अमिताभ के फ्रेम में आते ही पक्षी आ जाता है. वो पक्षी क्या उनका संदेशवाहक है? नहीं. उनका स्पिरिट एनिमल है? नहीं. उनका दोस्त है? नहीं. फिल्म का जरूरी मोटिफ है? नहीं. बस देखने में अच्छा लगता है इसलिए लगा दिया?

9. ये कौन सी आज़ादी है जो फ्रीडम मूवमेंट के पहले मांगी जा रही थी

ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन के दौरान आजादी का कोई कॉन्सेप्ट नहीं था. क्योंकि कंपनी का शासन फॉर्मल तौर पर ब्रिटिश क्राउन के अंडर नहीं था. इतिहास की किताबें ऐसा कहती हैं. छोटे-छोटे राजा अपने छंटाक भर के राज्य बचाने में लगे हुए थे. फिर भी ठग्स से लेकर मणिकर्णिका तक सभी आजादी मांग रहे हैं. कौन सी आजादी है और किससे?

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