9 माह के बच्चे ने कोर्ट से पूछा, 'मुझे पब्लिक प्लेस में स्तनपान की छूट क्यों नहीं है?'

क्या नन्हे अवयान की ये याचिका भारत के कानून में बदलाव ला पाएगी?

बीते साल एक्ट्रेस और मॉडल लीसा हेडेन अपनी ब्रेस्टफीड करती तस्वीर शेयर की थी

मां भगवान है. मां अन्नपूर्णा है. सोशल मीडिया पर अच्छा दिखने के लिए मां का खूब इस्तेमाल करते हैं हम लोग. हमारे पीएम वगैरह भी. मगर इंडिया में मां अगर पब्लिक में बच्चे को दूध पिलाए, तो वो हो जाती है कामुकता का पात्र. लोग कहते हैं, पब्लिक कोई जगह है बच्चे को दूध पिलाने की.

यही वजह है कि 9 महीने के एक बच्चे ने कोर्ट में अपील की है कि पब्लिक प्लेस में ब्रेस्टफीडिंग करना अश्लील न कहा जाए. अब आप कहेंगे 9 महीने का बेबी कोर्ट कैसे जा सकता है. जा सकता है, अपने मां-बाप के सहारे.

9 महीने के अवयान की मम्मी-पापा, नेहा और अनिमेष रस्तोगी वकील हैं. उन्होंने महिलाओं के हक़ में कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. हुआ यूं कि जब बेबी अवयान 2 महीने का था, तो उनकी मां नेहा उन्हें लेकर दिल्ली से बेंगलुरु जा रही थीं. फ्लाइट 3 घंटे की थी. और बच्चे को फीड करने की जरूरत थी. ऐसे में उन्होंने मदद मांगी तो क्रू से कोई ख़ास सपोर्ट नहीं मिला. वो एकांत चाहती थीं. मगर जहाज भरा हुआ था.

उनसे अपेक्षित था कि वो बेबी को लेकर टॉयलेट में चली जाएं. मगर आप टॉयलेट में बैठकर खाना पसदं करेंगे क्या. कुल-मिलाकर नेहा को काफी तकलीफ हुई उस दिन. और उसके बाद जुलाई 2018 में उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की.

कोर्ट में पहली सुनवाई हुई. तो उनका जवाब आया कि नगर निगम ने हर शौचालय के साथ चेंजिंग रूम बनाया हुआ है. मगर अनिमेष और नेहा इस उत्तर से संतुष्ट नहीं हैं. क्योंकि पब्लिक टॉयलेट बेहद गंदे रहते हैं. और किसी गंधाते कमरे में बच्चे को दूध पिलाना, मां और बच्चे, दोनों के लिए टॉर्चर है.

 

breasfeed_120418021041.jpgमां भगवान है. मां अन्नपूर्णा है. बस उसको दूध पिलाने की छूट नहीं है.

नेहा का तर्क इस मामले में सटीक है:

'धूम्रपान के लिए हर पब्लिक प्लेज में अलग कमरा या जोन होता है. मगर बेबी को फीड कराने के लिए कोई कमरा नहीं होता. सिर्फ इसलिए कि वो शिशु है, क्या उसके पास एक स्वस्थ जीवन का अधिकार नहीं होना चाहिए.'

महंगे मॉल से लेकर बड़े-बड़े होटलों तक, कहीं भी बेबी फीडिंग एरिया नहीं दिखता. और पब्लिक प्लेस में खुले में बच्चे को दूध पिलाओ तो लोग ऐसे घूरते हैं जैसे नाच चल रहा हो.

इंडिया में कोई भी माइनर यानी 18 से उम्र का लड़का या लड़की अपने माता-पिता के ज़रिए कोर्ट में अपील कर सकते हैं. अवयान की अपील की अगली सुनवाई फरवरी में है. क्या ये 9 माह बच्चा देश के कानून में कोई बड़ा बदलाव ला पाएगा?

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